हरियाणा जाट आंदोलन में हुई हिंसा की जांच रिर्पोट में नये खुलासे

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हरियाणा में जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और आगजनी के मामले की जांच कर रहे प्रका‍श सिंह पैनल की रिर्पोट में कई और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि कई सीनियर अफसरों के अपने जिम्मेदारी से कथित तौर पर भागने या असमंजस में फैसले लेने का जिक्र गया है।

जनसत्ता की खबर के अनुसार, जांच पैनल के सामने करीब 3,000 गवाहों ने अपने बयान रिकॉर्ड कराए हैं। पैनल ने पाया कि 19 फरवरी को हिंसा शुरू होने के तुरंत बाद सबसे ज्‍यादा प्रभावित जिलों में से एक में बतौर डिप्टी कमिश्नर तैनात एक आईएएस अफसर ने अपनी सभी आधिकारिक शक्तियां अडिशनल डिप्टी कमिश्नर को सौंप दी। तीन दिन तकडिप्टी कमिश्नर घर से ही ऑपरेट करते रहे जबकि अडिशनल डिप्टी कमिश्नर ने डिस्ट्रीक मजिस्‍ट्रेट की शक्‍तियों का इस्‍तेमाल किया। जब पैनल ने डिप्‍टी कमिश्नर से इस बारे में पूछा तो उन्‍होंने एक जूनियर को इंचार्ज बनाए जाने के कदम को सही ठहराया।

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खबर में आगे कहा गया है कि हिंसा के दौरान कुछ सीनियर अफसरों ने अपनी शक्तियां और अधिकार जूनियरों को सौंप दी तो कई अफसर केंद्र की चेतावनी के बावजूद समय पर कदम उठाने में नाकाम रहे। बता दें कि जांच दल अपनी रिपोर्ट फाइनल करने के आखिरी दौर में है। उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी रह चुके प्रकाश सिंह ने बताया कि अभी आंदोलन जांच की रिर्पोट पर काम चल रहा है और रिपोर्ट महीने के अंत तक तैयार हो जाएगी।

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