गौरक्षा के नाम पर फर्ज़ी राष्ट्रवादियों द्वारा दलितों पर जारी अत्याचार, आखिर ये नफरत की आग कब बुझेगी?

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एक और विडियो, जिसमे कुछ लोगों को गौरक्षा के नाम पर पीटा जा रहा है. उसमे एक विकलांग को भी देखा जा सकता है. ये सिलसिला लगातार जारी हैं. एक दूसरा विडियो, जिसमे एक शक्स कुछ लोगों को जय श्री राम के नारे लगाने के लिए लगातार ज़लील कर रहा है, बेरहमी से पीट रहा है. खुद को कल का नेता बता रहा है. उना मैं नहीं भूला हूँ. मंदसौर में दो महिलाओं को जिस तरह दुत्कारा और पीटा जा रहा है, वो सब सामने है. सब या तो गौ रक्षा के नाम पर या फिर खुद को बेहतरीन राष्ट्रवादी साबित करने की वेह्शियत. और अब मोदी सरकार अपने नागरिकों में देशभक्ति की लौ को बनाये रखने के लिए, देशव्यापी अभियान चलने जा रही है. नाम दिया गया है, ‘ 70 साल आज़ादी, याद करो कुर्बानी’. कहते हैं इसका मकसद देश की जनता में देशभक्ति के जज्बे को फिर से जगाना है. फिर से जगाना ? सचमुच? अरे भाई, अब तो इस तरह की ‘देशभक्ति’ नथुनों से बह रही है. अति हो गयी है. मैं अगर मान भी लूँ के इस सरकार की मंशा साफ़ है, मगर ज़मीन पर क्या? ज़मीन पर इसका सन्देश कुछ तबकों में कुछ और ही जा रहा है या दिया जा रहा है.

15 से 22 अगस्त के बीच हर बीजेपी सांसद एक एक विधानसभा सीट में रैली निकालेगा और सरकार की ओर से देशभक्ति का सन्देश दिया जायेगा. मगर आपकी भली मंशा के बावजूद सन्देश जा क्या रहा है? जो राष्ट्रवाद लोगों में दोहराव पैदा करे,उसके क्या मायने हैं? क्योंकि जब राष्ट्रवाद एक व्यक्ति के करिश्मे से जुड़ जाए और जब उसके अस्तित्व को चुनौती को देशद्रोह से जोड़ कर देखा जाए, तब राष्ट्रवाद का एक निहायत ही बेढंगा और विकृत रूप सामने आता है. इस राष्ट्रवाद के मायने तब तय कर दिए गए थे, जब कहा गया के मोदी विरोध यानी पाकिस्तान परस्ती है. जब अपनी बीवी की चिंता ज़ाहिर के लिए न सिर्फ आमिर खान, बल्कि स्नेप डील को भी सबक सिखाया जाता है, एक “टीम” द्वारा.

इस टीम का खुलासा स्वयं दश के रक्षा मंत्री ने किया और अगर बीजेपी की एक पूर्व समर्थक साध्वी खोसला की मानें तो ये टीम कोई और नहीं बल्कि बीजेपी सोशल मीडिया विंग द्वारा संचालित की जाती है. दिक्कत ये है देश के इस वक़्त को किस्म की चीज़ें चल रही हैं, एक राष्ट्रवाद और दूसरा COW राष्ट्रवाद और ये दोनों ही आपस में मिल गए हैं.

अखलाक को भीड़ गौ हत्या के नाम पर मार देती है, मगर खुद सत्ताधारी पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा चिंता गाय की कथित हत्या पर की जाती हैं. प्रधानमंत्री इस्पे चुप्पी अवश्य तोड़ते हैं, मगर साथ ही ये भी कह देते हैं के इसमें केंद्र सरकार का क्या किरदार है. सौ फीसदी सच! इसमें बीजेपी का कोई रोल नहीं. मगर इस मुद्दे पर सबसे ज्यादा आपतिजनक बयान देने का काम अगर किसी ने किया तो बीजेपी नेताओं ने. विपक्षी दल होने के नाते, आपको अखिलेश यादव सरकार की ये कहकर बखिया उधेड़ देनी चाहिए थी के आप एक शक्स की सुरक्षा तय नहीं कर पाए और वो भी आदर्श शहर नॉएडा से कुछ दूर? मगर पार्टी के कुछ नेताओं ने बहाने ढूंढें, इस हत्या में किन्तु परन्तु लगाये. और अब भी हर घटना के बाद यही हो रहा है. किन्तु परन्तु! ये सन्देश दिया जा रहा है के गौ रक्षा सर्वोपरि है, इंसानी जान की कोई कीमत नहीं वरना इन दलों की हिम्मत कैसा बढ़ रही है ?

