चेतन भगत और एकता कपूर अपनी ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ में किस बिहार की कल्पना कर रहे है?

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चेतन भगत की कहानी पर बनी फिल्म ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ जिसका निर्माण एकता कपूर कर रही है सोशल मीडिया पर ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ का ट्रेलर धूम मचा रहा है। फिल्म के बारे में कहा गया है कि ये बिहार के प्रेमी युगल पर आधारित कहानी है जिसमें अंग्रेजी न आने की वजह से नायक प्रेमिका को हासिल नहीं कर पाता है।

चेतन भगत

वन लाइनर में कहानी बेहद दमदार लगती है क्योंकि बिहार ही नहीं सारे देश में अंग्रेजी न बोल पाने की समस्या एक आम बात है। इसी मुद्दे को चेतन भगत अपनी किताब में भी भूना चुके है। लेकिन फिल्म का ट्रेलर देखने पर पता चलता है कि ये बिहार की पृष्ठभूमि से कितनी अलग कहानी है। हम जिस बिहार की कल्पना करते है वो प्रकाश झा अपने सिनेमा में दिखा पाए है।

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इस बिहार की तुलना अमेरिका से कर दी गई है। बिहार दुनिया के सभी सम्पन प्रदेशों से बिल्कुल जुदा दिखाया गया है। बिहार में लड़कों को केवल लड़कियों के पीछे लगे रहने का ही काम है। बेरोजगारी, शिक्षा, अपराध, गरीबी से इस बिहार की ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ का कोई वास्ता नहीं है।

बिहार की अगर कोई बात इस फिल्म को भुनाती है तो वह प्रदेश की भाषा जिसकी बदौलत बिहार को कहानी कहने के लिए चुना गया। लेकिन बिहार को इस फिल्म में दिखाया गया है वो वर्तमान बिहार से बिल्कुल जुदा है। एयर कंडिशन कमरों में बैठ कर सोचा गया बिहार आपको ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ में कही नहीं दिखाई देगा।

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वो बिहार जो अपनी मिट्टी की खुशबू के लिए मशहूर है, वो बिहार जो वहां के भोले और मेहनती लोगों की वजह से मशहूर है। उस बिहार को चेतन भगत और एकता कपूर ने क्या बनाकर दिखा दिया है।

बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित बिहार लालू और नीतिश के नेतृत्व में विकास की दौड़ में अभी कुलाचे भरने को तैयार है लेकिन एकता कपूर का बिहार तो कल्पनाओं के आधार पर खड़ा है जहां का युवा सिर्फ लड़कियों को हासिल करने के लिए बावला होए जा रहा है। इसलिए उसे प्रेमिका आधी ही मिलती है।

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बहरहाल बिहार का युवा ये बात भली-भांती जानता है कि अच्छी अंग्रेजी न आने की वजह से वो नौकरियों में पिछड़ गया और जिन्होंने इसे हासिल किया उन्होंने दुनिया में अपना नाम बनाया। लेकिन ऐसा पहली बार देखा जाएगा जब विकास के वास्तविक सपने को कल्पना की रंगीन दुनिया से जोड़ा जा रहा है।

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