BJP में कांग्रेस के 10 विधायक शामिल होने के बाद गोवा में आज होगा मंत्रिमंडल का विस्तार, गोवा फॉरवर्ड पार्टी के मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी

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गोवा में कांग्रेस के 10 विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के कुछ दिन बाद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत आज (शनिवार) अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल करेंगे। मंत्रिमंडल में फेरबदल के लिए सहयोगी दल गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) के तीन सदस्यों और एक निर्दलीय सदस्य को मंत्री पद से हटाया जाएगा। नए मंत्रियों का शपथग्रहण अपराह्न तीन बजे होने की संभावना है। वर्तमान में सावंत मंत्रिमंडल में गोवा फॉरवर्ड पार्टी के तीन और दो निर्दलीय विधायक हैं।

कांग्रेस के 10 विधायक बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए थे और इसके साथ ही 40 सदस्यीय सदन में भाजपा विधायकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उनके समर्थन के बाद सावंत ने जीएफपी के मंत्रियों को हटाने का फैसला किया। क्षेत्रीय पार्टी जीएफपी ने साल 2017 में मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व वाली सरकार के गठन में अहम भूमिका निभाई थी।

पीटीआई के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने जीएफपी के तीन विधायकों और एक निर्दलीय विधायक रोहन खुंटे से अपने-अपने मंत्री पदों से इस्तीफा देने को कहा है। बुधवार को भाजपा में शामिल होने वाले चंद्रकांत कावलेकर, फिलिप नेरी रोड्रिग्ज, एतानासियो मोन्सेराते तथा विधानसभा उपाध्यक्ष माइकल लोबो दोपहर बाद राजभवन में शपथ लेंगे।

सावंत ने बताया कि चार मौजूदा मंत्रियों-उपमुख्यमंत्री विजय सरदेसाई, जल संसाधन मंत्री विनोद पालेकर, ग्रामीण विकास मंत्री जयेश सालगांवकर (सभी जीएफपी विधायक) और राजस्व मंत्री रोहन खुंटे (निर्दलीय) को मंत्रिमंडल से हटाया जाएगा। तीन महीने पहले मुख्यमंत्री बनने के बाद से यह सावंत द्वारा मंत्रिमंडल में दूसरा फेरबदल है। पहले मंत्रिमंडल फेरबदल में सावंत ने एमजीपी से अलग हुए विधायक दीपक पुष्कर को मंत्री बनाया था। उस समय उपमुख्यमंत्री सुदिन धवलिकर को हटाया गया था।

सावंत ने बताया कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर यह फैसला लिया गया है। जीएफपी अध्यक्ष एवं उपमुख्यमंत्री विजय सरदेसाई ने कहा था कि वे मैत्रीपूर्ण समाधान से इस संकट के हल की उम्मीद कर रहे हैं। सरदेसाई ने कहा था, ‘‘गोवा फॉरवर्ड पार्टी राजग का हिस्सा है और भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व से बातचीत के बाद वह भाजपा नीत सरकार में शामिल हुई थी।’’

गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने किया ट्वीट

वहीं, मुख्‍यमंत्री सावंत की इस मांग पर गोवा फॉरवर्ड पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से दो ने ट्वीट किया गया है। पहले ट्वीट में लिखा है, ‘हम एनडीए का हिस्‍सा है और भारतीय जनता पार्टी के राष्‍ट्रीय नेताओं से बातचीत के बाद ही भाजपा की अगुआई वाली राज्‍य सरकार का हिस्‍सा बने हैं। राज्‍य के मौजूदा भाजपा नेता उस समय हुई बातचीत का हिस्‍सा नहीं थे।’

दूसरी ट्वीट में लिखा है, ‘जैसा कि हम केंद्र के एनडीए नेतृत्‍व से बातचीत के बाद ही जरूरी कदम उठाएंगे। हमें भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेृतृत्‍व से अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। इसके विपरीत, हमें ऐसे संकेत मिले हैं कि यह मसला आपसी सहमति से सुलझा लिया जाएगा।”

भाजपा के हाथों 13 विधायक गंवा चुकी है कांग्रेस

गोवा में कभी ताकतवर राजनीतिक हैसियत रखने वाली कांग्रेस अब अपना वजूद बचाने की लड़ाई लड़ रही है। जिस पार्टी ने साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक 17 सीटों पर कब्जा जमाया था, वहां आज उसके दरक रहे किले को बचाने का जिम्मा महज पांच विधायकों के कंधों पर आ गया है। गत बुधवार को इस मुख्य विपक्षी दल के दस विधायक पाला बदल कर भारतीय जनता पार्टी के खेमे में पहुंच गये थे। इसमें विपक्ष के नेता चंद्रकांत कावलेकर का नाम भी शामिल है। बीते दो ढाई सालों में कांग्रेस भाजपा के हाथों 13 विधायक गंवा चुकी है। वे अब सदन में भाजपा के भारी बहुमत का परचम लहरा रहे हैं।

सियासी बयार की वजह से अक्सर सुर्खियों में रहने वाले गोवा की विधानसभा में 40 सीटें हैं और यहां का इतिहास के पन्ने पलटे तो पता चलता है कि विधायक प्राय: अपना रंग बदल लेते हैं और सरकार बनाने गिराने का खेल शुरू हो जाता है। साल 2017 में कांग्रेस 17 सीटों के साथ सबसे पार्टी के रूप में उभरी और तब भगवा पार्टी के पास महज 13 विधायक थे, लेकिन इसके बाद भी वे सरकार बनाने में इसलिए सफल रहे क्योंकि उन्हें तब क्षेत्रीय दलों के और निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिल गया था।

पर्रिवार ने शुरू ‘कांग्रेस मुक्त गोवा’ का अभियान

कांग्रेसी खेमे का दरख्त दरकने का सिलसिला वालोपी विधायक विश्वजीत राणे से शुरू हुआ। उन्होंने मार्च 2017 में निर्वाचन के तुरंत बाद कांग्रेस छोड़ी और अप्रैल में भाजपा में चले गए। महज पांच दिन बाद तब के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने उन्हें कैबिनेट में शामिल कर लिया। कांग्रेस 17 से घटकर 16 पर आ गई। राणे ने उपचुनाव जीत कर दर्ज मतदाताओं का भरोसा भी हासिल कर लिया।

कांग्रेस को दूसरा झटका अक्टूबर 2018 में तब लगा जब उसके दो विधायक सुभाष शिरोडकर और दयानंद सोप्ते भाजपा में चले गए। कांग्रेस का स्कोर एक फिर घटकर 14 पर पहुंच गया। भाजपा के लिए समस्या तब हुई जब पर्रिकर और एक अन्य विधायक फ्रांसिस डिसूजा का निधन हो गया। इससे भाजपा के विधायकों की संख्या दर्जन भर रह गई। इन चार खाली हुई सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस को एक तो भाजपा को तीन सीटों पर सफलता मिली।

बुधवार को हुए घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के दस विधायकों ने अपनी निष्ठा बदल ली नतीजतन कांग्रेस के पास केवल पांच विधायक ही रह गए। इन पांच में से चार विधायक ऐसे हैं जो पहले राज्य की सत्ता की बतौर मुख्यमंत्री संभाल चुके हैं।कांग्रेस की किलेबंदी की कमान अब प्रतापसिंह राणे, लुजिइन्हो फेलोरियो, रवि नायक, दिगम्बर कामत (सभी पूर्व मुख्यमंत्री) और एलेक्सिओ रेजीनाल्डो लोरेंको के पास ही है। (इनपुट- भाषा के साथ)

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