गुजरात: दलित आंदोलन का चेहरा जिग्नेश मेवानी ने छोड़ी AAP

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ऊना में गौ रक्षकों द्वारा दलित युवको पर हुए अत्याचार के बाद हिंदुत्व ताकतों के खिलाफ आंदोलन के बड़े नेता बनकर उभरे जिग्नेश मेवानी ने अाम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

शनिवार को पार्टी से इस्तीफा देने के बाद जिग्नेश ने कहा कि उनके और ‘आप’ पार्टी के बीच कोई लड़ाई नहीं है।

Jignesh Mevani

उन्होंने कहा , ‘आम आदमी पार्टी के लोग मेरी बात को मान गए हैं। आम आदमी पर्टी भी यही चाहती है कि दलित आंदोलन खुद ही आगे बढ़े। मैं साफ करना चाहता हूं कि ‘आप’ पार्टी ने मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया हैं’

ऊना में दलितों पर हुए अत्याचार के बाद जिगनेश ने ही दलित लोगों को समाज की गंदगी उठाने से मना किया था। इसमें तय हुआ था कि दलित समुदाय के लोग ना तो मैला उठाएंगे और ना ही मरे हुए पशुओं को लेकर जाएंगे।

गौरतलब है कि 11 जुलाई को हुिंदुत्व के लोगों ने गाय की चमडी़ की तस्करी के शक में दलित युवकों की पिटाई कर दी थी। जिसके बाद गुजरात में एक बड़ा आंदोलन शुरू हो गया था और अचानक गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल ने इस्तीफा दे दिया था

1 COMMENT

  1. Dalits should take the movement forward with dalits of the other than Gujarat state and press for all constitutional rights and the right to live with dignity.Modi claims himself to be from the OBC category,surprisingly did nothing during his tenure as CM to allow Dalits entry into temples in Gujarat.He did nothing for the social upliftment of the dalits nor economic betterment for them,,only catered to the needs of the corporate world.This churning of dalits should take place at the national level irrespective of party and ideological affiliation.For this dalits professors in different states should put their heads together to carry forward the fight of the underprivileged dalits to the logical conclusion.Need be they should seek financial help by way of small donations from the non-fake dalits who espouse their cause.Its a question of human dignity to live as a decent human being,and upper castes cannot deny this to them

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