उत्तर प्रदेश में सपा-भाजपा की सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश इस बार सफल नहीं होगी: जयंत चौधरी

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उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई सियासी सरगर्मी के बीच अजित सिंह के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने रविवार (25 सितंबर) को सपा और भाजपा पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के जरिए चुनावी फायदा उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि राज्य में भाईचारा खत्म करने का प्रयास इस बार सफल नहीं होगा।

रालोद महासचिव जयंत चौधरी ने कहा, ‘हमारी कोशिश होगी कि इस बार भाईचारा नहीं टूटे। हम दोनों समुदायों के बीच प्रचार अभियान चला रहे हैं। हम दोनों समुदायों (जाट एवं मुस्लिम) से बातचीत कर रहे हैं। लोगों को इस बात का अहसास है कि उनको बरगलाया गया है। सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से दोनों की राजनीतिक शक्ति को नुकसान पहुंचा है।’ चौधरी ने माना कि साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के कारण पिछले लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को बहुत नुकसान पहुंचा।

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जयंत चौधरी ने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए सपा और भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, ‘सब जानते हैं कि मुजफ्फरनगर दंगों का फायदा किसको हुआ। वे ही लोग फिर से इस तरह का माहौल पैदा करना चाहते हैं। सपा ने फायदे की बात सोची थी लेकिन उसको नुकसान हो गया। सबसे बड़ी बात यह कि अखिलेश यादव की छवि को बहुत बड़ा धक्का लगा।’ उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के जो नेता विवादित बयान देते हैं उनको पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का संरक्षण मिला हुआ है।

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भाषा की खबर के अनुसार,पूर्व सांसद ने कहा, ‘पिछले कुछ महीने से साक्षी महाराज, योगी आदित्यनाथ और साध्वी प्राची विवादित बयान क्यों नहीं दे रहे हैं। इसकी वजह यह है कि उनको शीर्ष नेतृत्व ने मना किया है। इसका मतलब यह है कि जब वे बयान दे रहे थे तब भी उनको शीर्ष नेतृत्व का इशारा मिला हुआ था।’ हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव में रालोद के गठबंधन करने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर जयंत चौधरी ने कुछ भी खुलकर कहने से इंकार किया। उन्होंने कहा, ‘हमारी पार्टी की कार्यकारिणी में फैसला हुआ कि पहले संगठन को मजबूत किया जाएगा। गठबंधन को लेकर कोई बात नहीं हुई है।’

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