UNHRC में बोला भारत- ‘हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं, जिसका कोई राजकीय धर्म नहीं’

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 27 वें सत्र में भारत ने गुरुवार(4 मई) को कहा है कि यह एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जिसका कोई राजकीय धर्म नहीं है और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की हिफाजत इसकी राजनीतिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण तत्व है। दरअसल, पाकिस्तान ने अल्संख्यकों से बर्ताव को लेकर भारत की आलोचना की है।परिषद के 27वें सत्र में अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि भारतीय संविधान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए विभिन्न प्रावधान हैं। परिषद में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे रोहतगी ने कहा कि भारत नागरिकों के जाति, नस्ल, रंग या धर्म में कोई भेदभाव नहीं करता।

उन्होंने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जिसका कोई राजकीय धर्म नहीं है।’ उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान हर व्यक्ति को धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है और स्वतंत्र अभिव्यक्ति का अधिकार भारतीय संविधान का प्रमुख हिस्सा है। रोहतगी ने सदस्य देशों से कहा कि विश्व के सबसे बड़े बहुस्तरीय लोकतंत्र के नाते हम स्वतंत्र अभिव्यक्ति को महत्व देते हैं। हमारे लोग अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता को लेकर सचेत हैं और हर अवसर में अपनी पसंद का इस्तेमाल करते हैं।

पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने कश्मीर मुद्दे को उठाया और भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। उसने भारत से परिषद की एक टीम को कश्मीर का दौरा करने देने और हालात की समीक्षा की इजाजत देने को भी कहा है। परिषद में ‘अल्पसंख्यकों और दलितों पर होने वाली हिंसा’ के मुद्दे को भी उठाया गया।

इस पर रोहतगी ने कहा कि हम शांति, अहिंसा और मानव की गरिमा कायम रखने में यकीन रखते हैं। हमारी संस्कृति में प्रताड़ना पूरी तरह से अपरिचित चीज है और राष्ट्र के शासन में इसका कोई स्थान नहीं है। वहीं, आर्म्ड फोर्स ऐक्ट (AFSPA) पर उन्होंने कहा कि यह अधिनियम सिर्फ अशांत इलाकों में लागू होता है और इन इलाकों की संख्या बहुत कम है और कुछ अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास हैं।

ट्रांसजेंडर्स के मुद्दे पर रोहतगी ने कहा कि भारत उनके समान अधिकारों को मान्यता देने में आगे रहा है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए सरकार को निर्देश दिया कि इसे ‘थर्ड जेंडर’ घोषित किया जाए और उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत ने ‘स्वच्छ भारत अभियान’ राष्ट्र स्तर पर शुरू किया है।

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र ने 2008 से ये परंपरा शुरू की थी, जिसके तहत हर चार वर्ष में सदस्य देश मानवाधिकार मामलों पर एक दूसरे से जवाब मांगते हैं। मोदी सरकार के लिए ये पहला और भारत के लिए ये तीसरा मौका है जब मानवाधिकार मामलों पर अपने ट्रैक रिकॉर्ड पर जवाब देना पड़ा। इन रिपोर्टों के आ जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र सदस्य एक-दूसरे को ‘सुधार की गुंजाइश’ पर सुझाव देते हैं। 2008 और 2012 में भी भारत को सुझाव मिल चुके हैं।

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