किसान आंदोलन की कवरेज करने पहुंचे ‘इंडिया टीवी’ के रिपोर्टर को किसानों ने भगाया, ‘गोदी मीडिया’ मुर्दाबाद के लगाए नारे

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मोदी सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर किसान पिछले 56 दिनों से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर डटे हुए हैं तो वहीं सरकार भी नरम पड़ती नहीं दिख रही। किसान आंदोलन को लेकर देश की सियासत भी लगातार गरमाती जा रही है। किसानों के विरोध प्रदर्शन को लेकर लगभग सभी समाचार चैनलों पर डिबेट शो का भी आयोजन किया जा रहा हैं। इन सबके बीच मीडिया की कथित भूमिका को लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर विरोध कर रहे हजारों-लाखों किसानों का केंद्र सरकार के साथ-साथ अब ‘गोदी मीडिया’ पर भी गुस्सा फुटता जा रहा हैं। वहीं, किसान आंदोलन की कवरेज करने पहुंचे ‘इंडिया टीवी’ के रिपोर्टर को किसानों ने वहां से भगा दिया। इस दौरान किसानों ने ‘गोदी मीडिया’ और ‘दलाल मीडिया’ के नारे भी लगाएं।

इंडिया टीवी

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिखाई दे रहा है कि आंदोलन कर रहे किसान समाचार चैनल ‘इंडिया टीवी’ के रिपोर्टर के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि आंदोलन कर रहे किसान इंडिया टीवी का विरोध कर रहे हैं और इसके साथ वह इस टीवी चैनल को ‘भाजपा का एजेंट’ तक बता रहा हैं। ‘इंडिया टीवी’ के रिपोर्टर का विरोध कर रहें किसान ‘गोदी मीडिया’ के खिलाफ भी नारेबाजी करते दिखाई दे रहे है।

वीडियो में प्रदर्शनकारी किसान कह रहे हैं कि इंडिया टीवी दलाल मीडिया है और वह सिर्फ भाजपा की दलाली करता है। इसेक बाद किसान गोदी मीडिया और दलाल मीडिया मुर्दाबाद के नारे लगाने लग जाते हैं। बढ़ते विरोध को देखते हुए रिपोर्टर और कैमरामैन को वहां से निकल कर जाना ही पड़ा।

हालांकि, यह वीडियो कब का है और कहां का है, ‘जनता का रिपोर्टर’ इसकी पुष्ठी नहीं करता हैं। लेकिन, यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा हैं। बता दें कि, इससे पहले किसानों का ऐसा ही गुस्सा ‘आज तक’ और ‘इंडिया न्यूज़’ रिपोर्टर और कैमरामैन को भी झेलना पड़ा था।

गौरतलब है कि, केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के अंदरूनी इलाकों से आए हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर 26 नवंबर से विरोध प्रदर्शन पर बैठे हैं। वे हरियाणा की सिंघु, टिकरी सीमा और उत्तर प्रदेश की गाजीपुर और चिल्ला सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। किसानों के इस आंदोलन को कई संगठनों और राजनितिक दलों का समर्थन मिल चुका है।

कड़ाके की ठंड के बाद भी विरोध-प्रदर्शन कर रहें प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि जब तक तीनों काले कानून वापस नहीं लिए जाते हम यहीं बैठे रहेंगे। उनकी मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दी जाए। किसानों ने 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को दिल्ली में किसान परेड निकालने की चेतावनी दी है।

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