80-90 फीसदी वस्तुओं पर GST की दरें तय: दूध, अनाज पर नहीं लगेगा टैक्स, तेल-साबुन भी होगा सस्ता

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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने गुरुवार(18 मई) को शुरू अपनी दो दिन की बैठक के पहले दिन 80 से 90 प्रतिशत वस्तुओं और सेवाओं पर कर की दरों का निर्धारण कर लिया है। प्रस्तावित जीएसटी व्यवस्था में चार स्तर की दरें रखी गई हैं। जिनमें रोजमर्रा के इस्तेमाल की आवश्यक वस्तुओं पर पांच प्रतिशत की न्यूनतम रखी गई है।जीएसटी परिषद की श्रीनगर में गुरुवार को हुई बैठक में दूध और अनाज को इसके दायरे में नहीं लाने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही तेल और साबुन की कर दरों में कटौती को मंजूरी दी गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली परिषद ने बैठक के पहले सत्र में नए नियमों को मंजूरी दी।

जीएसटी के तहत बालों के तेल, साबुन, टूथपेस्ट पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा। जबकि अभी इस पर कर की दर 22 से 24 फीसदी है। अनाज पर भी जीएसटी नहीं लगेगा जिसपर अभी पांच फीसदी कर लगता है। इसके अलावा चीनी, चाय, कॉफी, खाद्य तेल पर भी पांच प्रतिशत की दर से कर लगेगा जो मौजूदा कर की दर के करीब है।

जबकि मिठाई पर पांच फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा। नई कर व्यवस्था के तहत कोयला भी सस्ता हो जाएगा। कोयले पर जीएसटी दर पांच फीसदी होगी। इस पर अभी 11.69 प्रतिशत कर लगता है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली परिषद ने बैठक के पहले सत्र में वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था के तहत नियमों को भी मंजूरी दी। बता दें कि जीएसटी एक जुलाई से लागू किए जाने की योजना है।परिषद में सभी राज्यां के वित्त मंत्री या उनके प्रतिनिधि शामिल हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 80 से 90 प्रतिशत वस्तुओं, सेवाओं के बारे में यह तह हो गया है कि उन्हें 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के कर ढांचे में कहां रखा जाएगा। फिटमेंट इस तरीके से किया गया है कि लोगों पर नई कर व्यवस्था के कारण कर का बोझ नहीं बढ़े।

इस लिए वस्तुओं और सेवाओं को उनके उपर इस समय लागू उत्पाद शुल्क, वैट या सेवा कर को ध्यान में रखकर जीएसटी की विभिन्न दरों के साथ जोड़ा जा रहा है। समझा जाता है कि कल बैठक संपन्न होने के बाद तय कर दरों का पूरा ब्योरा उपलब्ध हो पाएगा।

विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्रियों ने रेशमी धागे, पूजा की सामग्री और हस्तशिल्प उत्पादों को जीएसटी दरों में छूट की मांग की है। हालांकि, जेटली का मानना है कि जीएसटी के तहत न्यूनतम छूट दी जानी चाहिए और यह आवश्यक होने पर ही दी जानी चाहिए।

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