पश्चिम बंगाल: सांप्रदायिक हिंसा के बीच हिंदू-मुसलमानों ने एक दूसरे को राखी बांध की शांति की अपील, बोले- दो समुदायों के बीच ऐसी हिंसा देखना बंगाल की संस्‍कृति नहीं

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पश्चिम बंगाल में रामनवमी पर जुलूस के दौरान शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है। ख़बरों के मुताबिक, राज्य में बीते रविवार (25 मार्च, 2018) को भड़की इस सांप्रदायिक हिंसा में अब तक करीब चार लोगों की हत्या हो चुकी है। चौथे मृतक शख्स की पहचान एक 16 वर्षीय किशोर के रूप में की गई है। वहीं, दूसरी ओर राज्य से एक ऐसी ख़बर सामने आई है जो अपने आप में सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनूठी मिसाल पेश करती है जो एकता का संदेश देती है।

photo- indianexpress

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक, सद्भाव प्रकट करने के लिए रानीगंज और आसनसोल में विभ‍िन्‍न धर्मों के लोगों ने शुक्रवार(30 मार्च) को एक-दूसरे को राखियां बांधी। बता दें कि, यहां पर रामनवमी शोभायात्रा के दौरान सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। एक अराजनैतिक संस्‍था, बांग्‍ला सांस्‍कृतिक मंच ने शुक्रवार को कोलकाता में एकेडमी ऑफ फाइन ऑर्ट्स के बाहर एक कार्यक्रम आयोजित किया था। यहां विभिन्‍न धर्मों से ताल्‍लुक रखने वाले लोगो धार्मिक आधार पर भेदभाव की निंदा करने को एकत्र हुए।

रिपोर्ट के मुताबिक, आयोजनकर्ता मंच के अध्‍यक्ष समीरुल इस्‍लाम ने कहा कि, दो समुदायों के बीच ऐसी हिंसा देखना बंगाल की संस्‍कृति नहीं है। यह रबींद्रनाथ टैगोर और नजरुल इस्‍लाम की भूमि है जिन्‍होंने हमें धार्मिक सद्भाव सिखाया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से हम लोगों को एक मजबूत संदेश देना चाहते हैं कि हम हिन्‍दू और मुसलमानों के बीच एकता के लिए खड़े हैं। मंच के अध्‍यक्ष समीरुल इस्‍लाम ने आगे कहा कि, यहां इन दो धर्मों के लोग एक-दूसरे को राखी बांधेंगे ताकि यह संदेश दूर तक और स्‍पष्‍ट रूप से जाए।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह संस्‍था ऐसे ही कार्यक्रम रानीगंज और आसनसोल में 14 अप्रैल को (बंगाली नव वर्ष) पर आयोजित करेगी। मंच के महासचिव तन्‍मय घोष ने लोगों से राज्‍य में शांति बनाए रखने की अपील की। उन्‍होंने कहा कि, ‘यह और हिंसा भड़काने का समय नहीं है, बल्कि सांप्रदायिक सद्भाव पैदा करने का वक्‍त है।’

कार्यक्रम में शिरकत करने वाले भाषा व चेतना समिति के महासचिव व बिधाननगर कॉलेज में असिस्‍टेंट प्रोफेसर, इमानुल हक ने कहा कि, ‘पश्चिम बंगाल के गांवों में, ईद पर हिंदू अपने घर पर शायद ही कभी दोपहर का भोजन करते थे। इसी तरह, हिन्‍दू त्‍योहारों के समय मुस्लिम पंडालों और हिन्‍दू घरों में खाना खाते हैं। यह हमारी परंपरा रही है और हमें इसकी रक्षा करनी होगी। यहां तक कि हिन्‍दू विवाह समारोहों में हम मेहमानों को बिरयानी सर्व होते देखते हैं। यह एक उदाहरण है कि कैसे दोनों समुदाय एक-दूसरे एक जुड़े हुए हैं…।’

इमानुल हक ने आगे कहा कि, ‘आज कुछ लोग गलत नीयत से इस सद्भाव को खत्‍म करना चाहते हैं। बतौर इस राज्‍य के नागरिक, ऐसी किसी की कोशिश को हमें शांतिपूर्ण तरीके से नाकाम करना होगा।’

बता दें कि, बीते रविवार (25 मार्च, 2018) को भड़की इस सांप्रदायिक हिंसा में करीब चार लोगों की हत्या हो चुकी है। चौथे मृतक शख्स की पहचान एक 16 वर्षीय किशोर के रूप में की गई है। बेटे की हत्या के बाद हिंसाग्रस्त आसनसोल की एक मस्जिद के इमाम मौलाना इम्दादुल रशीदी ने गुरुवार (29 मार्च) को जब अपनी खामोशी तोड़ी तो वहां मौजूद लोग रोने लगे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इमाम साहब ने यहां एक समूह को संबोधित करते हुए लोगों से शांति की अपील की है। उन्होंने कहा कि बदले की बात की तो वो मस्जिद और शहर छोड़कर चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि कोई और बाप अपना बेटा खोए। अपने बेटे को खोने वाले इमाम साहेब की यह भावुक अपील सुनकर वहां मौजूद लोगों के आंखों से आंसू निकल आए।

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