महाराष्ट्र पर सुप्रीम कोर्ट कल सुबह 10.30 बजे सुनाएगा फैसला

0

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र मामले में अपना आदेश मंगलवार सुबह 10.30 बजे के लिए सोमवार को सुरक्षित कर लिया। इस तरह भाजपा-अजीत पवार को कम से कम अतिरिक्त एक दिन की राहत मिल गई है। महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए भाजपा के पास राकांपा के सभी 54 विधायकों का समर्थन होने का दावा करते हुए केंद्र ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय से मुख्यमंत्री पद के लिए देवेंद्र फडणवीस को आमंत्रित करने के राज्यपाल के फैसले के खिलाफ याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए दो से तीन दिन का समय देने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट
file photo

शिवसेना-कांग्रेस-राकांपा ने फडणवीस को मुख्यमंत्री के तौर पर और राकांपा के अजित पवार को उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ दिलाने के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है। केंद्र ने न्यायमूर्ति एन वी रमन, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ को बताया कि राज्यपाल ने पूरी समझदारी से सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 23 नवंबर को आमंत्रित किया था।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष न्यायालय को बताया कि महाराष्ट्र के राज्यपाल बिना किसी मतलब के इस बात की जांच नहीं कर सकते कि सरकार बनाने के लिए किस पार्टी के पास संख्या बल है। मेहता ने कहा कि राज्यपाल चुनाव नतीजों के बाद के तथ्यों और स्थिति से अवगत हैं जिससे राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया।

उच्चतम न्यायालय ने फडणवीस को आमंत्रित करने के कोश्यारी के पत्र पर विचार करने के बाद कहा कि फैसला इस पर होगा कि मुख्यमंत्री सदन में बहुमत साबित कर पाते हैं या नहीं। सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल ने शिवसेना, भाजपा और राकांपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था और उनके सरकार बनाने में नाकाम होने के बाद ही राष्ट्रपति शासन लगाया गया।

जैसे ही सोमवार को सुबह सुनवाई शुरू हुई तो मेहता ने राज्यपाल और फडणवीस के पत्र सौंपे। पीठ ने रविवार को ये पत्र सौंपने के लिए कहा था। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस के उस अनुरोध पर विचार नहीं कर रहा है कि उन्हें महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाए।

लाइव अपडेट

  • महाराष्ट्र पर अब सुप्रीम कोर्ट कल 10.30 बजे फैसला सुनाएगा। विपक्ष की ओर से मांग की गई है कि कोर्ट जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट कराए।

  • बीजेपी गठबंधन ने कोर्ट को जो दिखाया वह एनसीपी के 54 विधायकों के हस्ताक्षर हैं जो अजीत पवार को विधायक दल के नेता के रूप में चुन रहे हैं। उन्हें बीजेपी गठबंधन में शामिल होने के लिए समर्थन नहीं मिला। सरकार ने अजीत पवार को समर्थन दिया। गवर्नर कैसे इस पर आंखें मूंद सकता है: सिंघवी
  • अभिषेक मनु सिंघवी राकांपा और कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं: जब दोनों समूह फ्लोर टेस्ट के लिए खुले हैं, तो देरी क्यों होनी चाहिए? क्या एनसीपी का एक भी विधायक यहां कहता है कि हम भाजपा गठबंधन में शामिल होंगे? क्या कोई एकल कवरिंग पत्र ऐसा कह रहा है। यह लोकतंत्र पर किया गया धोखा था।
  • एनसीपी-कांग्रेस-शिवसेना की सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका: शिवसेना की ओर से पेश कपिल सिब्बल ने पूछा, राष्ट्रीय आपातकाल क्या था जिसे राष्ट्रपति शासन 5.17 पर रद्द कर दिया गया था और सुबह 8 बजे शपथ दिलाई गई थी? राष्ट्रपति शासन को सुबह 5.17 बजे निरस्त कर दिया गया जिसका अर्थ है कि 5.17 से पहले सब कुछ हुआ।
  • फ्लोर टेस्ट के लिए राज्यपाल को समयसीमा तय करने को नहीं कहा जा सकता है । यह राज्यपाल का विवेकाधिकार है। राज्यपाल के कदम को दुर्भावना से प्रेरित नहीं कहा जा सकताः मुकुल रोहतगी, महाराष्ट्र बीजेपी के वकील
  • राज्यपाल ने 9 नवंबर तक इंतजार किया। BJP ने मना कर दिया। 10 तारीख को शिवसेना से पूछा तो उसने भी मना कर दिया। 11 को एनसीपी ने भी मना किया तो राष्ट्रपति शासन लगाया गयाः तुषार मेहता, सॉलिसिटर जनरल
  • तुषार मेहता ने समर्थन की चिट्ठी कोर्ट में पेश की। उन्होंने कहा कि इसी चिट्ठी के आधार पर राज्यपाल ने शपथ दिलाई। सुप्रीम कोर्ट में 22 नवंबर को लिखी गई एनसीपी नेता अजित पवार की उस चिट्ठी को भी सौंपा गया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि एनसीपी के सभी 54 विधायकों ने उन्हें नेता चुना है और सरकार बनाने के लिए अधिकृत किया है।
  • महाराष्ट्र मामले की सुनवाई को लिए एनसीपी-शिवसेना-कांग्रेस के वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, बीजेपी महाराष्ट्र के वकील मुकुल रोहतगी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट पहुंचे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here