‘गांधीवादी विचार और दर्शन’ पर जामिया और अमेरिका की कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी ने मिलकर वेबिनार का आयोजन किया

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, सैक्रामेंटो, अमेरिका के साथ मिलकर ’गांधीवादी विचार और दर्शन’ पर आज एक वेबिनार का आयोजन किया। महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के मौके पर, गांधीवादी विचारों और दर्शन को विश्व भर के बुद्धिजीवियों के बीच प्रचारित प्रसारित करने के लिए, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की प्रस्तावित योजना के तहत यह वेबिनार श्रृंखला चलाई जा रही है। यह इस तरह की तीसरी श्रृंखला है। इससे पहले जामिया ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, यूके और एसएनयू, दक्षिण कोरिया के साथ इसी विषय पर एक-एक वेबिनार आयोजित किए थे।

जामियाकैलिफ़ोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, सैक्रामेंटो, यूएसए के अध्यक्ष श्री रॉबर्ट एस नेल्सन इसके मुख्य अतिथि थे और इसी विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग के प्रो अजय एस सिंह मुख्य वक्ता थे। उन्होंने ‘गांधी एंड द यूएस एनवायरनमेंटल मूवमेंट’ पर बहुत ही गहराई भरा व्याख्यान दिया। जामिया की कुलपति प्रो नजमा अख्तर ने वेबिनार सत्र की अध्यक्षता की और मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता और अन्य गणमान्य लोगों का औपचारिक स्वागत किया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि यह वेबिनार सहयोगात्मक साझेदारी का नतीजा है।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण पर गांधीजी के विचार राजनीति, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और विकास से संबंधित उनके विचारों के साथ पूरी तरह जुड़े हुए हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि “पारिस्थितिकी“ और “पर्यावरणवाद“ की अवधारणाएं गांधी जी के लेखन और भाषणों में कभी नहीं आईं फिर भी उन्हें गहन पारिस्थितिक संवेदनशीलता वाले एक विचारक के रूप में देखा जाता है और उनकी सोच ने भारत और विदेशों में पारिस्थितिक आंदोलनों पर गहरा और दूरगामी असर डाला है।

प्रो अजय एस सिंह ने बताया कि पर्यावरण संबंधी आंदोलनों के बाद अमेरिका में खपत पैटर्न में कमी आई है। उनके अनुसार, गांधीजी ने पर्यावरण चिंतन का एक खाका पेश किया है। प्रो.अजय सिंह और प्रो नजमा अख्तर के संबोधन और के व्याख्यान में ’गैर-दोहरापन’, ’गहन पारिस्थितिकी’ और ’सादगी भरे जीवन’ के विचार सामान्य बिंदु थे।

प्रो रॉबर्ट नेल्सन ने जामिया और कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी के बीच सहयोगी डिग्री कार्यक्रम की जानकारी देने के साथ ही यह भी बताया कि कोरोना वायरस महामारी से पैदा अड़चनों के बावजूद भी दोनों विश्वविद्यालय, इस कार्यक्रम के तहत एक दूसरे के यहां कक्षाएं जारी किए हुए हैं।

जामिया के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर और ओएसडी (योजना एवं विकास) प्रो मुकेश रंजन ने वेबिनार का समन्वय किया और स्पीकर और अन्य पैनलिस्टों का परिचय कराया।

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