इस गुजरात चुनाव में “KHAM” पे नही “PODAM” पे दांव लगा रही है कांग्रेस

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कभी कांग्रेस के दिग्गज चेहरा रहे माधव सिंह सोलंकी के शासन काल पर गौर करे तो उस दौर में कांग्रेस ने जातीय समीकरण साधने के लिए ‘खाम’ फॉर्मूला तैयार किया था। यह एक ऐसी रणनीति थी, जिसके दम पर कांग्रेस से सत्ता छिनना नामुमकिन था, माधव सिंह सोलंकी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने “KHAM” (K= क्षत्रिय, H= हरिजन, A= आदिवासी और M= मुस्लिम) फैक्टर के जरिए विधानसभा की 182 सीटों में से 149 पर जीत दर्ज की थी, जो कि आज तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड है।

मोदी
फोटो- @OfficeOfRG

“KHAM” फॉर्मूले की बात करे तो इसके तहत कांग्रेस ने क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुसलमानों का धुर्वीकरण किया था। इन जातियों को मिलाकर गुजरात की 70 फीसदी आबादी पूरी होती है, जिसका खासा फायदा 1985 के विधानसभा चुनाव में कांगेस को मिला था। लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव की हार के बाद अब कांग्रेस की बदलती गतिविधिया, पार्टी की बदलती रणनीतियो को उजागर करती है।

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“KHAM” को छोड़ कांग्रेस ने अब “PODAM” की नई रणनीति अपना ली है, जिसका अर्थ है (P= पाटीदार, O= ओबीसी एस्टी-एससी, D= दलित, A= आदिवासी, M= मुसलमान) कांग्रेस एड़ी चोटी का जोर लगा रही है कि इस जातीय समीकरण “PODAM” से बीजेपी को गुजरात में सत्ता से ‘पोडा’ कर दिया जाए अर्थात हटा दिया जाए। पाटीदार, ओबीसी, एस्टी-एससी, आदिवासी और मुसलमान इन सभी जातियों के समीकरण से बनी इस नयी रणनीति में निहित जातियों पर गौर करे तो-

@HardikPatel_

प्रथम जाती है पाटीदार, जिसके नेता हार्दिक पटेल के कांग्रेस समर्थन के साथ बरसो से भाजपा का समर्थन कर रहे पटेल समुदाय का समर्थन भी कांग्रेस के लिए बड़ी बढ़त के तौर पर देखा जा रहा है, वही दूसरी ओर ओएसएस एकता मंच अर्थात ओबीसी एवं एस्टी-एससी एकता मंच जिसके नेता अल्पेश ठाकुर 23 अक्टूबर को कांग्रेस का दामन थाम चुके है जिसके परिणाम स्वरुप 17-18 सीटो पर कांग्रेस की जीत तय कही जा सकती है…

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तीसरा दलित वर्ग जिसका ‘उना दलित प्रकरण’ के बाद रुझान कांग्रेस की तरफ दिखता नजर आ रहा है इसका साक्षात्कार दलित नेता जिग्नेश मवानी के समर्थन से देखा जा सकता है, चौथा आदिवासी समुदाय जिसके रुझान का पूर्व में हुए चुनावो से विश्लेषण किया जाए तो वह बड़ी संख्या में कांग्रेस के साथ दिखाई देता है यानी गुजरात के आदिवासी बहुल्य इलाको में कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा है, साथ ही गौरतलब है की नवसर्जन यात्रा के दौरान राहुल गांधी को भी आदिवासी इलाको में जबरदस्त समर्थन मिला।

अंतिम में बात करते है मुसलमान समाज की वैसे तो कांग्रेस अपनी रणनीति के अनुसार मुस्लिम समाज पर पूरे प्रचार में कही भी तरजीह नहीं दे रही है की तो गुजरात की राजनीति के परिपेक्ष में ऐसा प्रतीत होता है की विकल्प हीन मुस्लिम समाज भाजपा के साथ जाने की बजाय कांग्रेस को वरीयता देंगे, जैसा की पिछले चुनावो में भी देखने को मिला है, इसलिए PODA में M का समीकरण भी देखा जा सकता है।

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गौरतलब है कि 1931 की जनगणना के अनुसार गुजरात में 41 फीसद ओबीसी थे, अगर इन 41 फीसद ओबीसी को 9.7 फीसद मुसलमान, 7.1 फीसद दलित, तकरीबन 12-14 फीसद पाटीदार और 15 फीसद आदिवासी के कुल समीकरण का 70 फीसद वोट भी अगर कांग्रेस पार्टी की रणनीति के तहत उनके पक्ष में पड़ जाता है तो भारतीय जनता पार्टी के लिए यह राह थोड़ी मुश्किल हो जाएगी, लेकिन “KHAM” के बदले “PODAM” की यह नई रणनीति कांग्रेस के लिए कितनी कारगर साबित होती है यह तो चुनावी नतीजो के बाद ही पता चल सकेगा।

(डॉक्टर मेराज हुसैन एक राजनीतिक चिंतक, विचारक, रणनीतिकार एवं ग्लोबल स्ट्रैटिजी ग्रुप के फाउंडर चेयरमैन हैं। इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार ‘जनता का रिपोर्टर’ के नहीं हैं) 

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