केजरीवाल ने PM मोदी से किया सवाल BSF जवान तेज बहादुर कहां हैं?

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सोशल मीडिया पर सबसे पहले तेज बहादुर का वीडियो आया था उसके बाद बीएसएफ के अन्य जवानों ने भी सीधे-सीधे पीएम मोदी से वीडियो के माध्यम से सवाल करने शुरू कर दिए थे। तेज बहादुर का वीडियो सामने आने के बाद निश्चित तौर पर उनके साथ क्या हुआ ये पता नहीं चल सका।

केजरीवाल

अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी से पुछा है कि तेज बहादुर कहां है।

आपको बता दे कि बीएसएफ जवान की पत्नी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि उनके पति लापता हैं और पिछले तीन दिन से परिवार के सदस्य उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। जबकि इस बारें में न्यायालय में बीएसएफ की तरफ से रखे गए पक्ष में कहा गया है कि वह प्रमाण के साथ इस बात को कहते है कि उनकी पत्नी प्रतिदिन ही तेजबहादूर से फोन पर बात करती है।

आज ‘लापता’ जवान तेजबहादूर को खोजने की मांग करने वाली याचिका पर आज सुनवाई के लिए कोर्ट तैयार हो गया था और तेजबहादुर की पत्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि पत्नी को उसके साथ दो दिन रहने की इजाजत भी दी जाए।

इसके अलावा गृह मंत्रालय ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि जवान नज़रबंद नहीं है बल्कि उसे अन्य बटालियन में स्थानांतरित किया गया था।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, पूर्व में जवानों के लगातार वीडियो आने के बाद सेना प्रमुख को इस मामले दखल देनी पड़ी और एक विशेष नम्बर जारी कर शिकायते भेजने का प्रवधान किया गया और सोशल मीडिया पर इस प्रकार से अपनी बात को रखने के लिए प्रतिबंध लगाया गया।

लेकिन उसके बाद भी कई वीडियो सामने आए। वीडियो संदेश देते सैनिक तो मशहूर हुए लेकिन उनका बाद में क्या हुआ इस बारें में कोई खास जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच पाई।

ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी राज्य का मुख्यमंत्री सीधे तौर पर वीडियो विवाद पर प्रधानमंत्री से सवाल कर पुछ रहा है कि जवान का क्या हुआ। आपको बता दे कि बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने 9 जनवरी को फेसबुक पर अपने कुछ वीडियो पोस्ट किए थे। वीडियो में जवानों को कथित तौर पर दिए जाने वाले खाने को दिखाया था। यादव ने दाल में केवल हल्दी और नमक होने का दावा किया था, उसने साथ ही कहा था कि उन्हें जली हुई रोटी दी जाती है।

3 COMMENTS

  1. ओबामा ने शुरू की प्राईवेट कंपनी में जॉब, हमारे तो नगरसेवक भी 5 साल में करोडो कमा लेते है
    Sunday, 5 February 2017
    https://socialdiary24.blogspot.in/2017/02/5.html
    दुनिया के सबसे शक्तिशाली इंसान रहे बराक ओबामा को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। हाल ही में किराए के घर में शिफ्ट होकर नौकरी करने का फैसला करने वाले ओबामा ने अपने फांउडेशन की कंपनी में नौकरी शुरू कर दी है। इंटरनेट पर वायरल तस्वीरों में दिखाया गया है कि ओबामा ने कंपनी में जाकर लोगों से मुलाकात की और काम की बारिकियों को सीखा।

    अब आप सोच रहे होंगे कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली पद पर रहे ओबामा को नौकरी करने की क्या जरूरत है। तो बता दें कि इसके पीछे उनकी इमानदारी है। जितनी सैलरी उन्हें बतौर राष्ट्रपति मिलती थी उसका बड़ा हिस्सा वे ओबामा फाउंडेशन को दान में दे देते थे।
    इंटरनेट में वायरल तस्वीरों की माने तो ओबामा ने अपने फाउंडेशन की एक कंपनी में नौकरी शुरू कर दी है। हालांकि कंपनी ने खुलासा नहीं किया है कि ओबामा वहां क्या काम करेंगे। इससे पहले वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ओबामा वाशिंगटन में ही किराए के घर पर रहेंगे।

