IIT का एक और दलित छात्र था आत्महत्या के कगार पर

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हैदराबाद के दलित स्काॅलर रोहित वेमुला की मौत के बाद देश में अन्याय और जातिवाद के बारे में एक नयी बहस छिड़ चुकी है। कोई रोहित वेमुला आत्महत्या के बाद प्रकाश में आता है कि वो हमारी किन सामाजिक विडम्बनाओं के बीच जी रहा था लेकिन उस जैसे और दूसरे कितने ही रोहित को क्या आत्महत्या के बाद ही अपनी बात और परेशानी को सरकार के समक्ष रख सकने का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
ताजा घटनाक्रम एक और दलित इंजिनियर छात्र महेश बाल्मीकि से जुड़ा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, महेश ने बताया कि उसके ऊपर बहुत दबाव है. उसने बताया, ‘मैंने बैंक से 2.7 लाख रुपए एजुकेशन लोन लिया, लेकिन मेरी लम्बी बीमारी की वजह से काफी पैसा इलाज में खर्च हो गया। इस वजह से कर्ज नहीं चुका पाया।’
सके बाद महेश ने पैसों के इंतजाम के लिए अलग-अलग विकल्पों की तलाश में जुट गया। इतना ही नहीं, महेश ने अपनी एक किडनी बेचने के लिए खरीददार की तलाश शुरू की। बाद में दोस्तों से पता चला कि किडनी के काले बाजार में सबसे पहले व्यक्ति की जात पूछी जाती है।
महेश ने कहा, ‘मैंने वाराणसी और अलवर में पांच अस्‍पतालों से संपर्क किया, लेकिन सभी ने यह कहकर मना कर दिया कि वह एक दलित है। थक हार कर मुझे अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। अब मैं अपने गृह जनपद राजस्थान के अलवर में महज 4000 रूपए की सफाईकर्मी की नौकरी कर रहा हूं.’
इस बात को जब महेश के दोस्तों ने मैग्‍सेसे अवाॅर्ड विनर प्रो. संदीप पाण्डेय के सामने रखी तो पाण्डेय ने अपने कालेज के पुराने दोस्तों के साथ मिलकर महेश द्वारा लिये गए लोन की अदायगी कर दी।
दिलचस्‍प बात यह है कि 10वीं की परीक्षा में महेश 85 फीसदी अंक के साथ पास हुआ था, जबकि 12वीं में पार्ट टाइम सफाईकर्मी का काम करने के बाद भी उसने 70 फीसदी अंक मिले. इसके बाद उसने आईआईटी एंट्रेंस क्‍वालीफाई कर बीएचयू में एडमिशन लिया।
लेकिन अभी भी महेश क्लास ज्वाइन नहीं कर पा रहा है, क्योंकि उसके पिता लकवाग्रस्त हैं और मां घरों में काम करती है.19 साल के महेश को उसके टीचर्स ब्राइट स्टूडेंट मानते हैं. हताश और निराश महेश अपने दोस्तों से अक्सर सुसाइड करने की बात भी करता था।
आत्महत्या के भंवर से बाहर आकर महेश अपनी पढ़ाई को बीच में ही छोड़कर फिलहान अपने गृह जनपद अलवर में 4000 की सफाईकर्मी की नौकरी कर रहा है। 

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