इंटरनेशनल गोल्ड मेडलिस्ट योगा टीचर मजदूरी करने पर हुई मजबूर, जानिए क्यों?

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अक्सर हमारे देश में लापरवाह अधिकारियों की वजह से हमारे बहादुर खिलाड़ियों और इंटरनेशनल गोल्ड मेडलिस्ट जैसे लोगों को देश में परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिससे हमारे खिलाड़ियों के देश के बाहर भी शर्मसार होना पड़ रहा है। इतना ही नहीं इस बार तो उस वक्त और हद हो गई जब कोई शख्स अपने जीवन में योग को फैलाने का बीड़ा उठाते हैं और उन्हें रोजी रोटी के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।

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फोटो- जनसत्ता (दामिनी की मजदूरी करती हुई तस्वीर)

ऐसा ही कुछ हुआ है छत्तीसगढ़ की रहने वाली योग की दीवानी दामिनी साहू के साथ जो अब अपने माता-पिता के साथ मजदूरी करने के लिए मजबूर है। जनसत्ता कि ख़बर के मुताबिक, योग की दीवानी दामिनी ने हाल में ही काठमांडु में हुए दक्षिण एशिया योग स्पोर्ट्स चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है। लेकिन निजी जिंदगी में दामिनी को खेल में शिरकत तक करने के लिए कर्ज लेना पड़ा है, जिसे चुकाने के लिए अब वो अपने माता-पिता के साथ मजदूरी करती हैं।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दक्षिण एशिया योग स्पोर्ट्स चैम्पियनशिप में शिरकत करने के लिए दामिनी को नेपाल जाना था लेकिन उसके पास पैसे नहीं थे, दामिनी ने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास मंत्री अजय चन्द्राकर को पत्र लिखकर मदद मांगी, लेकिन उसे कोई सहायता नहीं मिली। लेकिन फिर भी दामिनी को नेपाल भेजने के लिए उनके माता पिता ने किसी से ब्याज पर 10 हजार रुपये कर्ज लिये और जिसके बाद वह नेपाल जा सकी।

लेकिन नेपाल से लौटने के बाद दामिनी को यह पता भी नहीं था कि उसे वहां पर वापस जाकर यह सब करना पड़गे।दामिनी को इस कर्ज को चुकाने के लिए अपने माता-पिता के साथ मजदूरी करनी पड़ रही है। जब मजदूरी करती हुई उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो छत्तीसगढ़ राज्य योग एसोसिएशन के चेयरमैन ने उनसे संपर्क किया और उन्हें राज्य का योग अंबेसेडर बनाने का वादा किया है।

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वहीं, दामिनी का कहना है कि, 8 से 10 घंटे तक मजदूरी करने के बाद वो 100 से 150 रुपये तक कमा पाती हैं। दामिनी के पिता का दाहिना हाथ काम नहीं करता है और वो बैलून बेचकर मुश्किल से 100-50 रुपये कमा पाते हैं। लेकिन तमाम मुश्किल के बाद भी दामिनी अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए है, फिलहाल वो बी कॉम फर्स्ट इयर की छात्रा है। 9 सालों से योग कर रही दामिनी का एक कामयाब योग शिक्षक बनने का सपना है और इसलिए वो तमाम संघर्षों के बावजूद अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ा रही है।

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बता दें कि, इससे पहले अभी हाल ही में ख़बर आई थी की भारत की ओर से कंचनमाला को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में वर्ल्ड पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप भाग लेने के लिए भेजा गया था, लेकिन खेल प्राधिकरण गलतियों की वजह से कंचनमाला को शर्मसार होना पड़ा। अधिकारियों की लापरवाही की वजह से सरकार द्वारा भेजी गई सहायता राशि उन तक पहुंच ही नहीं पाई जिस कारण मशहूर पैरा एथलीट कंचनमाला पांडे को जर्मनी में भीख मांगनी पड़ी।

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