स्मृति ईरानी के मंत्रालय के आधीन कम्पनी में बनाया गया था रयान इंटरनेशनल स्कूल की मालकिन ग्रेस पिंटो को डायरेक्टर

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ग्रेस पिंटो और उनके पति ऑगस्टीन फ्रांसिस पिंटो करोड़ों रुपये कीमनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामाना कर रहे है बावजूद इसके वह एक सरकारी कंपनी में निदेशालय के पद पर रहे।

स्मृति ईरानी

मोदी सरकार का विवादों से हमेशा कोई न कोई नाता बना रहता है। हालिया मामले में (SEBI) सेबी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों के बावजूद, रयान इंटरनेशनल स्कूल के मालिक ग्रेस पिंटो को सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी में स्वतंत्र निदेशक के रूप में सेवा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बाध्य किया गया था।

आपको बता दे कि भाजपा के वरिष्ठ नेता के करीबी पिंटो को कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCI) बोर्ड में निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था।

सरकार के स्वामित्व वाली कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCI), स्मृति ईरानी की अध्यक्षता में केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के अधीन आता है, जो अब सूचना और प्रसारण मंत्रालय भी देखती है। स्मृति ईरानी की निगरानी में ही ग्रेस पिंटो को सरकारी कम्पनी में बतौर स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया था।

इस मामले में सूत्रों ने बताया कि ग्रेस पिंटो, जिसका नाम प्रद्युम्न हत्याकांड में 7 वर्षीय मासूम छात्र की भयावह हत्या में तथ्यों को दबाने, मिटाने और केस को रफा-दफा करने के मामले में मीडिया की सुर्खियों में छाया था को 2 फरवरी 2017 को (CCI) के स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था।

इन तथ्यों से यह स्पष्ट हो जाता है कि वरिष्ठ भाजपा नेता की निकटता ने उन्हें वस्त्र उद्योग की सबसे प्रतिष्ठित कंपनी में निदेशक मंडल का दर्जा मिला। कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के दस्तावेजों से पता चलता है कि पिंटो को स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था, जबकि मंत्रालय ने जितेंद्र कुमार और सुब्रत गुप्ता के नामों को निदेशक के रूप में नामित किया था।

इसके अलावा ये तथ्य भी उजागर है कि एक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी में निदेशालय के पद पर तैनाती के बावजूद उन्हें (SEBI) सेबी जांच से गुजरना पड़ा, आरोप है कि ऑगस्टीन पिंटो, जो रयान इंटरनेशनल स्कूल के मालिक पर निवेश में धांधली, अप्रत्याशित लाभ और संदिग्ध कंपनी में जो अवैध रूप से शेयर बाजार की कीमतों में हेरफेर के लिए मुख्य रूप से दोषी पाई गई।

‘इंडिया टुडे’ की वेबसाइट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के दस्तावेजों में पता चलता है कि ग्रेस और उनके पति पिंटो के अलावा कुछ अन्य निवेशक भी इसमें शामिल थे, जिन्होंने मुंबई की एक फाइनेंस कंपनी कमलक्षी लिमिटेड का इस्तेमाल 32 करोड़ रुपये की हेरफेर करने में किया था।

बाद में उसी कंपनी को सेबी द्वारा कीमतों में हेर-फेर करने के मामले में दोषी पाए जाने पर स्टॉक मार्केट में कारोबार किए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके अलावा 18 हजार करोड़ रुपए की टैक्स चोरी के मामले में सेबी ने अंतरिम आदेश जारी किया था जिसमें ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक 137 नामों वाले उस आदेश में ग्रेस पिंटो और उनके पति ऑगस्टीन फ्रांसिस पिंटो का नाम भी शामिल था।

जिस समय नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की कमान संभाली तब पिंटो ने केवल 50 लाख का निवेश कर 32 करोड़ रुपये से अधिक लाभ उठाया। जब मीडिया ने इस मुद्दे पर वस्त्र मंत्रालय और पिंटो से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की तो दोनों की ही तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

 

 

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