तथाकथित “पहली मुस्लिम महिला इमाम” का सच

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जमीदा बीवी उर्फ़ जमीदा टीचर के नमाज़ पढ़ाने का वीडियो काफ़ी लोगों ने देखा होगा। मैंने भी जिज्ञासापूर्वक देखा कि कौन है वो महिला जो मर्दों की नमाज़ की इमामत कर रही है, वीडियो देखते वक़्त मुझे आगे खड़े कैमरों से लैस लोग दिखे।

मैंने फ़िर उस वीडियो को और ग़ौर से देखा।

अगर आप देखें तो आपको मिलेगा कि महिला के पीछे खड़े सभी लोगों की नीयत बाँधने का तरीक़ा अलग अलग है। रुकू (नमाज़ में झुकना) के बाद ये खड़े होते वक़्त “अल्लाहो अक़बर” कहती हैं जो कि किसी भी फ़िरक़े द्वारा पढ़ी जाने वाली नमाज़ में नहीं मिलेगा। आपके वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, कुछ तौर तरीक़े अलग हो सकते हैं मगर नमाज़ पढ़ने का मूलभूत तरीक़ा सबका एक जैसा होता है चाहे शिया हो, सुन्नी हो, अहले हदीस हो, क़ादियानी हो या कोई और फ़िरक़ा सभी लोग रुकू से खड़े होते वक़्त ” समी अल्लाहुलिमन हमिदः ” पढ़ते हैं।

उसके बाद ध्यान दिया तो मोहतरमा ने एक सजदा किया और नमाज़ मुकम्मल कर दी। जिसने अपनी पूरी ज़िन्दगी में एक बार भी नमाज़ पढ़ी हो वो जानता है कि हर रकात में सजदे दो होते हैं।

खैर ये सब देख के दिमाग में तरह तरह के सवाल आने शुरू हो गए, लगा कि इनके बारे में और जानकारी इकट्ठा की जाए।

मोहतरमा के बारे में ढूँढना शुरू किया तो पता चला इनपे ज़ी न्यूज़ पूरा प्रोग्राम कर चुका है। बस फ़िर क्या था। मेरा शक और गहरा गया, सवाल और बढ़ गए। और जाँच पड़ताल की तो पता चला जमीदा केरल में रहती हैं और क़ुरआन सुन्नत सोसाइटी नामक संस्था की सेक्रेटरी हैं, ये आए दिन मुस्लिम मुद्दों के नाम पर लोगों से भिड़ी रहती हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात आगे पता चली। हदिया याद है? वही केरल की #BraveHadiya जिसने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम अपनाकर शादी की और उस शादी को ज़बरदस्ती लव जिहाद का मामला बना दिया गया, वही हदिया जिसने सुप्रीम कोर्ट तक जाकर अपना हक़ लिया।

ये मोहतरमा हदिया मामले में हदिया को जबरन क़ैद करने वालों के साथ खड़ी थीं। इन्होंने ही हदिया के पति पर ISIS से जुड़े होने का आरोप लगाया था। इन्होंने ही हदिया की ज़बरदस्ती घर वापसी कराने की कोशिश की थी।

बस इसके बाद दिमाग सुन्न हो गया और सारे सवालों के जवाब खुद बखुद मिल गए। उम्मीद है आपको भी मिल गए होंगे।

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