कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन 48वें दिन जारी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर

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मोदी सरकार के तीनों नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का मंगलवार को 48वां दिन है। बता दें कि, देश की राजधानी दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे किसान संगठनों ने कह दिया है कि किसी कमेटी में मसले को ले जाना उन्हें मंजूर नहीं है।

किसान आंदोलन
फोटो: टिकरी बॉर्डर (जनता का रिपोर्टर, सुरेश कुमार)

सुप्रीम कोर्ट आज (मंगलवार) को फिर इस मामले में सुनवाई करेगी। अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव ने आने से कहा कि सरकार कोर्ट की आड़ में मामले को लटकाना चाहती है जो किसानों को मंजूर नहीं है। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि कृषि कानून जनता की चुनी हुई सरकार ने बनाया है और किसान इसे निरस्त करने की मांग सरकार से कर रही है। यह सरकार से उनकी फरियाद है।

उन्होंने कहा कि आंदोलन को तेज करने को लेकर पहले से घोषित उनका कार्यक्रम चलता रहेगा। बुधवार को लोहड़ी पर्व पर देशभर में किसान तीनों कानूनों की प्रतियां जलाएंगे। फिर 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर पहले से घोषित कार्यक्रम देशभर में रहेगा और जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन भी 20 जनवरी तक चलता रहेगा। इसके बाद 23 जनवरी से लेकर 25 जनवरी तक राज्यों के राज भवन के सामने धरना प्रदर्शन होगा।

किसान नेता हनन मुल्ला ने एक बार फिर दोहराया कि 26 जनवरी पर जो किसान परेड का आयोजन है उससे गणतंत्र दिवस के उत्सव में कोई बाधा डालने का किसानों का कोई मकसद नहीं है। 26 जनवरी को देशभर में किसान परेड का आयोजन रखा गया है और यह कार्यक्रम गणतंत्र दिवस का मुख्य उत्सव समाप्त होने के बाद होगा। उन्होंने कहा किसान शांतिपूर्वक तरीके से प्रदर्शन कर रहा है और आगे भी उनका प्रदर्शन इसी प्रकार चलता रहेगा।

भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के जनरल सेक्रेटरी हरेंद्र सिंह लाखोवाल ने भी बताया कि बुधवार को लोहड़ी के अवसर पर देशभर में किसान तीनों कानूनों की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा यह कानून किसानों के हित में नहीं है और इन्हें वापस ले लेना चाहिए।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया था। मंगलवार को फिर इस मामले में शीर्ष अदालत में सुनवाई होनी है। (इंपुट: आईएएनएस के साथ)

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