तीन तलाक: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दर्ज हुई पहली FIR, सपा की पूर्व MLA गजाला लारी समेत 5 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

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सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में मंगलवार(22 अगस्त) को मुस्लिम समुदाय में प्रचलित एक बार में ‘तीन तलाक’ कह कर तलाक देने की प्रथा खत्म करते हुये इसे पवित्र कुरान के सिद्धांतों के खिलाफ और इससे इस्लामिक शरिया कानून का उल्लंघन करने सहित अनेक आधारों पर निरस्त कर दिया।

Patrika File Photo

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के कुछ देर बाद ही मंगलवार को कानपुर में तीन तलाक को लेकर पहली FIR दर्ज हुई। शीर्ष अदालत का फैसला आने के बाद कानपुर के स्वरूप नगर थाने में समाजवादी पार्टी(सपा) की पूर्व विधायक गजाला लारी समेत पांच लोगों के खिलाफ दहेज की मांग पूरी न कर पाने पर तलाक देने और प्रताड़ित करने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

‘हिंदुस्तान’ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, चेन्नई निवासी सोफिया अहमद का निकाह 12 जून 2015 को कानपुर के कर्नलगंज निवासी कारोबारी शारिक अराफात के साथ हुआ था। शारिक की बहन गजाला लारी उस समय देवरिया के रामपुर कारखाना से सपा विधायक थीं।

आरोप है कि परिजनों ने दहेज में बीएमडब्लू कार समेत, 10 लाख रुपये नगद और बीस लाख रुपये के जेवर दिए थे। सोफिया का आरोप है कि 13 अगस्त 2016 को सोफिया के पति ने उसे नशे की हालत में तलाक दे दिया। सोफिया का आरोप है कि उसकी ननद गजाला लारी और उसका बेटा मंजर लारी भी उसे प्रताड़ित करता था।

सोफिया का आरोप है कि उसे घर से भी निकाल दिया गया। उसने पुलिस से शिकायत की लेकिन सत्ता के दबाव के चलते पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। उसने किसी तरह से एक बार मारपीट और घरेलू हिंसा का मामला दर्ज भी कराया, लेकिन सत्ता के दबाव में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

गजाला जारी ने आरोपों को किया खारिज

‘जनता का रिपोर्टर’ से खास बातचीत के दौरान गजाला लारी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया। फोन पर बातचीत के दौरान पूर्व विधायक ने कहा कि सोफिया द्वारा उनके परिवार पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि आखिर वह पिछले एक साल तक क्या कर रही थीं?

गजाला ने कहा कि सोफिया ने अपनी इच्छा के मुताबिक पिछले एक साल से अपना ससुराल छोड़कर अपने मायके रह रही हैं, जबकि उनके भाई शारिक सहित उनका पूरा परिवार उनसे कई बार घर आने को कह चुका है। गजाला ने कहा कि सोफिया को वह अपनी छोटी बहन की तरह मानती हैं, लेकिन उन्होंने मेरे ऊपर ही बेबुनियाद आरोप लगाते हुए केस दर्ज करवा दी हैं।

पूर्व सपा विधायक ने कहा कि उनका भाई शारिक बहुत ही शरीफ इंसान है, आप आकर खुद पता कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह किसी भी महिला के साथ ऐसा व्यवहार नहीं कर सकता है, वह तो अपने पत्नी से बेइंतहा प्यार करता है। उन्होंने कहा कि सोफिया के परिवार का रिकॉर्ड बहुत ही खराब है। इससे पहले उनकी बड़ी बहन ने भी अपने ससुराल वालों के साथ ऐसा व्यवहार कर चुकी हैं।

गजाला का आरोप है कि सोफिया लगातार उनके भाई पर हमारे मां को छोड़ अलग रहने का दबाव बना रही थीं, लेकिन जब शारिक इस बात के लिए तैयार नहीं हुआ तो उन्होंने अचानक ससुराल छोड़ अपने मायके चली गईं और मेरे परिवार पर बेबुनियाद आरोप लगाना शुरू कर दिया।

उन्होंने कहा कि जहां तक मेरा सवाल है तो उस वक्त मैं विधायक थी, मुझे तो बहुत कम अपने घर जाने का मौका मिलता था। ऐसे में मेरे द्वारा उनको प्रताणित करने का तो सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने कहा कि हम लोग आज भी उन्हें ससुराल में आकर रहने की गुजारिश करते हैं, लेकिन वह मीडिया की सुर्खियों में रहने के लिए मेरे और मेरे परिवार पर आधारहीन आरोप लगा रही हैं।

तीन तलाक खत्म

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला देते हुए मुस्लिमों में एक साथ तीन तलाक की प्रथा को अमान्य, असंवैधानिक और गैरकानूनी करार दिया। अब तीन बार तलाक कहने से कोई निकाह खत्म नहीं होगा। न्यायालय ने कहा कि तीन तलाक की यह प्रथा कुरान के मूल सिद्धांत के खिलाफ है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जे. एस. खेहर की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने 18 माह की सुनवाई के बाद 3-2 के बहुमत से तीन तलाक को बराबरी के अधिकार वाले संविधान के अनुच्छेद 14, 15 के तहत असंवैधानिक घोषित कर दिया। तीनों जजों ने कहा कि 1937 के मुस्लिम शरीयत कानून के तहत तलाक को धारा 2 में मान्यता दी गई है और उसकी विधि बताई गई है।

संविधान के सिद्धांतों को देखते हुए तीन तलाक स्पष्ट रूप से मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ है, इसलिए इसे सिरे से रद्द किया जाता है। बहुमत के फैसले से अलग मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर ने अल्पमत फैसले में तीन तलाक को गलत माना, लेकिन इसे रद्द करने से इनकार दिया।

प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर ने तीन तलाक की इस प्रथा पर छह महीने की रोक लगाने की हिमायत करते हुये सरकार से कहा कि वह इस संबंध में कानून बनाए। सीजेआई ने कहा कि मुस्लिम देशों में भी तीन तलाक खत्म कर दिया गया है, ऐसे में हम क्यों पीछे रहें?

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