पडोसी की एक बेइज़्ज़ती ने वाराणसी के रिक्शा चालक के बच्चे को IAS अफसर बना दिया

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जो तस्वीर आप देख रहे है वो सोशल मीडिया की एक बेहद वायरल तस्वीर हैं, जिसे आपने बार-बार अपनी फेसबुक वाल, व्हासऐप, टिवट्र या मीडियम पर जरूर देखा होगा। इस तस्वीर में बताया गया है कि एक गरीब रिक्शें वाले ने किस तरह से पढ़ा-लिखा कर अपने बेटे को एक आईएएस अफसर बना दिया।

एबीपी न्यूज की खबर के अनुसार रिक्शा चलाकर मुस्कुराते हुए दिख रहा है उसका नाम नरायण जायसवाल है और तस्वीर में जो शख्स रिक्शे में बैठा हुआ है उसका नाम गोविन्द जायसवाल है।

इस खबर की सच्चाई आप को झकझोड़ कर रख देगी।

वाराणसी शहर के जैतपुरा थाना क्षेत्र के उस्मानपुर में गोविंद अपने पिता और दो बहनों के साथ किराए के मकान में रहते थे। गोविन्द के पिता के लिये रिक्शा चलाकर तीन बच्चों का खर्चा उठाना बहुत मुश्किल था और तंगी के साथ गुजर-बसर होती थी।

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गोविन्द बचपन से ही एक आईएएस अफसर बनना चाहता था। छठी क्लास मेें पढ़ने वाला बच्चा ऐसी बातें करता है ये गोविन्द के पिता को बढ़ा हैरान करता था। नरायण जायसवाल ने जब गोविन्द को बेसिक शिक्षा के लिये स्कूल भेजा तो उस सरकारी स्कूल की फीस थी तीन रूपये बीस पैसे, क्योंकि इससे अधिक फीस का बोझ वो गोविन्द की शिक्षा के लिये उठा नहीं सकते थे।

पडोसी की बेइज़्ज़ती ने ज़िन्दगी बदल डाली

गोविन्द ने बताया कि एक बार बचपन में पड़ौसी के खेल रहा था जब उसे बाहर निकाल दिया गया क्योंकि गोविन्द का परिवार बेहद गरीबी वाले माहौल से था। किताबें खरीदने के लिये पैसे नहीं होते थे तो सीनियर छात्रों से मांगकर किताबें पढ़ी। चूंकि गोविन्द हमेशा ही स्कूल और अपनी क्लास टाॅप करता था तो किताबों देने वाले कभी मना नहीं करते थे। आगे की पढ़ाई के लिये गोविन्द को दिल्ली आना था लेकिन इतने पैसे नहीं थे कि दिल्ली आकर दाखिला ले।

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तब उनके पिता नरायण जायसवाल ने घर की जमीन को ही बेच दिया और बेटे को आगे पढ़ने के लिये दिल्ली भेजा। यहां दिल्ली में रहकर अपना खर्च उठाने के लिये गोविन्द ने कक्षा 8 तक के बच्चों को टयूशन देनी शुरू की और साथ ही साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। अगर कभी पैसे की तंगी आन पड़ती तो घर से बहन भेज देती जो वो घर पर सिलाई कर जमा करती थी। गोविन्द के लिये आईएएस बनने की राह आसान नहीं थी लेकिन वो लगातार चलते रहे। फिर एक वक्त आया जब उनका सलैक्शन हुआ लेकिन इंटरव्यू में पहनने लायक कपड़े भी उनके पास नहीं थे, क्योंकि गोविन्द ने काफी समय से कपड़े सिलवाए ही नहीं थे।

तब फिर बहन ममता को फोन किया। गोविन्द ने भावूक होते हुए बताया कि बहन ने प्रेग्नेंसी के लिये रखें पैसे उठाकर दे दिये और एक दिन वो आया जब गोविन्द एक आईएएस अफसर के रूप में था।

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IAS बन्ने के बाद एक घटना हुई। वाराणसी में जहाँ गोविन्द पिता रिक्शा चलाते थे, वहां एक पुलिस कांस्टेबल ने एक मर्तबा उन्हें लाठी मरी थी। जब गोविन्द के IAS बन्ने की बात सामने आई और कांस्टेबल को पता चला कि वो रिक्शा चालक कोई और नहीं इस IAS अफसर के पिता हैं तो उसने घर आकर माफ़ी मांगी।

गोविंद जायसवाल अपनी लगन और मजबूत इरादों के बल पर साल 2007 में आईएएस बने थे और जो तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई वो एक पत्रिका के लिये खींची गई थी। गोविंद की इन दिनों गोवा में पोस्टिंग है और उनकी पत्नी भी आईपीएस अफसर हैं जा की गोवा में ही है।

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