गरीबों की शिकायतों पर कार्रवाई न करने पर हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को लगाई फटकार

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शनिवार (2 दिसंबर) को दिल्ली हाई कोर्ट ने एक शख्स की शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं करने पर पुलिस की आलोचना की है। अदालत ने कहा कि यह बेदह खेदपूर्ण है कि गरीब लोगों की शिकायतें अनसुनी रह जाती हैं। इस शख्स ने अपनी पत्नी के लापता होने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

हाई कोर्ट
File Photo: HT

न्यूज़ एजेंसी भाषा की ख़बर के मुताबिक, न्यायमूर्ति विपिन सांधी और पी एस तेजी की पीठ ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त को आदेश दिया कि संबंधित पुलिस थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी समेत जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

पीठ गरीब लोगों द्वारा दायर की गयी शिकायतों को लेकर पुलिस के रवैये के प्रति अलोचनात्मक थी। पीठ ने कहा कि, यह कहना बेहद खेदपूर्ण है कि आम आदमी की कोई सुनवाई नहीं है और अक्सर याचिकाकर्ता जैसे गरीब लोगों द्वारा की गई शिकायतें अनसुनी रह जाती हैं।

इस मामले में याचिकाकर्ता निजी गार्ड है जो प्रतिमाह आठ से नौ हजार रूपये कमाता है। पीठ ने कहा, मौजूदा मामले में पुलिस ने अगर याचिकाकर्ता की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की होती तो स्थिति दूसरी हो सकती है। पीठ ने कहा, यह सीधे-सीधे पुलिस की तरफ से हुई लापरवाही है जो मौजूदा मामले में इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है।

बता दें कि, कुछ दिनों पहले एक रिपोर्ट के बताया गया था कि दिल्ली पुलिस में करीब 80 हजार कर्मी हैं। लेकिन, उनमें अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों की संख्या चार फीसदी से भी कम है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा जारी की गयी इस रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के सबसे बड़े अल्पसंख्यक तबके मुसलमानों की संख्या दिल्ली पुलिस में दो प्रतिशत से भी कम है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस में 1,388 मुसलमान कर्मी हैं जबकि 697 ईसाई हैं। जबकि सिखों की संख्या 856 है।

 

 

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