जो पुलिस नहीं कह रही, वो राम नाईक जी कैसे कह सकते है: जनता का रिपोर्टर पर गोविन्दा का पक्ष

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उ. प्र. के राज्यपाल राम नाइक ने जो आरोप गोविन्दा पर लगाए है उनके जवाब में गोविन्दा ने विस्तारपूर्वक पक्ष जनता का रिपोर्टर पर रखा। उन्होंने कहा कि मुझे शक है कि ऐसा होना किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं, देश की व्यवस्था ने मेरे बारे में ऐसा नहीं कहा तो फिर राम नाइक ये बात कैसे कह सकते है। अगर मुझे किसी बड़े आदमी का ऐसा सर्पोट होता तो फिर पिछले 10 सालों से मेरा करियर बंद क्यों है।

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राम नाइक के आरोपों का खंडन करते हुए मशहूर अभिनेता गोविन्दा ने विस्तार से जनता का रिपोर्टर पर अपना पक्ष रखा, उन्होंने कहा कि पिछले 30 साल का मेरा करियर है, मैंने बहुत ही हार्डवर्क करने के बाद ये मुकाम बनाया है। मेरे माता-पिता का आशीर्वाद, और अपने चाहने वालों की कृपा से गोविन्दा बना हूं। जब आपको इतना नेम और फेम मिलता है, तो बहुत तरह के लोग आपको मिलते है। अब हर जगह तो आपका कंट्रोल नहीं होता। ऐसे लोग आ जाते है और अपना प्रेम व्यक्त करते है, और मिलकर निकल जाते है।

ऐसे मैं वो किसी फंक्शन या प्रोग्राम के साक्षी हो जाते है। इसका मतलब ये नहीं कि आपका किसी से सम्बध है। आदरणीय राम नाईक जी वरिष्ठ नेता है, बहुत बड़ा उनका रूतबा है, ऐसे मंे वो अगर गोविन्दा जैसे एक्टर के लिये ये बयान देते है कि गोविन्दा अंडरवर्ड के सर्पोट से कामयाब हुआ तो ये उनके स्टेटस को शोभा नहीं देता। उनका क्या कहना है कि उत्तर मुम्बई की जो जनता है वो अंडरवर्ड के हाथों बिकी हुई है, तो 25 साल से उन्होंने कैसे राज किया। तब वो कैसे दबाव में नहीं आए। तब कोई अंडरवर्ड कैसे नहीं था। राजनीति मेरे लिये कोई सुखद अनुभव नहीं रहा, मुझे उसका अभ्यास भी नहीं था, और अब मैं राजनीति में हूं भी नहीं।

राम नाईक जी का प्रतिदद्वीं भी नहीं हूं, तो ऐसे में इतना परस्पर विरोध किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं है इसकी मुझे ज्यादा चिंता हो रही है। मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी से ये विनती करता हूं कि इस तरह की बयानबाजी में कोई घात-पात तो नहीं है इसका ख्याल किया जाए। क्योंकि जो बात देश की व्यवस्था नहीं कह रही, जो पुलिस नहीं कह रही, वो राम नाईक जी कैसे कह रहे है। वो अपनी हार को इतना ज्यादा दुखद कैसे ले सकते है, कि एक व्यक्ति की जीत का श्रेय वो अंडरवर्ड को दे दें। मुझे बेहद खेद है कि वो इस स्तर पर आए कि ऐसा विरोध कर रहे है। और ये राजनीति में शोभा नहीं देता।

अब जब मैं फिल्म लाइन में भी टाॅप पर नहीं हूं और राजनीति में भी नहीं हूं। अगर मुझे किसी बड़े आदमी का सर्पोट होता तो फिर मेरा पिछले 10 सालों से करियर बंद कैसे? कैसे गोविन्दा की फिल्म को फाइनेंस नहीं होता। कैसे गोविन्दा की फिल्म को थियेटर नहीं मिलते। ऐसा तब होता है तब ये सब किसी साजिश के  तहत किया जाता है। मुझे इस बात का खेद नहीं है कि मुझे पदमश्री या पदमभूषण नहीं मिला लेकिन कम से कम तोहमत ना लगाएं।

भले ही गोविन्दा को सिनेमा के क्षेत्र में इतना काम करने पर भी सरकार पदमश्री के लायक नहीं समझती और उनसे जुनियर लोगों को इस सम्मान से नवाज दिया जाता है ऐसे में उन्हें इस बात का मलाल नहीं है लेकिन अपने ऊपर उठे आरोपों को किसी अनजानी साजिश का हिस्सा मानते है।  भले ही राम नाइक जी कथित तौर पर अपनी किताब को प्रमोट करने के लिये ऐसा बयान दे देते हो लेकिन इस बात से ये प्रश्न जरूर उठता है कि जब उनके पास ऐसी कोई जानकारी है तो देश की व्यवस्था को गोविन्दा पर ऊंगली उठानी चाहिए थी।

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