हिंदू महासभा के अध्यक्ष बोले- ‘हिंदू अभिनेत्रियों को भी जायरा वसीम से सीख लेते हुए बॉलीवुड छोड़ देना चाहिए’

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आमिर खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘दंगल’ से डेब्यु कर रातोंरात मशहूर हुईं कश्मीरी अभिनेत्री जायरा वसीम ने रविवार (30 जून) को अचानक फिल्म करियर को अलविदा कहने का ऐलान कर दिया। उनका कहना है कि इसके कारण वह अपने धर्म से दूर जा रही थीं। अपने फेसबुक पेज पर विस्तार से लिखे एक पोस्ट में 18 वर्षीय अभिनेत्री ने बॉलीवुड में अपने अच्छे करियर को छोड़ने के लिए धार्मिक कारणों का हवाला दिया।

जायरा का ये पोस्ट देखते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस पोस्ट के एक दिन बाद यानी सोमवार को कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि जायरा का अकाउंट हैक हो गया था और उन्होंने बॉलीवुड छोड़ने वाला पोस्ट हैकर ने किया है। वहीं, अब इस मामले पर खुद जायरा की सफाई आ गई है। जायरा ने अपने ट्वीट के जरिए दो टूक कहा कि उनका कोई अकाउंट हैक नहीं हुआ है और वे अपने सोशल मीडिया को खुद हैंडल करती हैं।

इस बीच अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज ने जायरा वसीम के फैसले की तारीफ करते हुए इसे सराहनीय कदम बताया है और हिंदू अभिनेत्रियों को भी इससे सीख लेने की सलाह दी है। स्वामी चक्रपाणि ने अपने ट्वीट में कहा, ‘धार्मिक आस्था के लिए फिल्म अभिनेत्री जायरा द्वारा फिल्म से किनारा करना प्रसंसनीय,हिन्दू अभिनेत्रीयों को भी जायरा से लेंना चाहिए प्रेरणा-स्वामी चक्रपाणि महाराज-राष्ट्रीय अध्यक्ष-अखिल भारत हिन्दू महासभा।’

स्वामी चक्रपाणि ने जायरा के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे सही फैसला बताया है। उनका कहना है कि जायरा वसीम का फैसला प्रशंसनीय है और हिंदू अभिनेत्रियों को भी इससे सीख लेनी चाहिए। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि जायरा वसीम ने धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए बॉलीवुड और फिल्मों से दूरी बना ली है। उनका ऐसा करने की जो खबरें आई हैं वह वाकई में प्रशंसनीय हैं और इससे जो भी हिंदू अभिनेत्रियां हैं जिनको लगता है कि बॉलीवुड में कहीं ना कहीं अधार्मिक कार्य हो रहे हैं और कहीं ना कहीं उनको समझौता करना पड़ता है तो उन हिंदू अभिनेत्रियों को भी इस पर प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।

चक्रपाणि ने कहा कि एक छोटी सी बच्ची ने जो संदेश देने का काम किया है ये बहुत बड़ा संदेश है। क्योंकि उसने माना है कि धर्म से बड़ा कुछ भी नहीं है। चकाचौध की दौड़ में धर्म को दरकिनार कर दिया जाता है और कोई भी अधार्मिक काम कर दिया जाता है। पैसे के लिए कोई भी अनैतिक काम कर लिए जाते हैं वो दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि मैं आशा करता हूं कि जायरा की तरह हिंदू अभिनेत्रियां भी ऐसी पहल करें और उनसे प्रेरणा ले।

रविवार को फेसबुक पर अपने लंबे-चौड़े पोस्ट में 18 वर्षीय कश्मीरी अभिनेत्री ने कहा कि इस पेशे (फिल्मों) में उन्होंने पांच साल पूरे कर लिए हैं और अब वह कबूल करना चाहती हैं कि अपने इस काम से मिली ‘‘पहचान से वह वाकई में खुश नहीं हैं।’’ विस्तृत फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा, इस क्षेत्र ने वास्तव में मुझे बहुत प्यार, समर्थन और प्रशंसा दिया है, लेकिन इसने मुझे अज्ञानता के रास्ते पर ले जाने का काम भी किया, क्योंकि मैं चुपचाप और अनजाने में ‘ईमान’ से बाहर भटक गई (अल्लाह की इबादत में मुस्लिमों का दृढ़ मार्ग)। अभिनेत्री ने कहा, जब मैंने ऐसे माहौल में काम करना जारी रखा जो लगातार मेरे ईमान में दखल दे रहा था, तो मेरे धर्म के साथ मेरा रिश्ता खतरे में पड़ गया था।

उन्होंने कहा, पांच साल पहले, मैंने एक फैसला लिया, जिसने मेरी जिंदगी बदलकर रख दी। मैंने जैसे ही बॉलीवुड में कदम रखा, इसने मेरे लिए लोकप्रियता के दरवाजे खोल दिया। जायरा ने कहा कि जनता का ध्यान उनकी ओर खिंचने लगा और वह युवाओं के लिए एक रोल मॉडल के रूप में पहचानी जाने लगीं। उन्होंने कहा, हालांकि, ऐसा कुछ नहीं था जो मैंने करने या बनने के बारे में सोचा था, विशेष रूप से सफलता और असफलता को लेकर मेरे विचारों के संबंध में, जिसे मैंने अभी-अभी जानना और समझना शुरू किया था।

अभिनेत्री ने कहा, मैंने आज 5 साल पूरे कर लिए हैं और मैं यह स्वीकार करना चाहती हूं कि मैं वास्तव में इस पहचान से खुश नहीं हूं, यानी मेरे काम से। बहुत लंबे समय से अब ऐसा महसूस हो रहा है कि मैंने कुछ और बनने के लिए संघर्ष किया है। जैसे ही मैंने उन चीजों को समझने की कोशिश की जिन्हें मैंने अपनी मेहनत, समय और भावनाएं दी हैं और एक नई जीवनशैली में ढलने की कोशिश की, तभी मुझे एहसास हुआ कि भले ही मैं यहां अच्छी तरह से फिट हो सकती हूं लेकिन मैं यहां से जुड़ाव महसूस नहीं करती।

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