पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई बोले- भारत की न्याय प्रणाली काफी जर्जर, लोग कोर्ट जाकर पछताते हैं

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अयोध्या विवाद पर केंद्र सरकार के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला देने वाले भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश (CJI) और राज्यसभा सांसद रंजन गोगोई ने कहा कि हमारी न्याय प्रणाली काफी बोझिल और घिसी पिटी है जो अक्सर वक्त पर न्याय देने में असफल रहती है। बता दें कि, गोगोई ने देश के प्रधान न्यायाधीश का पद तीन अक्टूबर 2018 से 17 नंवबर 2019 तक संभाला था।

रंजन गोगोई

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रंजन गोगोई ने कहा कि भारत की न्याय प्रणाली इस कदर जर्जर हो चुकी है कि लोगों को अदालत का दरवाजा खटखटाने के अपने फैसले पर पछतावा होता हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब अदालतें आम आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई हैं और सिर्फ धनी और कॉर्पोरेट वर्ल्ड के लोग ही कोर्ट का रुख करना चाहते हैं।

उन्होंने न्यायपालिका के सदस्यों से स्थिति में सुधार के लिए कदम उठाने की अपील करते हुए कहा कि मौजूदा प्रणाली कई कारणों से काम नहीं कर पा रही है, इसलिए जजों की नियुक्ति और उनकी ट्रेनिंग के तरीके में तुरंत बदलाव लाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी भी समस्याओं में से एक है।

जब उनसे पूछा गया कि जो लोग उनको बार-बार निशाना बना रहे हैं और तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं, क्या वो उनके खिलाफ मुकदमा दायर करेंगे, जस्टिस गोगोई ने कहा, “अगर आप कोर्ट जाएंगे तो यही होगा कि इन तोहमतों पर आपकी कोर्ट में भी खिंचाई होगी, न कि न्याय मिलेगा।” गोगोई यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, “मुझे ऐसा कहने में कोई हिचक नहीं है। कोर्ट कौन जाता है। अगर आप अदालत गए तो पछताएंगे। आप कॉर्पोरेट वर्ल्ड से हैं तो एक मौका तलाशने कोर्ट जाते हैं। अगर आप सफल होते हैं तो करोड़ों रुपये आएंगे…”

जस्टिस गोगोई ने कहा, “हम पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना चाहते हैं लेकिन हमारे पास जर्जर न्यायपालिका है… 2020 में जब न्यायपालिका समेत हरेक संगठन का कामकाज बिल्कुल मंद पड़ गया तो निचली अदालतों में 60 लाख जबकि विभिन्न हाई कोर्ट्स में करीब 3 लाख जबकि सुप्रीम कोर्ट में करीब छह से सात हजार नए केस आ गए। वक्त आ गया है कि हमें एक रोडमैप बनाना ही होगा। न्यायपालिका प्रभावी तौर पर काम करे, इसके लिए यह बहुत जरूरी है जो हो नहीं पा रहा है।”

उन्होंने वर्तमान समय में भी चिंता व्यक्त की। राज्यसभा सांसद ने नई विकसित हो रही प्रवृत्तियों पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि आज ताकतवर और चीखने-चिल्लाने वाले लोग जजों समेत अन्य दूसरे लोगों की छवि खराब करने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से कुछ जज इनका निशाना बनने के बाद टूट जाते हैं। उन्होंने किसान आंदोलन और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी आंदोलन पर सवालों के जवाब में कहा कि कुछ राजनीतिक कानूनी समाधान करने होंगे और अदालतों को भी इन मुद्दों को देखना होगा।

बता दें कि, गोगोई नवंबर 2019 में प्रधान न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए और बाद में सरकार ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया। रंजन गोगोई की अगुआई वाली बेंच ने ही राम मंदिर मामले में फैसला सुनाया था। उन्होंने इस मामले में लगातार 40 दिनों तक सुनवाई कर केस का निपटारा किया था। न्यायमूर्ति गोगोई देश के 46वें प्रधान न्यायाधीश रहे। उन्होंने देश के प्रधान न्यायाधीश का पद तीन अक्टूबर 2018 से 17 नंवबर 2019 तक संभाला था।

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