समाज कल्याण मंत्री थावर चंद गहलोत ने तो गौ रक्षा दलों को सामाजिक कल्याण संस्था तक बता डाला. और ये भी कह दिया के इन “सामाजिक कल्याण संस्थाओं को अफवाह की पुष्टि के बाद ही कोई कार्रवाही करनी चाहिए. कार्रवाही? उना वाली? मंदसौर वाली? ये कहिये के चाहे उत्तेजना कोई भी हो, आपको किसी भी तरह की कोई कार्रवाही करने का हक नहीं है! कानून हाथ मे ना लें! नतीजा आप देख रहे हैं. जिन वीडियोस का ज़िक्र मैंने इस लेख के शुरू में किया वो इसी सोच को आगे बढ़ा रहे है. यही वजह है के मेरे मन में मोदी सरकार द्वारा देशभक्ति की लौ “फिर से” जलाने के कार्यक्रम को लेकर आशंकाएं हैं. मैं नहीं जानता के आप इस कार्यक्रम के ज़रिये सार्थक सन्देश दे पाएंगे, खासकर देश जो में चल रहा है,उसे देखते हुए. मुझे याद है JNU प्रकरण के दौरान जब INTOLERANCE या असहिष्णुता के बहस चल रही थी, तब कई भक्त और भक्त पत्रकारों ने कहा था के ये बहस सिर्फ दिल्ली के कुछ पेड पत्रकारों अथवा PRESSTITUTES तक सीमित हैं. अफज़ल प्रेमी गैंग!

आपकी इसी बात को ये तमाम वीडियोस सही साबित कर रहे हैं. है न? देश के छोटे छोटे कस्बों से सामने आ रहे ये वीडियोस क्या कहते हैं? अरे,कहीं ये राजनीतिक साज़िश तो नहीं? हो भी सकते हैं! आखिरकार बुलंदशहर बलात्कार के बारे में आज़म खान ने भी तो यही कहा था? अब आजाम खान की सोच के साथ खड़े दिखाई देना किसी भी भक्त के लिए कितनी बड़ी तौहीन है. है न? किसी ज़माने में सारांश जैसे सार्थक किरदार निभाने वाले अनुपम खेर क्यों नहीं मोर्चा निकालते अमरीकी दूतवास के खिलाफ? आखिर अमरीका ने इन हमलों पर चिंता ज़ाहिर की है? क्यों आये दिन NGO को टारगेट करने वाली, फोर्ड फाउंडेशन पर कड़ा रुख अपनाने वाली राष्ट्रवादी सरकार अचानक प्रधानमंत्री की अमरीका यात्रा से ठीक पहले, फोर्ड फाउंडेशन पर तमाम सख्ती हटा देती है.

देशभक्ति की अलख ज़रूर जलाइए. मगर देशभक्ति, COW राष्ट्रवाद कतई नहीं हो सकती. देशभक्ति का अर्थ हिन्दू राष्ट्र तो कतई नहीं है. क्योंकि वो शक्स जो हमारी मृत गौ माता को ‘ठिकाने‘ लगाता है, वो आपकी गंदगी भी साफ़ करे और आपकी मार भी खाए, ये संभव नहीं. ये गौ माता का प्रताप है के मृत्यु के बाद उसकी चमड़ी भी कुछ लोगों के काम आ रही है, मगर इसके लिए आप किसी की चमड़ी नहीं उधेड़ेंगे. ये तस्वीर निहायत ही भयानक है, सिर्फ इसलिए नहीं क्योंकि इससे देश की अंतर्राष्ट्रीय तौर छवि धूमिल हो रही है,जिसकी चिंता मोदीजी को है, मगर सामाजिक समरसता एक तरफा ट्रैफिक नहीं हो सकता. अगर आपकी ऊंची बिल्डिंग के सामने बसने वाली झुग्गी में रहना वाला शक्स,आपकी नाली साफ़ करने वाला व्यक्ति, आपकी गंदगी ढोने वाला इंसान नाराज़ है, तो उसकी तपिश आपको कभी न कभी ज़रूर महसूस ज़रूर होगी.

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