किसान आंदोलन: मंदसौर जा रहे हार्दिक पटेल को पुलिस ने हिरासत में लिया

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मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में किसान आंदोलन के दौरान छह किसानों की मौत पर सियासी संग्राम छिड़ गया है।मंदसौर में आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए किसानों के पीड़ित परिवारों में मिलने जा रहे पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को मंगलवार(13 जून) को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हार्दिक पटेल किसानों से मिलने मंदसौर जा रहे थे, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पुलिस ने उन्हें मंदसौर पहुंचने से पहले नीमच में हिरासत में लिया। 

आंदोलन कर रहे किसानों पर गोलीबारी की घटना को लेकर हार्दिक पेटल ने शिवराज सरकार पर हमला बोला। पटेल ने मंदसौर जाने के लिए प्रशासन से इजाजत मांगी, लेकिन हालात बिगड़ने की आशंका के चलते प्रशासन ने उन्हें मंदसौर जाने की अनुमति नहीं दी। लेकिन मंगलवार को हार्दिक पटेल नीमच पहुंचे।

नीमच से उन्होंने मंदसौर जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें जाने से रोक लिया और नीमच के नयागांव में हिरासत में ले लिया। हार्दिक के साथ मौजूद सात और लोगों को भी हिरासत में ले लिया गया है। इस दौरान पटेल ने कहा कि गुजरात का पाटीदार समुदाय हमेशा मध्यप्रदेश के किसानों के समर्थन में है। हम इस लड़ाई में उनके साथ हैं।

बता दें कि इससे पहले मंदसौर जा रहे स्‍वराज इंडिया के प्रमुख योगेंद्र यादव और सामाजिक कार्यकर्ताओं मेधा पाटकर और स्‍वामी अग्निवेश को रविवार(11 जून) को हिरासत में ले लिया गया था। मंदसौर में घुसने से पहले ही पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले लिया।

वहीं, इससे पहले 8 जून को मंदसौर जाने पर अड़े कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को मध्य प्रदेश पुलिस ने नीमच जिले के जीरण में हिरासत में ले लिया था। करीब सवा चार घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। जिसके बाद राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमा पर मारे गए किसानों के पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।

6 किसानों की मौत

बता दें कि मध्य प्रदेश के मंदसौर में मंगलवार(6 जून) को किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में छह किसानों की मौत हो गई थी और कई अन्य किसान घायल हो गये थे। इसके बाद किसान भड़क गये और किसान आंदोलन समूचे मध्य प्रदेश में फैल गया तथा और हिंसक हो गया।

शिवराज सरकार का ‘यू-टर्न’

वहीं, 8 जून को मध्य प्रदेश सरकार ने आखिरकार मान लिया कि मंदसौर में भड़के किसान आंदोलन में किसानों की मौत पुलिस की गोली से ही हुई थी। राज्य के गृहमंत्री ने स्वीकारा कि किसानों पर पुलिस ने ही गोली चलाई थी।
गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पांच किसानों की मौत पुलिस की गोलीबारी में हुई है। जांच में इसकी पुष्टि हुई है।

 बता दें कि इससे पहले इससे पहले पिछले दो दिनों से प्रदेश सरकार पुलिस फायरिंग से इनकार कर रही थी। भूपेंद्र सिंह समते राज्य सरकार के सभी अधिकारी अब तक यही कह रहे थे कि गोली अराजक तत्वों द्वारा चलाई गई थी। किसान लगातार इस दावे को खारिज कर रहे थे।
शिवराज ने तोड़ा अनशन

राज्य में एक जून से 10 जून तक चले किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में 6 लोगों की मौत के बाद सूबे में शांति के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद 10 जून को उपवास पर बैठ गए थे। जिसके बाद अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे शिवराज सिंह चौहान ने एक दिन बाद 11 जून को उपवास तोड़ दिया।

10 दिन तक चला आंदोलन 

बता दें कि मध्यप्रदेश में किसानों ने 1 जून को शिवराज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कर्ज माफी और अपनी फसल के वाजिब दाम की मांग को लेकर किसानों ने हड़ताल शुरू कर दी। किसानों ने पश्चिमी मध्य प्रदेश में अपनी तरह के पहले आंदोलन की शुरूआत करते हुए अनाज, दूध और फल-सब्जियों की आपूर्ति रोक दी। सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुआ किसानों का आंदोलन 10 दिन चला था।

 

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