‘हिचकी’ रानी मुखर्जी की वापसी नहीं, आदित्य चोपड़ा का जोखिम भरा प्रयोग है बाॅलीवुड सिनेमा के लिए

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अपने जमाने की सफल अदाकारा रानी मुखर्जी लम्बें वक्त बाद ‘हिचकी’ से कमबैक करने जा रही है। प्रयोगवादी सिनेमा जिसके बीज अनुराग कश्यप, दिबाकर बनर्जी जैसे निर्देशकों के काम से निकलते है, उसी धारा में रानी मुखर्जी हिचकी के साथ वापसी कर रही है जो सिर्फ एक मनोरजंन सिनेमा नहीं बल्कि यर्थादवादी धरातल पर व्यक्तिगत् सघर्ष, सामाजिक भेदभाव की कहानी को कहता है।

हिचकी

किसी को भी हिचकी आ जाना मामूली बात है लेकिन यह हिचकी एक बीमारी भी हो सकती, एक अपंगता भी साबित हो सकती है। क्योंकि अगर आप ऐसी किसी समस्या के साथ इस समाज का हिस्सा हो तो आप औरो से अलग माने जाएगें। इसके बाद आपका सबके बीच अपने आप को काॅमन साबित करने का संघर्ष और अपनी शर्तो और जिद पर जिन्दगी गुजारने का हुनर कोई मामूली जोखिम नहीं है।

‘हिचकी’ इसलिए जोखिम से कम नहीं है क्योंकि इसे आदित्य चोपड़ा का मशहूर बैनर यशराज लेकर आ रहा है जो सलमान खान की किसी भी फूहड़ फिल्म पर 100 करोड़ से अधिक कमा लेता है तो हिचकी जैसे यर्थादवादी सिनेमा में घुसने की जरूरत क्यों महसूस करता है।

आदित्य चोपड़ा चाहते तो कोई भी तड़क-भड़क वाली फिल्म रोहित शेट्टी को हायर कर रानी मुखर्जी का कमबैक करवा सकते थे लेकिन उन्होंने प्रयोगवादी सिनेमा बनाने पर विचार किया। फिल्म क ट्रेलर देखकर आप खुद अनुमान लगाइयें।

देखिए हिचकी का ट्रेलर :

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