    इस किराए के घर में वह करीब दो वर्ष तक रहेंगे। उनके यहां पर एक किराए के घर में रहने के पीछे भी एक बड़ी वजह है। पहला तो यह कि अमेरिका के कानून के मुताबिक किसी भी पूर्व राष्ट्रपति को सरकार की तरफ से कोई आवास नहीं दिया जाता है।
    इसके अलावा दूसरी वजह यह है कि उनकी छोटी बेटी की स्कूल की पढ़ाई अभी जारी है। लिहाजा उसकी पढ़ाई पूरी होने तक वह वाशिंगटन में ही किराए के मकान में रहेंगे। हालांकि इस दौरान भी उन्हें पूर्व राष्ट्रपति के तौर पर सुरक्षा प्रदान की जाएगी। साथ ही उनके परिवार के अन्य लोगों को भी सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा मिलती रहेगी। हालांकि यहां यह बताना जरूरी है कि ओबामा का गृहनगर शिकागो है।

  2. Dharmesh Prem shared Himanshu Kumar’s post.
    23 hrs Himanshu Kumar February 9 at 9:21am
    बामन का छोटा भाई भीमा और 14 साल की साली सुखमति बाज़ार से लौट रहे थे,

    रास्ते में जंगल में पुलिस वाले आराम कर रहे थे,

    पुलिस वालों ने सुखमती को पकड़ लिया,

    सिपाहियों ने सुखमती के साथ सामूहिक बलात्कार किया,

    इसके बाद सुखमति और भीमा को पकड़ कर थाने में लेकर आये,

    अपना अपराध छिपाने के लिये सिपाहियों ने सुखमति और भीमा को गोली मार दी,

    पुलिस ने मीडिया में बताया कि हमने वीरता पूर्वक दो नक्सलवादियों को मार गिराया है,

    इसके बाद पुलिस ने भीमा के बड़े भाई बामन को बुला कर कहा कि सबको बताना कि तुम्हारा भाई और साली नक्सलवादी थे,

    इसके बाद सोनी सोरी ने घटनास्थल का मुआयना किया और बामन से मुलाकात करी और मामले की शिकायत अदालत मे करने की सलाह दी,

    बामन अदालत जाने के लिये घर से निकला,

    रास्ते में पुलिस ने बामन को पकड़ा,

    पुलिस वालों ने बामन को बुरी तरह पीटा,

    पुलिस वालों ने चाकू से बामन के पाँव काटने की कोशिश भी की,

    इसके बाद बामन को इसी रविवार को फर्जी नक्सली केस बना कर जेल मे डाल दिया,

    बामन अभी दन्तेवाड़ा जेल में है,

    हम अब बामन की ज़मानत की कोशिश करेंगे,

  3. Dharmesh Prem shared Himanshu Kumar’s post. 19 hrs Himanshu Kumar 19 hrs
    सुखमती 14 साल की थी,

    सुखमती की बड़ी बहन कमली की शादी उसी गांव में रहने वाले बामन से हुई थी,

    सुखमती के गांव का नाम गम्फूड़ था,

    गम्फूड़ उन तीन गांवों में से एक था जो सरकारी कंपनी एनएमडीसी की लोहा खदान प्रोजेक्ट के लिए विस्थापित हुए थे,

    इन गावों की जमीनों पर से आदिवासियों के झोपड़े हटाकर उनकी खेती खत्म करवा कर भारत सरकार ने लोहा खोदना शुरू किया था,

    और उन्हें जंगल में खदेड़ दिया गया था,

    इन आदिवासियों से वादा किया गया था कि इन तीनों गांव का ऐसा विकास होगा जो सारे देश के लिए एक मॉडल बनेगा,

    स्कूल होगा, आंगनबाड़ी होगी, सड़कें होंगी,

    यह तब की बात है जब दिल्ली में नेहरू प्रधानमंत्री थे,

    सरकार ने लोहा खोदना शुरू किया,

    रोज़ कई सारी रेल गाड़ियों में भरकर लोहा विशाखापट्टनम समुद्र किनारे तक जाता था,

    वहां से पानी के जहाजों में भरकर यह लोहा जापान भेज दिया जाता था,

    सुखमती के गांव और बाकी के 2 गांव को सरकारी कंपनी एनएमडीसी ने गोद लिया था, और इनके सर्वांगीण विकास का वादा किया था,

    सरकार वहां से लोहा खोदती रही,

    लोहा खोदने के लिए बाहर से साहब लोग आकर कंपनी में नौकरी पाते रहे,

    उनके लिए स्टाफ क्वार्टर बने, क्लब बने, सरकारी डाक बंगले बने,

    ट्रक ड्राइवरों के क्वार्टर बने,

    पूरा एक शहर बस गया,

    लेकिन सरकार इन तीनों गावों का विकास करना भूल गई,

    गांव में न कोई स्कूल खोला गया, न कोई आंगनबाड़ी, ना कोई स्वास्थ्य केन्द्र,

    गांव के लोग सब्जी और जंगल से इकट्ठा करे हुए फल ले जाकर इन साहब लोगों को बेच देते थे,

