लोगों द्वारा तिरंगा लेकर हत्यारों का समर्थन करना दर्दनाक था: कठुआ गैंगरेप-हत्या को सामने लाने वाली महिला अधिकारी

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जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में एक नाबालिग मासूम बच्ची के साथ हुए गैंगरेप और हत्या के केस ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। साथ ही साथ हर आदमी, सेलेब्रिटी और बच्चियां भी आरोपियों को कठोर सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं। कठुआ के हीरानगर तहसील के रसाना गांव में इसी साल की शुरूआत में जनवरी महीने में आठ साल की बच्ची आसिफा का अपहरण कर उसके साथ एक मंदिर में सामूहिक दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी जघन्य तरीके से हत्या कर दी गई।

कठुआ केस की जांच अधिकारी डीएसपी श्वेतांबरी शर्मा ने बताया कि इस केस को सॉल्व करने के लिए उनके सामने कई कठिनाइयां आईं, कई बार उन्हें परेशान किया गया और स्थानीय लोगों ने केस छोड़ने के लिए मजबूर भी किया। साथ ही उन्होंने बच्ची के साथ रेप करने वाले बलात्कारियों के गिरफ्तारी का विरोध करने वाले हिंदुत्व समर्थकों को लेकर भी उन्होंने खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि तिरंग लेकर हत्यारों का समर्थन करना दर्दनाक था।

जांच अधिकारी श्वेतांबरी शर्मा से न्यूज18 इंडिया से बातचीत में  बताया कि ‘मासूम’ के दोषियों को सजा जरूर मिलेगी। बच्ची को इंसाफ जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि केस बहुत कठिन था। हमने 72 दिन-रात काम किया है। कठुआ केस का रिजल्ट सही आएगा। शर्मा ने कहा कि इस दौरान काफी कठिनाइयां रहीं। कठिनाइयां ऐसी भी थीं जब लोग तिरंगा लेकर हत्यारों का समर्थन कर रहे थे। यह बहुत ही दर्दनाक था। साथ ही उन्होंने बताया कि स्थानीय लोग गवाहों को परेशान करते थे।

श्वेतांबरी ने बताया कि बहुत ही शर्मसार है कि आज के आधुनिक युग में भारत में जब इस तरह की बात हो तो शर्म से सिर झुक जाता है। उन्होंने कहा कि एक कन्या को इंसाफ दिलाने के लिए जब एक एक पढ़ी-लिखी लड़की कोशिश करती है तो उसकी काबिलियत का तिरस्कार किया जाता है। उस वक्त दुख तो होता है लेकिन हमारे हौसले बुलंद हैं। शर्मा ने कहा कि जो भी होगा न्याय के दायरे में होगा और बच्ची को इंसाफ जरूर मिलेगा।

शर्मा ने कहा कि इस दौरान हालात बहुत खराब भी हुए। ऐसे माहौल भी थे जब तिरंगा लहराया जाता था और अपने राज्य की पुलिस पर शक किया जाता था। उन्होंने कहा कि हम उस वक्त थोड़ा मायूस भी हुए जब पता चला कि इस कांड में कुछ पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। लेकिन फिर भी हमारी टीम ने सच को सामने लाने की भरपूर कोशिश की। इस दौरान शर्मा ने बताया कि उन्होंने 2012 में पुलिस ज्वाइन की थी।

बलात्कारियों के समर्थन में धार्मिक रंग देते हुए तिरंगा यात्रा निकाले जाने को लेकर श्वेतांबरी शर्मा ने कहा कि बेटियां जो होती हैं वह किसी धर्म या जाति की नहीं होती हैं। वह हिंदू थी या मुस्लिम इससे पहले हम देखें कि वह एक इंसान थी। इंसान के बाद ही हम हिंदू या मुस्लिम बनेंगे। उन्होंने कहा कि यहां पर हमें यह देखना है कि इंसानियत का कत्ल होता है। इंसानियत को मारा गया है।

कठुआ गैंगरेप पर दुनिया में शर्मसार हुआ भारत

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के कठुआ बलात्कार और हत्या की आलोचना अब देश में ही नहीं बल्कि देश से बाहर भी हो रही है। इस मामले ने देश को शर्मसार कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने आठ साल की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या को ‘भयावह’ बताते हुए दोषियों को कानून के दायरे में लाए जाने की उम्मीद जाहिर की। गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बताया कि उन्होंने घुमंतू बकरवाल समुदाय की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म की खबरें देखी हैं।

उन्होंने कहा कि, ‘हम आशा है कि प्रशासन इस जघन्य अपराध के लिए जिम्मेदार दोषियों को कानून के दायरे में लाएगा।’ वहीं भारी दबाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इस घटना की निंदा करते हुए कहा था कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले में हेड कांस्टेबल, एक सब-इंस्पेक्टर, दो विशेष पुलिस अधिकारी सहित आठ लोग गिरफ्तार किए गए और उनमें से सात के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया गया है।

आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने आठ साल की लड़की को जनवरी में एक सप्ताह तक कठुआ जिले के एक गांव के मंदिर में बंधक बनाकर रखा गया था और उसे नशीला पदार्थ देकर उसके साथ बार बार बलात्कार किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई थी। आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है जिसके खिलाफ एक पृथक आरोपपत्र दायर किया गया है।

 

 

 

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