अकेले लडाकू विमान उड़ाकर अवनी चतुर्वेदी ने रचा इतिहास, मिग-21 उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

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फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी लडाकू विमान उडाने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। भारतीय वायु सेना की फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी ने अकेले मिग-21 फाइटर प्लेन उड़ाकर इतिहास रच दिया है। 19 फरवरी को सुबह अवनी ने गुजरात के जामनगर एयरबेस से उड़ान भरी और सफलतापूर्वक अपना मिशन पूरा किया। वह अकेले फाइटर एयरकाफ्ट उड़ाने वाली भारत की पहली महिला बन गई हैं।

(Source: IAF)

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, वायुसेना के एक अधिकारी ने कहा कि,‘‘ चतुर्वेदी लडाकू विमान को अकेले उडाने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। उन्होंने मिग- 21 बाइसन को अकेले उडाया। इस तरह की यह उनकी पहली उडान थी।’’

उन्होंने बताया कि यह विमान उन्होंने सोमवार (19 फरवरी) को जामनगर वायुसेना स्टेशन से उडाया। लडाकू विमान उडाने के लिए तीन महिला पायलटों अवनी चतुव्रेदी, भावना कांत और मोहना सिंह को कडा प्रशिक्षण दिया गया है।
उन्हें जुलाई 2016 में फ्लाइंग ऑफिसर के तौर पर शामिल किया गया था।

अवनि चतुर्वेदी मूलरूप से मध्य प्रदेश के रीवा जिले से है। अवनी के साथ मोहना सिंह और भावना कंठ के साथ पहली बार लड़ाकू पायलट घोषित किया गया था। इन तीनों को जून, 2016 में भारतीय वायु सेना के लड़ाकू स्क्वाड्रन में शामिल किया गया। उन्हें औपचारिक रूप से तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर द्वारा कमीशन में शामिल किया गया था।

न्यूज 18 के मुताबिक, अवनी के पिता एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हैं और इनके भाई भी आर्मी में कैप्टन हैं और उनकी माता एक गृहिणी हैं। वहीं, चाचा सहित परिवार के कई सदस्य आर्मी के जरिए देशसेवा में जुटे हैं। इंडियन एयरफोर्स में शामिल होने के बाद अवनी ने बताया था कि इस वजह से उसने आर्मी की लाइफ को करीब से देखा है और उसे यह लाइफ पसंद है।

अवनी ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा था। हर कोई बचपन में आसमां की तरफ देखता है और चाहता है कि पंछी कि तरह उड़े। अब एयरफोर्स में उन्हें मिलिट्री लाइफ के साथ उड़ने का मौका भी मिल रहा हैं। 22 वर्षीय अवनी ने अपनी ट्रेनिग हैदराबाद की वायु सेना अकादमी से पूरी की थी।

बिना किसी बताए किया एयरफोर्स में आवेदन

अवनी की मां सविता ने एयरफोर्स में बेटी के चयन के बाद न्यूज18 से बातचीत में कहा था कि उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि अवनी ने एयरफोर्स के लिए आवेदन दिया हैं। उसका चयन होने पर ही परिजनों को इस बारे में जानकारी मिली थीं। बेटी की इस कामयाबी के पीछे मां अपने बेटे और अवनी के भाई को प्रेरणा बताती है। अवनी की तरह उनके भाई ने भी आर्मी के जरिए खुद को देशसेवा के लिए समर्पित कर दिया है।

अवनी ने कल्पना चावला को अपनी प्रेरणा स्त्रोत मानते हुए अपने जीवन को आगे बढ़ाया। पिता बताते हैं कि उनकी बेटी बचपन से ही मेधावी थी और वह अच्छी पुस्तकें पढ़ती रहती थीं। राजस्थान के वनस्थली में बीटेक करने के दौरान ही अवनी ने एयरफोर्स का फार्म भरा था। वहीं उसका चयन आईबीएम में भी हो गया था। लेकिन कुछ दिन सर्विस करने के बाद वहां से काम छोड़कर एयरफोर्स ज्वाइन कर लिया।

 

 

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