गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार: 24 दोषी करार, अदालत ने साजिश के आरोप खारिज किए, भाजपा कॉर्पोरेटर बरी

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पूरे देश को झकझोर कर रख देने वाले 2002 के गुजरात दंगों के दौरान हुए गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में फैसला सुनाते हुए विशेष एसआईटी अदालत ने मामले के 24 आरोपियों को दोषी करार दिया जबकि 36 आरोपियों को बरी कर दिया और सभी आरोपियो पर लगाए गए साजिश के आरोप खारिज कर दिए ।

गौरतलब है कि गुजरात के बहुचर्चित गोधरा कांड के बाद राज्य में भड़के दंगों के दौरान हुए गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोग मारे गए थे ।

भाषा की एक खबर के अनुसार विशेष एसआईटी अदालत के न्यायाधीश पी बी देसाई ने दोषी करार दिए गए 24 आरोपियों में से 11 को हत्या का कसूरवार ठहराया जबकि बाकी को अन्य आरोपों में दोषी करार दिया गया । कुल 66 आरोपियों में से छह की मौत सुनवाई के दौरान हो चुकी है ।

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भाजपा के मौजूदा निगम पाषर्द बिपिन पटेल बरी किए गए आरोपियों में शामिल हैं जबकि विश्व हिंदू परिषद :विहिप: के नेता अतुल वैद्य उन 13 लोगों में शामिल हैं जिन्हें हल्की धाराओं में दोषी करार दिया गया। जिस इलाके में गुलबर्ग सोसाइटी स्थित है वहां के तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर के जी एर्डा और पूर्व कांग्रेस पाषर्द मेघ सिंह चौधरी बरी किए जाने वालों में शामिल हैं ।

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सभी आरोपियों पर लगाई गई आईपीसी की धारा 120-बी को हटाते हुए अदालत ने कहा कि इस मामले में आपराधिक साजिश का कोई सबूत नहीं है । साजिश के आरोप को हटाने से दोषियों की जेल की सजा की अवधि कम होगी । सजा की अवधि पर फैसला छह जून को आएगा ।

अभियोजन पक्ष हत्या के दोषी ठहराए गए 11 लोगों को मौत की सजा देने की मांग कर सकता है । हालांकि, पीड़ितों के वकीलों ने कहा कि वे हत्या के दोषियों के लिए उनकी मृत्यु तक जेल की सजा की मांग करेंगे ।
2002 के मुस्लिम विरोधी नरसंहार में ग़ैर सरकारी आंकड़े के अनुसार काम से काम 2000 से अधिक लोगों की हत्या हुई थी जबकि आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या 1,000 ज़रा अधिक बतायी गई थी।

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एहसान जाफरी की विधवा, ज़किया जाफरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो उस समय गुजरात के मुख्य्मंत्री थे, पर दंगाइयों की मदद करने का इलज़ाम लगाया था।

कल के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ज़किया ने कहा वो इस से संतुष्ट नहीं हैं।

दूसरी और दंगा पीड़ितों के साथ करने वाली तीस्ता सेतलवाड ने कहा कि वो अदालत द्वारा बरी किये गए आरोपियों के खिलाफ अपील करने के बारे में सोच रही हैं।

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