एक बार में ‘तीन तलाक’ देने पर 3 साल की हो सकती है जेल, सरकार ने तैयार किया नए कानून का मसौदा

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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने एक बार में तीन तलाक पर रोक लगाने के लिए मसौदा बिल तैयार कर लिया है, जिसके तहत तीन तलाक देना अवैध व अमान्य होगा। साथ ही ऐसा करने पर शौहर (पति) को तीन साल की जेल और जुर्माना भी हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद हो रहे तीन तलाक को रोकने के लिए सरकार कानून बनाने जा रही है।Triple talaqन्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक मसौदा ‘मुस्लिम विमिन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरेज बिल’ को शुक्रवार (1 दिसंबर) को राज्य सरकारों के पास भेजा गया है, जिससे इस पर उनके विचार भी लिए जा सकें। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी है। संसद के शीतकालीन सत्र में तीन तलाक पर कानून लाया जा सकता है।

अधिकारी ने एजेंसी को बताया कि राज्यों से तत्काल इस मसौदे पर जवाब देने को कहा गया है। इस मसौदे को गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गठित मंत्रियों के समूह ने तैयार किया है। समूह के अन्य सदस्यों में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद और मंत्रालय में उनके जूनियर पी. पी. चौधरी शामिल हैं। यह प्रस्तावित कानून केवल एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के मामलों पर ही लागू होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक कानून बनने से पीड़ितों को अधिकार मिल जाएगा, जिससे वे मैजिस्ट्रेट के पास जाकर अपने और बच्चों के लिए गुजारा भत्ते की मांग कर सकें। इतना ही नहीं, महिला मैजिस्ट्रेट से अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी लेने की भी मांग कर सकती है। कानून के मसौदे के तहत ट्रिपल तलाक किसी भी रूप में- बोलकर, लिखित या ईमेल, SMS और वॉट्सऐप से अवैध और अमान्य होगा।

सरकारी अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि, ‘गुजारा भत्ता और कस्टडी का प्रावधान यह सुनिश्चित करने के लिए रखा गया है कि अगर पति पत्नी को घर से निकलने को कहता है तो पीड़ित महिला के पास कानूनी सुरक्षा होनी चाहिए।’ कानून के मसौदे के अनुसार, यह जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होगा। कानून लागू होने के बाद अगर पति ने एक बार में तीन तलाक दिया तो उसे जुर्माने के साथ तीन साल जेल की हवा खानी पड़ सकती है। महत्वपूर्ण है कि यह गैर-जमानती अपराध होगा।

अधिकारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार को उम्मीद थी कि यह प्रथा खत्म हो जाएगी लेकिन यह अब भी जारी है। इस साल फैसले से पहले एक बार में तीन तलाक देने के 177 मामले दर्ज हुए जबकि फैसले के बाद 66 केस सामने आए। इसमें उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा केस सामने आए हैं। इसके बाद ही सरकार ने कानून बनाने का फैसला लिया।

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Posted by जनता का रिपोर्टर on Friday, 1 December 2017

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को बताया था असंवैधानिक

बता दें कि 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तीन-दो के बहुमत से ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन तलाक को खत्म करते हुए असंवैधानिक करार दिया था। साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से इस संबंध में छह महीने के अंदर कानून बनाने को कहा था। तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश जस्टिस जगदीश सिंह खेहर और जस्टिस नजीर ने अल्पमत में दिए फैसले में कहा था कि तीन तलाक धार्मिक प्रथा का हिस्सा है, इसलिए कोर्ट इसमें दखल नहीं देगा।

हालांकि दोनों जजों ने माना कि यह पाप है, इसलिए सरकार को इसमें दखल देना चाहिए और तलाक के लिए कानून बनना चाहिए। दोनों ने कहा था कि तीन तलाक पर छह महीने का रोक लगाया जाना चाहिए, इस बीच में सरकार कानून बना ले और अगर छह महीने में कानून नहीं बनता है तो रोक जारी रहेगा। साथ ही खेहर ने यह भी कहा था कि सभी पार्टियों को राजनीति को अलग रखकर इस मामले पर फैसला लेना चाहिए।

जबकि न्यायमूर्ति जोसेफ, न्यायमूर्ति नरीमन और न्यायमूर्ति उदय यू ललित ने इस मुद्दे पर प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति नजीर से स्पष्ट रूप से असहमति व्यक्त की थी कि क्या तीन तलाक इस्लाम का मूलभूत आधार है। बता दें कि पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने छह दिनों की मैराथन सुनवाई के बाद 18 मई को इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। पीठ ने ग्रीष्मावकाश के दौरान 11 से 18 मई तक सुनवाई की थी।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित इस संविधान पीठ में विभिन्न धार्मिक समुदायों से ताल्लुक रखने वाले न्यायाधीश शामिल थे। जस्टिस अब्दुल नजीर (मुस्लिम) के अलावा जस्टिस कुरियन जोसेफ (ईसाई), आरएफ नरीमन (पारसी), यूयू ललित (हिंदू), और इस बेंच की अध्यक्षता कर रहे सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायधीश जेएस खेहर (सिख) शामिल थे।

 

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