नरोदा पाटिया दंगा: गुजरात हाई कोर्ट ने माया कोडनानी को किया बरी, बाबू बजरंगी की उम्रकैद की सजा बरकरार

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गुजरात हाई कोर्ट ने 2002 के नरोदा पाटिया दंगा मामले में दायर अपीलों पर शु्क्रवार (20 अप्रैल) को बड़ा फैसला दिया है। हाई कोर्ट ने आरोपी बाबू बजरंगी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (मृत तक) की सजा सुनाई है। जिससे अब बाबू बजरंगी को पूरी जिंदगी जेल में ही रहना होगा। वहीं, इस मामले में पूर्व मंत्री माया कोडनानी को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया है।

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बाबू बजरंगी के अलावा इस मामले में हरीश छारा और सुरेश लांगड़ा समेत 31 आरोपियों को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सचा को हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है। वहीं, विक्रम छारा और गणपति छानाजी छारा को निर्दोष करार दिया गया है। कुल 10 में से तीन आरोपियों को ही कोर्ट ने बरी किया। जिसमें पूर्व मंत्री माया कोडनानी भी शामिल हैं।

बता दें कि जस्टिस हर्षा देवानी और जस्टिस ए. एस. सुपेहिया की पीठ ने मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद पिछले साल अगस्त में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। अगस्त 2012 में एसआईटी मामलों के लिए विशेष अदालत ने राज्य की पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता माया कोडनानी समेत 32 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कोडनानी को 28 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी।

वहीं, एक अन्य बहुचर्चित आरोपी बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी को जीवनपर्यन्त आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। 7 अन्य को 21 साल के आजीवन कारावास और शेष अन्य को 14 साल के साधारण आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में 29 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था, जहां दोषियों ने निचली अदालत के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी, वहीं विशेष जांच दल ने 29 लोगों को बरी किए जाने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

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