हरियाणा के जाट आंदोलन हिंसा में जाट समुदाय से जुड़े पुलिस अधिकारियों ने अपने पद और दफ्तर छोड़ दिए: जांच आयोग

0

18 से 23 फरवरी, 2016 के बीच रोहतक, झज्जर, सोनीपत, जींद, हिसार, कैथल और भिवानी में हुई हिंसा की घटनाओं में लोगों के मारे जाने, सड़कों, नहरों, रेलवे स्टेशनों, पुलिस थानों सहित निजी एवं सार्वजनिक संपत्तियों को पहुंचे नुकसान, पेड़ों को गैरकानूनी रूप से गिराने एवं मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित कई हिंसात्मक वारदात इस आंदोलन में हुई थी। इसमें कई लोगों की जान गई थी और करोड़ों रूपये की प्राॅपट्री को नष्ट कर दिया गया था। कथित तौर पर कहा गया था कि इस हिंसा में 30 लोग मारे गए है जबकि अनुमान इससे अधिक का था।

हरियाणा सरकार ने कमीशन ऑफ इनक्वायरी एक्ट, 1952 के अन्तर्गत जांच आयोग की नियुक्ति की थी। 22 मार्च को इस जांच कमिश्न की घोषणा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विधानसभा में घोषणा की थी। जांच आयोग की रिर्पोट आने के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं जिनमें हिंसा के दौरान कई पुलिसकर्मियों ने विद्रोह कर दिया था। उन्‍होंने ऊपर से मिले आदेशों को भी मानने से इनकार कर दिया था। इनमें से ज्यादातरर पुलिसकर्मी जाट समुदाय से थे और इनकी संख्या सैंकड़ों में थी।

Also Read:  शो बंद होने के बाद कपिल शर्मा ने पहली बार तोड़ी चुप्पी, जानिए क्या कहा?

जांच रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक‍ तथ्‍य ये सामने आए कि 19 फरवरी को हिंसा के भड़कने के बाद जाट समुदाय से जुड़े पुलिस अधिकारियों ने अपने पद और दफ्तर छोड़ दिए। रोहतक, झज्‍जर, सोनीपत और गोहाना में लगभग एक दर्जन पुलिस चैकियों और थानों को नुकसान पहुंचाया गया था। साथ ही यह भी सामने आया कि कई जगहों से पुलिसकर्मी जानबूझकर नदारद रहे। पैनल की जांच में सामने आया कि हिंसा के दिनों में पुलिसकर्मी 6-7 दिनों तक ड्यूटी से गायब रहे। इसके बाद जब हिंसा रूकी तो वे वापस ड्यूटी पर आ गए मानो वे छुट्टी पर गए हुए हों। वहीं डीजीपी वाय. के. सिंघल भी किसी प्रभावित इलाके में नहीं गए। वे केवल सीएम मनोहर लाल खट्टर के साथ रोहतक दौरे पर गए। अब देखना ये होगा कि जांच रिर्पोट आने के बाद सरकार क्या कदम लेगी।

Also Read:  धार्मिक स्थल के विवाद को लेकर भोपाल में सांप्रदायिक तनाव, स्थिति नियंत्रण में

इस जांच रिर्पोट में कहा गया है कि दंगा प्रभावित हर जिले में औसतन 60-70 पुलिसकर्मियों ने अपने पद की जिम्‍मेदारियों को छोड़ा। इस दौरान भीड़ ने कई दुकानों और घरों को जला दिया। पैनल ने इस तरह के पुलिसकर्मियों की लिस्‍ट बनाई है। इसमें उनके नाम, रैंक, बेल्‍ट नंबर, पोस्टिंग की जगह और पोस्‍ट से गायब रहने के दिनों की संख्‍या लिखी गई है। वरिष्‍ठ अधिकारियों ने बताया कि पुलिस कर्मियों के पद छोड़ जाने के कारण राज्‍य सरकार ने तुरंत पैरामिलिट्री और सेना की मदद ली। अपनी रिपोर्ट में पैनल ऐसे पुलिस‍कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का सुझाव दे सकता है। पैनल ने 26 फरवरी से जांच शुरू की थी। इसके तहत 3000 चश्‍मदीदों को बुलाया गया। उनके बयान वीडियो और लिखित दोनों रूपों में दर्ज किए गए।

Also Read:  जेटली के तंज का यशवंत सिन्हा ने दिया करारा जवाब, बोले- 'अगर मैं नौकरी मांगता तो आप यहां नहीं होते'

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी रह चुके प्रकाश सिंह ने बताया कि अभी आंदोलन जांच की रिर्पोट पर काम चल रहा है और रिपोर्ट महीने के अंत तक तैयार हो जाएगी। उन्होंने उन मीडिया रिपोर्टों को गलत बताया जिनमें दावा किया गया था कि रिपोर्ट का एक हिस्सा मीडिया के पास है। प्रकाश सिंह ने ये भी कहा कि पोस्ट छोड़ने वाले पुलिसवालों से उनकी बात हुई है लेकिन पुलिसवालों ने क्या जवाब दिया, ये उन्होंने अभी नहीं बताया हैै।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here