लाभ के पद का मामलाः अयोग्य करार दिए जाने के खिलाफ AAP के चार और विधायकों ने खटखटाया अदालत का दरवाजा, हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को जारी किया नोटिस

0

आम आदमी पार्टी (आप) के चार और विधायकों ने लाभ के पद के मामले में दिल्ली विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य करार दिये जाने के खिलाफ बुधवार (7 फरवरी) दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी याचिकाएं सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर के समक्ष आई, जिन्होंने इन याचिकाओं पर निर्वाचन आयोग का जवाब मांगते हुए उसे नोटिस जारी किया।Aam Aadmi Partyसमाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, आयोग की ओर से पेश हुए वकील अमित शर्मा ने अदालत को सूचित किया कि आयोग नया जवाब दायर नहीं करेगा और आम आदमी पार्टी के अन्य आठ विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने के खिलाफ दाखिल उनकी याचिका पर दायर किए गए शपथपत्र को फिर से पारित करेगा।

चार AAP विधायकों के वकील ने तर्क दिया कि वे भी चुनाव पैनल के शपथ पत्र के जवाब में आठ अन्य विधायकों में से एक की ओर से दायर प्रत्युत्तर ही स्वीकार करेंगे। पीठ ने इस पर ध्यान देते हुए कहा कि नरेश यादव, आदर्श शास्त्री, संजीव झा और राजेश गुप्ता की याचिकाओं की सुनवाई अब आठ अन्य आप विधायकों की याचिका के साथ की जाएगी जिस पर आज सुनवाई होनी है।

निर्वाचन आयोग ने पिछले सप्ताह दायर अपने जवाब में अदालत से कहा था कि याचिकाएं विचार करने योग्य नहीं है और इन्हें खारिज किया जाना चाहिए। उसने कहा था कि AAP विधायकों ने चुनाव आयोग की सिफारिशों को चुनौती दी है लेकिन इसकी अब कोई अहमियत नहीं है, क्योंकि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इन सिफारिशों पर अपना फैसला कर चुके हैं।आयोग के शपथपत्र के जवाब में आठ विधायकों ने कहा कि आयोग एक अर्द्ध न्यायिक प्राधिकारी की तरह नहीं, बल्कि एक निजी वादी तरह व्यवहार कर रहा है।

20 विधायकों की सदस्यता रद्द

आपको बता दें कि दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है। लाभ के पद मामले में पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द हो गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 21 जनवरी को चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूरी दे दी। चुनाव आयोग ने 19 जनवरी को लाभ के पद मामले में इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए राष्ट्रपति से सिफारिश की थी। ये सभी विधायक 13 मार्च, 2015 से 8 सितंबर, 2016 तक संसदीय सचिव पद पर थे, जिसे ‘लाभ का पद’ माना गया है।

विधि मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में राष्ट्रपति के हवाले से कहा गया था कि चुनाव आयोग की सिफारिश पर दिल्ली विधानसभा के 20 सदस्यों को अयोग्य करार दिया गया है। अधिसूचना में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग द्वारा व्यक्त की गई राय के आलोक में, मैं, रामनाथ कोविंद, भारत का राष्ट्रपति, अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उक्त 20 सदस्यों को दिल्ली विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य ठहराता हूं। हालांकि, इस फैसले से केजरीवाल सरकार पर खतरा नहीं हैं।

गौरतलब है कि इसी महीने 14 फरवरी को आम आदमी पार्टी सरकार के तीन वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसे में यह दिल्ली की केजरीवाल सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। 20 विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में आप पार्टी के विधायकों की संख्या 66 से घटकर सीधे 46 पर आ गई है। अब 20 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने होंगे।

Rifat Jawaid on Office of Profit controversy

Posted by Janta Ka Reporter on Saturday, 20 January 2018

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, आम आदमी पार्टी ने 13 मार्च 2015 को अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया था। इसको लाभ का पद बताते हुए एक वकील प्रशांत पटेल द्वारा राष्ट्रपति से शिकायत की गई थी। इसमें इनकी सदस्यता को रद्द करने की मांग की गई थी। 19 जून को वकील प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति के पास इन सचिवों की सदस्यता रद्द करने के लिए आवेदन किया था।

जिसके बाद राष्ट्रपति ने शिकायत चुनाव आयोग भेज दी थी। राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग से मामले की जांच का निर्देश दिया था। चुनाव आयोग ने आप के 21 विधायकों को ‘लाभ का पद’ मामले में कारण बताओ नोटिस दिया था। इस मामले में पहले 21 विधायकों की संख्या थी। हालांकि विधायक जनरैल सिंह के पिछले साल विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद इस मामले में फंसे विधायकों की संख्या 20 रह गई थी।

दिल्ली सरकार ने दिल्ली असेंबली रिमूवल ऑफ डिस्क्वॉलिफिकेशन ऐक्ट-1997 में संशोधन किया था। इस विधेयक का मकसद संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से छूट दिलाना था, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नामंजूर कर दिया था। इसके बाद से इन सभी 21 विधायकों की सदस्यता पर और सवाल खड़े हो गए थे। आप के विधायक 13 मार्च 2015 से 8 सितंबर 2016 तक संसदीय सचिव के पद पर थे।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here