गौरक्षक ने PM मोदी को बताया ढोंगी, कहा- ‘गाय तस्करी के लिए ममता बनर्जी को दोष देना बंद करें’

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27 अक्टूबर को कोलकाता में ‘जनता का कॉन्क्लेव इन सोशल जस्टिस’ में तमाम युवा नेताओं ने भाग लेकर इसे सफल बनाया। राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तरफ से गर्ग चटर्जी, सीपीआई-एम के शतरूप घोष, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की तरफ से रितेश तिवारी, वहीं आशू मोंगिया ने गौरक्षों का प्रतिनिधित्व किया। गौमांस, धर्म-जाति के नाम पर भीड़ द्वारा देश भर में अलग-अलग जगहों पर की जा रही हत्याओं पर बोलते हुए गौरक्षक आशू मोंगिया ने बीजेपी की उन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने (बीजेपी) गाय तस्करी को रोकने के लिए अभी तक कुछ भी नहीं किया है। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तथाकथित गुलाबी क्रांति को रोकने के बारे में बात की थी। साथ ही उन्होंने कहा कि गाय तस्करी के लिए सीएम ममता बनर्जी को दोष देना बंद किया जाना चाहिए।

‘जनता का रिपोर्टर’ के एडिटर-इन-चीफ रिफत जावेद के सवालों पर मोंगिया ने कहा कि गाय तस्करी में शामिल सभी लोग मुसलमान नहीं हैं थे, हिंदू भी हैं। उन्होंने कहा कि मेरे संगठन में काम करने वालों अधिकांश मुस्लिम हैं, जो गौहत्या रोकने का काम करते हैं। मोंगिया कथित गौरक्षकों को चेतावनी देते हुए कहा कि गाय के नाम पर भीड़ द्वारा की जा रही हत्याएं बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी के पास यह अधिकारी नहीं कि वह अफवाह के आधार पर किसी की भी हत्या कर दे।

मोंगिया ने कहा कि, “मोदी जी गायों पर दोहरे स्तर की राजनीति करते हैं। 2014 में उन्होंने गुलाबी क्रांति के बारे में बात की थी, लेकिन अब वह बांग्लादेश में हो रहे गाय तस्करी पर चुप है। उन्होंने दावा किया कि मैंने व्यक्तिगत रूप से दो साल में दो बार गृह मंत्री राजनाथ सिंह जी को पत्र लिखा है, लेकिन उन्हें जवाब देने का समय नहीं है। गौरक्षक मोंगिया ने कटाक्ष करते हुए कहा कि गाय यूपी में बीजेपी की मां है, लेकिन अरुणाचल प्रदेश और गोवा में यह एक चाची बन जाती है। यह ढोंग है।”

(देखें वीडियो)

…जब भावुक हो गए रिफत जावेद

कोलकाता में हुए इस कॉन्क्लेव के दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में पदार्पण और उसके बाद के संघर्ष के बारे में 27 अक्टूबर को कोलकाता में ‘जनता का कॉन्क्लेव’ में बोलते हुए ‘जनता का रिपोर्टर’ के एडिटर-इन-चीफ रिफत जावेद सार्वजनिक रूप से भावुक हो गए।

दरअसल, इस दौरान रिफत अपने अपने गुरु और स्टेटमैन के पूर्व संपादक माइकल फ्लैनेरी के पत्रकारिता में योगदान के लिए सम्मानित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने दिल खोल कर बातें कीं। रिफत ने उस पल को याद किया जब माइकल ने एक पत्रकार के रूप में उनकी क्षमता पर विश्वास किया और उन्हें पहला ब्रेक दिया।

‘जनता का कॉन्क्लेव’ में मौजूद सैकड़ों लोगों के बीच रिफत ने अपने पत्रकारिता सफर में गुरु माइकल के योगदान के बारे में जिक्र करते हुए भावुक हो गए। इस दौरान सम्मेलन के मौजूद मुख्य अतिथि तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल के नेता और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन भी अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए।

डेरेक ने कहा कि रिफत ने आज ‘गुरु-शिष्य’ की परंपरा को अविश्वसनीय रूप से नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि आज जो कुछ मैंने देखा वो आपकी भावना थी। टीएमसी सांसद ने कहा कि मैं आज बहुत खुश हूं कि दुनिया में आपके जैसे कुछ लोग अभी भी मौजूद हैं, जो अपने गुरू को इतना सम्मान देते हैं।

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