‘जनता का कॉन्क्लेव’ में स्वाति मालीवाल, गुरमेहर कौर और शर्मिष्ठा मुखर्जी ने महिलाओं की सुरक्षा पर जानिए क्या कहा?

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शुक्रवार(27 अक्टूबर) को कोलकाता में ‘जनता का रिपोर्टर’ द्वारा आयोजित ‘जनता का कॉन्क्लेव इन सोशल जस्टिस’ में मौजूद सैकड़ों लोगों के बीच दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल, दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा गुरमेहर कौर और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी व कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने महिलाओं के मुद्दे पर खुलकर अपने विचार रखें। 

शर्मिष्ठा मुखर्जी:-

‘हमारे बचपन के दौरान दिल्ली बहुत सुरक्षित थी, लेकिन पिछले 20 वर्षों में दिल्ली की स्थिति खतरनाक रूप से बिगड़ गई है। जिसका एक कारण है कि, रियल स्टेट का कारोबार जो दिल्ली में बहुत तेजी से बढ़ा है और लोगों के पास पैसा ज्यादा आ गया है। लेकिन, हमारी असली चुनौती युवा ऊर्जा को स्थानांतरित करना है, अगर हम युवाओं की ऊर्जा ठीक से नहीं चला सकते, तो वे विनाशकारी हो सकते हैं।

यह (बलात्कार की बढ़ती संख्या) सिर्फ एक राजनीतिक समस्या नहीं है यह एक सामाजिक समस्या है। बंगाल में चीजें थोड़ा अलग हैं यहां हम माताओं की पूजा करते हैं दुर्गा पूजा हमारी संस्कृति का एक हिस्सा है। पूरे पूर्वी और उत्तर-पूर्व भारत में महिलाओं को उत्तर भारत में बेहतर सम्मान दिया जाता है।’

गुरमेहर कौर:-

‘सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुझे एहसास हुआ कि मुझे मीडिया चक्र को तोड़ना चाहिए। मुझे एहसास हुआ कि वे किसी भी चीज़ से एक कहानी बनाने जा रहे थे। मुझे सिर्फ उन्हें कुछ देना बंद करना पड़ा मैं बहुत घबरा गई थी, इसलिए मैं डर गई थी। लेकिन उस दौरान मुझे एहसास हुआ कि घबराना ठीक नहीं था। मैं कांप रही थी मैं अपने बिस्तर से बाहर नहीं निकल सकती थी, उस रात मैं सो नहीं पाई थी।’

मुझे याद है कि जब मेरे पास पहली कॉल आई थी तो वो स्वाति मालीवाल मैम की थी। पहली बार मुझे लगा कि यह ठीक होने जा रहा था, बस उनके कारण मुझे दिल्ली में सुरक्षित महसूस हुआ। सिर्फ इसलिए मैं वापस आ गया थी। उनकी टीम ने मुझे, मेरी मां, मेरी चाची को विश्वास दिलाया। मुझे लगता है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि जब आप महिलाओं के लिए सामाजिक न्याय के बारे में बात कर रहे हैं, उस वक्त महत्वपूर्ण पद वाले लोग आपको सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।’

स्वाति मालीवाल:-

‘जब मुझे दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था तब मैं मुख्यमंत्री (अरविंद केजरीवाल) की सलाहकार थी। मुझे ऐसा लगा कि, मुझे ऐसे जगह पर क्यों पोस्ट किया जा रहा है जहां पर रिटायर्ड अधिकारी बैठते है और कुछ काम नहीं करते है। लेकिन मैंने जब इस अधिनियम को पढ़ा तो पता चला कि दिल्ली महिला आयोग सहित जो भी महिलाओं के लिए राष्ट्रीय आयोग हैं, वे सभी एक अधिनियम के तहत बनाई गई हैं, जो बहुत शक्तिशाली है।’

‘मैं पुलिस कमिश्नर और किसी अन्य अधिकारी को समन भेज सकती हूं। अगर मैं चाहती हूं, तो मैं किसी भी मुद्दे पर सरकार से सिफारिश करवा सकता हूं और यदि हमारे निर्देशों पर ध्यान नहीं दिया जाता है, तो मैं गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर सकती हूं।’

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