छत्तीसगढ़ के पूर्व CM और BJP नेता रमन सिंह के दामाद पर लगा 50 करोड़ रुपये के घोटाले का गंभीर आरोप, FIR दर्ज

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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के दामाद पर करोड़ों रुपये के घोटाले का गंभीर आरोप आरोप लगा है। रमन सिंह के दामाद पुनीत गुप्ता के खिलाफ शुक्रवार (15 मार्च) को 50 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता के सिलसिले में मामला दर्ज किया गया। पुलिस के मुताबिक, सिंह के दामाद पुनीत पर सरकारी डीकेएस अस्पताल के अधीक्षक पद पर रहते हुए 50 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का गंभीर आरोप है।

(Sanjeev Verma/HT File PHOTO)

रायपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि डीकेएस अस्पताल के अधीक्षक कमल किशोर सहारे की शिकायत के आधार पर गुप्ता के खिलाफ ठगी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में सहारे ने आरोप लगाया है कि अपने कार्यकाल में गुप्ता ने 50 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता की।

वहीं, रायपुर के एसएसपी ने समाचार एजेंसी ANI से कहा कि रमन सिंह के दामाद पुनीत गुप्ता के खिलाफ राज्य के स्वास्थ्य विभाग में 50 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने जांच कमिटी का गठन किया था, जिसने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

रमन सिंह के खिलाफ जांच की मांग कर चुके हैं जोगी

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी वर्ष 2017 में रमन सिंह के खिलाफ हेलीकॉप्टर घोटाले में जांच की मांग उठा चुके हैं। उन्होंने उस वक्त मांग करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री रमन सिंह के खिलाफ जांच शुरू करनी चाहिए, जिनकी सरकार ने अगस्ता वेस्टलैंड से हेलीकॉप्टर की खरीद में साल 2008 में एक बिचौलिये को भुगतान किया। अजित जोगी ने पनामा दस्तावेज मामलों में कथित तौर पर रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह के विदेशी बैंक खातों से जुड़े मामले में कार्रवाई करने की भी मांग की थी।

अतित जोगी ने कहा था कि यदि 2 अक्टूबर (महात्मा गांधी जयंती) तक जांच नहीं शुरू की गई, तो वह हजारों लोगों के साथ दिल्ली में जंतर मंतर पर उपवास शुरू करेंगे। जोगी ने यह भी आरोप लगाया कि बीजू जनता दल (बीजद) सांसद बिजयंत पांडा की कंपनी को साल 2007-2008 के दौरान विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने में अनियमितता बरती गई, जिस वक्त पी.चिदंबरम केंद्रीय वित्त मंत्री थे। उन्होंने इसकी जांच की मांग की।

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