विकास दर पर पड़ा नोटबंदी और GST का असर, तीन साल में सबसे कम रही GDP

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नोटबंदी और जीएसटी का असर नए वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देखने को मिला है। चालू वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में आर्थिक विकास दर में बड़ी गिरावट हुई है और यह तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।अप्रैल से जून की तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद, जीडीपी की विकास दर महज 5.7 फीसदी रही है, जीडीपी की रिपोर्ट आने का बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस पर चिंता जताई है।

विकास दर

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार के मुख्य सांख्यिकीविद् टीसीए अनंत ने गुरुवार(31 अगस्त) को कहा कि जीएसटी की वजह से देश में विनिर्माण विकास घट गया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग ग्रोथ पिछले साल की पहली तिमाही के मुकाबले 10.7 फीसदी से घटकर 1.2 फीसदी रह गई।

देश के मुख्य सांख्यिकीविद टी.सी.ए. अनंत ने गुरुवार को कहा कि वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की विकास दर कम होकर 5.7 फीसदी पर आने का प्रमुख कारण कंपनियों द्वारा 1 जुलाई को जीएसटी(वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने के पहले अपने स्टॉक को सावधानी बरतते हुए खाली करना रहा।

अनंत ने यहां पहली तिमाही के नतीजे जारी करने के बाद संवाददाताओं से कहा, जिस प्रमुख क्षेत्र में तेज गिरावट दर्ज की गई वह उद्योग है। कॉरपोरेट निकाय पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में अपने स्टॉक खाली करने में जुटी रही, जिसका प्रमुख कारण जीएसटी लागू होने के कारण पड़ने वाला असर रहा।

अनंत का कहना है कि, दूसरी तिमाही से जीडीपी में वापस तेजी लौटने की उम्मीद है और जीएसटी लागू हो जाने के बाद सबकुछ सामान्य हो गया है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय(सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी 5.7 फीसदी की विकास दर के साथ 31.10 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016-17 की अंतिम तिमाही के दौरान जीडीपी की दर 6.1 फीसदी रही थी।

वर्ष 2016-17 में पूरे साल के दौरान विकास दर 7.1 फीसदी रही थी। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर घट कर 5.7 फीसदी पर आ गई, जो इसी अवधि में चीन की 6.9 फीसदी विकास दर की तुलना में बहुत कम है। पिछले कुछ समय से भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था था लेकिन अब यह चीन से पिछड़ गया है।

गौरतलब है कि, नोटबंदी के बाद पहली बार विकास दर में इतनी भारी गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि नोटबंदी और वस्तु व सेवा कर, जीएसटी की वजह से बड़ी गिरावट हुई है। जीएसटी लागू होने की वजह से कंपनियों के उत्पादन में कमी आई है और इससे विनिर्माण गतिविधियों में शिथिलता आईस जिसके कारण विकास दर कम रही।

विशेषज्ञों की माने तों पिछले साल 8 नवंबर को घोषित नोटबंदी के बाद से अर्थव्यवस्था को लगातार झटके लग रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक अगले कुछ तिमाहियों तक बेहतर प्रदर्शन करने के बाद ही भारत फिर से चीन से आगे निकल सकेगा।

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