लॉकडाउन के दौरान लोगों के घायल होने, जान गंवाने को लेकर कोई केंद्रीय आंकड़े नहीं हैं: सरकार

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केंद्र सरकार ने बुधवार (16 सितंबर) को कहा कि कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान लोगों के घायल होने या जान गंवाने को लेकर कोई आंकड़े उसके पास नहीं हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। यह प्रश्न कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पूछा था।

लॉकडाउन

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने बताया कि, ‘‘केंद्र सरकार के पास लॉकडाउन के दौरान प्रताड़ना, घायल होने या लोगों की मौत होने के संबंध में दर्ज प्राथमिकी, मामले या शिकायतों के आंकड़े नहीं हैं।’’ मंत्री ने यह भी कहा कि पुलिस और कानून व्यवस्था भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार राज्य का विषय है अत: कार्रवाई संबद्ध राज्य सरकारों द्वारा की गई।

खड़गे ने पूछा था कि क्या कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान पुलिस के कठोर कदमों के कारण प्रताड़ना, घायल होने या जान जाने के कोई आंकड़े सरकार के पास हैं।

बता दें कि, कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की मौत से जुड़ा आंकड़ा सरकार के पास नहीं होने को लेकर मंगलवार को कटाक्ष करते हुए कहा था कि श्रमिकों की मौत होना सभी ने देखा, लेकिन सरकार को इसकी खबर नहीं हुई।

राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा था, ‘‘मोदी सरकार नहीं जानती कि लॉकडाउन में कितने प्रवासी मजदूर मरे और कितनी नौकरियां गयीं।’’ कांग्रेस नेता ने शायराना अंदाज में तंज किया, ‘‘तुमने ना गिना तो क्या मौत ना हुई? हां मगर दुख है सरकार पे असर ना हुआ, उनका मरना देखा ज़माने ने, एक मोदी सरकार है जिसे खबर ना हुई।’’

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