गुड़गांव: फोर्टिस अस्‍पताल की बढ़ी मुश्किले, ब्लड बैंक और फार्मेसी के लाइसेंस रद्द

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सात साल की बच्ची की डेंगू से मौत व इलाज के लिए 16 लाख रुपये से ज्यादा का बिल थमाने के मामले में गुरुग्राम स्थित फोर्टिस अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को शिकंजा कस अस्पताल के ब्लड बैंक और आइपीडी फार्मेसी के लाइसेंस को रद्द कर दिया गया है। हरियाणा के खाद्य व औषधि प्रशासन विभाग की तरफ से इस बाबत शनिवार को आदेश जारी हो गए।

फोर्टिस अस्‍पताल

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विभाग ने यह कार्रवाई अस्पताल की तरफ से कारण बताओ नोटिस पर मिले जवाब का अध्ययन करने के बाद की है। हरियाणा के स्टेट ड्रग कंट्रोलर नरेंद्र आहूजा विवेक ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह निलंबन तब तक जारी रहेगा जब तक की फोर्टिस अस्पताल जांच के दौरान पाई गई खामियों को दूर नहीं कर लेता और उन खामियों को दूर करने की पुष्टि विभाग द्वारा नहीं कर दी जाती है।

स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर नरेंद्र आहुजा का कहना है कि 7 वर्षीय बच्ची आद्या की डेंगू से हुई मौत की जांच के बाद अस्पताल को नोटिस दिया गया था, जिसमें अस्पताल का जवाब नियमों के अनुसार संतोषजनक नहीं मिला, जिसके चलते अस्पताल के ब्लड बैंक का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया।

आहुजा ने कहा कि ब्लड व प्लेटलेट्स के ज्यादा रेट लिए गए थे और जब अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा गया तो प्रबंधन की तरफ कहा गया कि बिल में गलती से ज्यादा रेट लिखे गए। आहुजा ने कहा कि ब्लड बैंक में 32 कमियां पाई गईं थीं, लेकिन मुख्य कारण ज्यादा रेट लेने का था। यही कारण है कि ब्लड बैंक का लाइसेंस निलंबित किया गया है। फोर्टिस अस्पताल का ड्रग्स लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया है।

बता दें कि, इससे पहले राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कहा था कि गुरुग्राम स्थित फोर्टिस हास्पिटल ने डेंगू के एक मरीज के इलाज में काम आई दवाओं व अन्य सामानों पर 1700 प्रतिशत तक अधिक मार्जिन वसूला गया।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि दिल्ली के निवासी जयंत सिंह की सात साल की बेटी आध्या डेंगू की वजह से 15 दिन गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती रही, इसके बाद उसकी मौत हो गई थी। जिसके बाद फोर्टिस अस्पताल की तरफ से बच्ची के पिता जयंत सिंह को 15 लाख 59 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया। पिता का आरोप है कि फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही से उनकी बेटी की मौत हुई।

यह मामला तब सामने आया जब जयंत सिंह ने ट्विटर के जरिये केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को इसकी जानकारी दी। सोशल मीडिया पर जब बहस छिड़ी तो नड्डा ने जांच के आदेश दिए।

वहीं, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन वरिष्ठ डॉक्टरों की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठन किया था, जिसमें अस्पताल प्रबंधन दोषी पाया गया था।

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