अंतरिक्ष में इसरो की एक और उपलब्धि, प्राइवेट सेक्टर की मदद से तैयार हुआ पहला सैटेलाइट IRNSS-1H लॉन्च

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) अंतरिक्ष की दुनिया में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इसरो ने गुरुवार(31 अगस्त) शाम करीब सात बजे भारत के आठवे नेविगेशन सैटेलाइट आईआरएनएसएस-1एच को लॉन्च कर एक नया इतिहास रच दिया है। इससे पहले इसरो ने सात उपग्रहों को लॉन्च कर चुका है। खास बात ये है कि इसरो ने पहली बार ऐसे सैटेलाइट को लॉन्च किया है, जिसे पूरी तरह से देश के निजी क्षेत्र की कंपनियों ने मिलकर तैयार किया है।

ANI

इसका प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्पेस पोर्ट के दूसरे लॉन्च पैड से किया गया है। बेंगलुरु की अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजी ने ‘नाविक’ श्रृंखला का एक उपग्रह बनाया है। जिससे देशी जीपीएस की क्षमता बढ़ेगी। इसरो ने छह छोटे और मध्यम उद्योगों के एक समूह के साथ मिलकर इस उपग्रह का निर्माण और परीक्षण किया है।

तारामंडल में मौजूद सात उपग्रहों में से एक आईआरएनएसएस-1ए के लिए आईआरएनएसएस-1एच की भूमिका एक बैकअप नौवहन की होगी, क्योंकि इसकी तीन रीबिडियम परमाणु घड़ियों ने काम करना बंद कर दिया है। इंडियन रीजनल नेवीगेशन सैटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) एक स्वतंत्र क्षेत्रीय प्रणाली है, जिसका विकास भारत ने अमेरिका के जीपीएस, रूस के ग्लोनास तथा यूरोप द्वारा विकसित गैलिलियो के मुताबिक किया है।

यह प्रणाली भूभागीय एवं समुद्री नौवहन, आपदा प्रबंधन, वाहनों पर नजर रखने, बेड़ा प्रबंधन, हाइकरों तथा घुमंतुओं के लिए नौवहन सहायता और चालकों के लिए दृश्य एवं श्रव्य नौवहन जैसी सेवाओं की पेशकश करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका नाम ‘‘नाविक’’ (एनएवीआईसी…नेवीगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) रखा था।

इसरो ने सात उपग्रहों को कर चुका है लॉन्च

  • आईआरएनएसएस-1जी का प्रक्षेपण 28 अप्रैल 2016 को किया गया।
  • आईआरएनएसएस-1एफ का प्रक्षेपण 10 मार्च 2016 को किया गया।
  • आईआरएनएसएस-1ई का प्रक्षेपण 20 जनवरी 2016 को किया गया।
  • आईआरएनएसएस-1डी का प्रक्षेपण 28 मार्च 2015 को किया गया।
  • आईआरएनएसएस-1सी का प्रक्षेपण 16 अक्तूबर 2014 को किया गया।
  • आईआरएनएसएस-1बी का प्रक्षेपण चार अप्रैल 2014 को किया गया।
  • आईआरएनएसएस-1ए का प्रक्षेपण एक जुलाई 2013 को किया गया था।

 

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