एटीएस ने आईएसआई के संदिग्ध एजेंट को किया गिरफ्तार, रमेश पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग में करता था रसोइये का काम

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उत्तर प्रदेश के आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने मिलिट्री इंटेलीजेन्स की जम्मू कश्मीर यूनिट और उत्तराखंड पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से बुधवार (23 मई) को संदिग्ध पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विस इंटेलीजेंस (आईएसआई) एजेंट रमेश सिंह कन्याल को गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक रमेश भारतीय उच्चायोग में नियुक्त एक अधिकारी के साथ घरेलू कार्य के लिए वर्ष 2015 में इस्लामाबाद गया था। रमेश अधिकारी के यहां खाना बनाने का काम करता था। वहां उसका संपर्क आईएसआई के लोगों से हुआ।

PHOTO: NDTV

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक एटीएस के अधिकारी ने बताया कि मिलिट्री इंटेलिजेंस के सहयोग से आफताब निवासी फैज़ाबाद को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उससे हुई पूछताछ और विवेचना से कुछ और आईएसआई एजेन्ट रडार पर आए। उन्होंने बताया कि इस सम्बन्ध में 20 मई को एटीएस थाना गोमतीनगर में मामला दर्ज किया गया। विवेचना के क्रम में 22 मई को पिथौरागढ़ निवासी रमेश सिंह से पूछताछ की गयी और उसके घर की तलाशी ली गई।

रिपोर्ट के मुताबिक रमेश ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए अपने राष्ट्रविरोधी कृत्यों के बारे में काफी कुछ बताया जिस पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारी ने कहा कि रमेश के पास से एक पाकिस्तानी मोबाइल फ़ोन भी बरामद किया गया है जो उसे आईएसआई से संपर्क करने के लिए दिया गया था। मोबाइल के डाटा से महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि रमेश से पूछताछ जारी है। कल अभियुक्त को पिथौरागढ़ की अदालत में पेश किया गया तथा वहां से उसे ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया जा रहा है। अधिकारी ने बताया कि रमेश सिंह पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग में नियुक्त एक अधिकारी के साथ घरेलू कार्य के लिए 2015 में इस्लामाबाद गया था। वहां उसका संपर्क आईएसआई के लोगों से हुआ जिन्होंने उसे अपना एजेन्ट बना लिया।

रमेश ने वहां रहते हुए तमाम सूचनाएं लीक कीं जिसके लिए उसे डॉलर में धन मिलता था। जब वह छुट्टी में भारत आता था तो डॉलर साथ लाता था और दिल्ली में रूपये में परिवर्तित कर अपने गाँव ले जाता था। उन्होंने बताया कि सितम्बर 2017 में रमेश वापस भारत आ गया। उसे पाकिस्तानी आईएसआई अधिकारियों द्वारा भारत में जासूसी करने के लिए कहा गया और क्यू.मोबाइल ब्रांड का एक फ़ोन दिया गया जिसमें शक है कि स्पाईवेयर हो सकता है। इसका फोरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) आनंद कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि रमेश से उत्तर प्रदेश के कुछ सैन्य प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाने को कहा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक पिथौरागढ़ के डीडीहाट तहसील के गराली गांव निवासी रमेश सिंह वर्ष 2015 में पाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास के उच्चायुक्त कार्यालय में रहा था। वह एक भारतीय अधिकारी के साथ रसोइया बनकर वहां गया था।

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