VIDEO: प्राइवेट अस्पताल ने उड़ाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की धज्जियां, तड़पता रहा मरीज डॉक्टर्स करते रहें पैसों की डिमांड

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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि अगर कोई व्यक्ति किसी अंजान व्यक्ति को नाजुक हालत में अस्पताल में पहुचाता है तो डॉक्टर्स की जिम्मेदारी है कि मरीज को तत्काल फ‌र्स्ट एड मुहैया कराए, चाहे वो सरकारी हो या प्राइवेट अस्पताल।  वहीं जो व्यक्ति मरीज को लेकर हॉस्पिटल पहुंच रहा है, उसे न तो अस्पताल एडमिनिस्ट्रेशन परेशान कर सकता है और न ही पुलिस। अस्पताल प्रशासन को तुरंत हर हाल में मरीज का इलाज करना पड़ेगा।

एस के नागर शख्स ने अपने फेसबुक पोस्ट पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वो बता रहें है कि, ग्रेटर नोएडा में बीच रोड पर उन्हें 2 युवक एक्सीडेंट में घायल मिले थे जिनके शरीर से खून निकल रहा था और उन्होंने बिना देरी करते हुए घायल युवकों को नजदीकी अस्पताल (शारदा हॉस्पिटल) में लेकर गए जहां पर अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने घायलों का इलाज करने से इंकार कर दिया इतना ही नहीं अस्पताल स्टाफ ने उनसे बुरी तरह भड़क गए और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए बदतमीजी करनी शुरू कर दी।

एस के नागर अस्पताल में मौजूद डॉक्टर्स से सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स के बारे में भी बताया लेकिन उसका असर उन डॉक्टरों पर नही पड़ रहा था। जिसका उन्होंने पूरा वाक्या अपने स्मार्ट फोन में कैद कर लिया और 100 नंबर पर कॉल करके पुलिस बुला ली और उनके खिलाफ शिकायत दी, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी शिकायत को वापस ले लिया।

बता दें कि, एस के नागर के इस बात से सोशल मीडिया यूजर्स उनकी काफी तारीफ कर रहें है और उनके इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर भी कर रहे है। लेकिन इस बात से ये तो साफ होती है कि, कोई भी अस्पताल प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को कितना मानते है इसकी पोल खुलती नज़र आ रही है।

आप भी देखिए एस के नागर ने अपने पोस्ट में कैसे अपनी बात को बयां किया:

कल रात करीब 8 बजे की घटना है, में अपने ऑफिस अल्फा 1 ग्रेटर नोएडा से घर की तरफ निकाला था रास्ते मे डेल्टा 2 के पास अचानक भीड़ देखकर मेने गाड़ी रोक दी । बीच रोड पर 2 युवक एक्सीडेंट में घायल पड़े थे जिनमें एक बेहोश था और मुंह से खून निकल रहा था। ज्यादा समय ना लेते हुए मैंने वहाँ खड़े राहगीरों की मदद लेकर उन्हें अपनी गाड़ी में लिटाया ओर तेजी से हॉस्पिटल की तरफ गाड़ी घुमा दी।

एक युवक की गंभीर हालत को देखते हुए मैंने शारदा हॉस्पिटल जोकि काफी बड़ी हॉस्पिटल है में जाना उचित समझा! शारदा में इमरजेंसी की तरफ ले जाकर उन्हें माइनर OT में लेकर पहुँचा ओर उपस्थित स्टाफ को सारा वाकया बताया । साथ ही बताया कि अभी इनके घर पर काल कर दी है और वो लोग भी आते ही होंगे। आप इलाज शुरू कीजिए। लेकिन हॉस्पिटल स्टाफ पर ना सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स का कोई असर था और ना ही बात करने की तमीज । यदि किसी दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति के साथ उसका परिजन ना हो तो उसके साथ ये किस तरह का व्यवहार करते है ये देखा। उन्होंने मुझे तुरंत बिल डिपार्टमेंट जाकर एडवांस बिल जमा कराने को बोला।

फोटो एस के नागर के फेसबुक पोस्ट से

मैंने उन्हें माननीय सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स का हवाला देते हुए उनका ट्रीटमेंट जारी रखने को बोला और इनके परिजनों के आने तक इंतजाम करने को बोला। ये सुनकर अस्पताल का स्टाफ बुरी तरह भड़क गया ओर बदतमीजी पर उतारू हो गया। साथ ही इलाज करने से साफ मना कर दिया । उस कर्मचारी ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए बदतमीजी करनी शुरू कर दी जिस पर मैंने उनकी वीडियो बनानी शुरू कर दी।

इस पूरी घटना में एक डॉक्टर भी उसके साथ शामिल था जिसने वीडियो में भी बोला है कि जो करना है कर सकते हो। साथ ही बाउंसर्स व सिक्योरिटी गार्ड बुलाकर मुझे बाहर निकालने लगे। वहां में अकेले था और हॉस्पिटल का स्टाफ एवं गार्ड कम से कम 30-40 ! मैंने मामला बढ़ता देख 100 नंबर पर कॉल करके पुलिस बुला ली और उनके खिलाफ शिकायत दी। तब तक करीब 100-150 लोगो की भीड़ वहाँ हो चुकी थी। पुलिस ने थाने में उनके खिलाफ शिकायत लिखाने को बोला । थोड़ी देर में ही डाक्टर 2 अन्य के साथ थाने में था।

अब डाक्टर साहब को पसीने आ रहे थे और जुबान कॉप रही थी । थोड़ी देर पहले हॉस्पिटल में इलाज से मना करता डॉक्टर और असभ्य तरीके से बात करता डॉक्टर अब गिड़गिड़ाने लगा था। हाथ जोड़कर बार बार माफी की गुहार लगा रहा था। सवाल उठता है कि ये अस्पताल माननीय सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स को कितना मानते होंगे ? कितने लोग इनके दुर्व्यवहार को देखकर फिर किसी अनजान दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को अस्पताल पहुचाने की जहमत उठाएंगे ? कितने मरीज इस तरह इलाज के अभाव में मर जाते होंगे ?

दोनों घायल युवक किसी AC रिपेयरिंग की दुकान पर नौकरी करते थे और घर से दूर रहते है । उनके घरवालो को भी आने में कम से कम 5-6 घंटे जरूर लगते। तो क्या उनका इलाज का हक नही बनता ?? वो भी ऐसे शहर में जहां की अथॉरिटी ने इन बडे बडे हॉस्पिटल्स को सस्ती दरों पर जमीन इसी शर्त पर दी है कि गरीबो के इलाज में ये कोताही नही बरतेंगे। थाने में डाक्टर के काफी गिड़गिड़ाने के बाद ओर माफी मांगने के बाद मैंने शिकायत वापिस ले ली है लेकिन ये कितना सुधरेंगे ये वक्त ही बतायेगा। ऐसा मामला मेरे साथ पहली बार नही है , और शायद आखिरी बार भी नही !!

एस के नागर द्वारा फेसबुक पर पोस्ट की गई वीडियो:

https://www.facebook.com/nagarsunil/videos/1374683602614305/

 

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