कोरोना वायरस: आगरा के क्वारंटाइन सेंटर में स्वास्थ्य कर्मियों ने की भूख हड़ताल

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भारत में तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस के कहर के बीच उत्तर प्रदेश का आगरा शहर एक बार फिर से चर्चा में आ गया है। आगरा के कमला नगर स्थित महाराजा अग्रसेन सेवा सदन में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर में रह रहे पारस अस्पताल के कर्मचारियों ने मंगलवार सुबह भूख हड़ताल शुरू कर दी। ये कर्मचारी 6 अप्रैल से ही क्वारंटाइन हैं। इन स्वास्थ्य कर्मचारियों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग ने इनकी कोरोना जांच नहीं की है और क्वारंटाइन का समय पूरा होने के बावजूद इन्हें घर नहीं जाने दिया जा रहा है।

फोटो: सोशल मीडिया

समाचार एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक पारस अस्पताल के कर्मचारी अनुज ने बताया कि, “हम 48 लोग 6 अप्रैल से क्वारंटाइन हैं। 6 अप्रैल से 14 अप्रैल तक तक हम पारस अस्पताल में क्वारंटाइन थे, फिर 14 अप्रैल से हम अग्रेसन सेवा सदन में हैं और अभी तक स्वास्थ्य विभाग की तरफ से हमारे पास कोई नहीं आया और ना ही हमारी जांच की गई है।” उन्होंने बताया कि उनके साथ 3 डायबिटीज के मरीज भी हैं, जिनकी दवाइयां खत्म हो चुकी हैं। उन्होंने फोन कर अपनी जरूरतें बताईं, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

अनुज ने कहा, “जब तक हम पारस अस्पताल में थे, उस वक्त तक हमारी थर्मल स्क्रीनिंग हुई थी, लेकिन जब हमें यहां भेजा गया, उसके बाद से एक बार भी थर्मल स्क्रीनिंग नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने न हमें मास्क दिया है और ना ही सेनिटाइजर। हमारा धर्य अब टूट चुका है।” अनुज ने आगे कहा, “पिछले 22 दिनों से हमसे कहा जा रहा है कि आपका टेस्ट होगा, लेकिन अभी तक नहीं हुआ है। हमारे साथ जो कोरोना से संक्रमित मरीज थे, वे ठीक होकर घर जा चुके हैं, लेकिन हमें न तो घर भेजा गया और न ही स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई सुविधा दी गई है। हम चाहते हैं कि हमें घर भेज दिया जाए।”

आगरा एसीएम-1 ने आईएएनएस को बताया कि इनसे होम क्वारंटाइन का फॉर्म भरवाकर इन्हें घर भेजा जाएगा। साथ ही इनको 15 दिन का राशन भी दिया जाएगा। इससे पहले वाटर वर्क्‍स स्थित अग्र भवन में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर में भी लोग धरने पर बैठ गए थे। उनका भी यही आरोप था कि कई दिनों तक उनकी जांच नहीं की गई थी।

बता दें कि, आगरा में कोरोना के अब तक 37द से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। उत्तर प्रदेश में कोरोना के सबसे ज़्यादा मामले आगरा में ही हैं।

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