    कुछ लोग जंगल से सूखी लकड़ियां इकट्ठी करके बचेली और किरंदुल शहर में चलने वाले होटल ढाबों में बेच कर अपना घर चलाते थे,

    सरकारी कंपनी एनएमडीसी लोहा खोदने के बाद पहले धोती थी बाद में रेल गाड़ी में लादती थी,

    लोहा धोने के बाद जो लाल पानी बचता था,

    वह लाल पानी इन गावों की तरफ बहा दिया जाता था,

    लोहे के लाल पानी से गांव की नदी बर्बाद हो गई थी,

    गाय बैल नदी का पानी पीकर जल्दी मर जाते थे,

    लाल धूल फसल पर जम जाती थी इसलिये खेती करना भी मुश्किल हो गया था,

    मच्छर बहुत थे, कई लोग हर साल मलेरिया से मर जाते थे,

    विकास का मॉडल खड़ा होने की बजाय विकास के नाम पर धब्बा बन चुके थे यह तीनों गांव,

    2OO5 में सरकार ने यहां सलवा जुडूम शुरू किया,

    जिसके तहत और बड़ी-बड़ी कंपनियों को बस्तर में जमीने दी जानी थी,

    इस बार तो सरकार को आदिवासियों से विकास का कोई वादा करने की जरूरत भी नहीं पड़ी,

    सरकार ने आदिवासियों के गांव जलाने शुरू कर दिये,

    भारी तादाद में सिपाही जंगलों में भर दिए गए,

    जगह जगह पुलिस के कैंप बन गए,

    राजस्थान, हरियाणा, तमिलनाडु और नागालैंड तक के सिपाही जंगलों में झुंड बनाकर घूमने लगे,

    आदिवासी लड़कियों का घर से निकलना मुहाल हो गया,

    एक रोज 14 साल की सुखमती अपनी बहन के देवर भीमा के साथ किरंदुल बाजार गई,

    वहां से लौटते समय अपनी मां के लिए उसने ₹10 की जलेबी खरीदी थी,

    रास्ते में भीमा आगे-आगे था सुखमति पीछे-पीछे थी,

    रास्ते में सुखमति ने देखा जंगल में सिपाही फैले हुए हैं,

    सिपाहियों ने सुखमति और भीमा को पकड़ लिया,

    भीमा को पकड़ कर एक पेड़ से बांध दिया गया,

    सिपाही सुखमति के साथ छेड़खानी करने लगे,

    दो सिपाहियों ने सुखमति के कपड़े फाड़ दिए,

    सिपाहियों ने सुखमति को रौदना शुरु किया,

    सुखमती संख्या भी भूल गई कि उसे कितने सिपाहियों ने रौंदा,

    जी भर जाने के बाद सुखमती और भीमा को थाने ले जाया गया,

    सिपाहियों ने कहा अब इनका क्या करें ?

    छोडेंगे तो यह बाहर जाकर सब कुछ बता देंगे,

    साहब ने कहा गोली से उड़ा दो और वर्दी पहना दो,

    अगले दिन अखबारों में छापा गया हमारे सुरक्षाबलों ने वीरता का परिचय देता देते हुए दो खूंखार माओवादियों को ढेर कर दिया है,

    सुखमति और भीमा की लाशें उसके परिवार वालों को दे दी गई,

    भारत के विकास का जो वादा चाचा नेहरू ने किया था,

    उसके परखच्चे उड़ चुके थे,

    विकास के नाम पर सरकारी सिपाहियों द्वारा रौंदी गई 14 साल की किशोरी की लाश गांव के बीच में पड़ी थी,

    भीमा का बड़ा भाई बामन पिछले हफ्ते अदालत जाने के लिये गांव से निकला,

    रास्ते में सिपाहियों ने बामन को पकड़ कर बुरी तरह पीटा और चाकू से उसका पांव काटने की कोशिश करी,

    बामन को इसी रविवार जेल में डाल दिया गया,

    मुझे खबर मिली है गांव वालों नें सुखमति की लाश का दाह संस्कार नहीं किया है,

    गांव के आदिवासी चाहते हैं कि मीडिया वाले आयें और विकास के नाम पर उनकी बेटियों की दुर्गति देख कर जायें,

    मैनें अपने कुछ पत्रकार मित्रों को वहां जाने के लिये फोन भी किया, लेकिन ज्यादातर पत्रकारों को उनके चैनलों ने चुनाव के समाचार लाने में लगाया हुआ है,

    सुखमती की जगह अपनी बेटियों को रखकर सोचता हूँ तो दिल कांप जाता है,

    यह कौन सी जगह आ गये है हम ?

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