RSS मुख्‍यालय में भाषण के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुई प्रणब मुखर्जी की ‘फर्जी’ तस्वीर, बेटी शर्मिष्ठा बोलीं- जिसका डर था वही हुआ

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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी एवं कांग्रेस नेता शमिष्ठा मुखर्जी ने गुरुवार (7 जून) रात कहा कि जिस बात का उन्हें डर था और अपने पिता को जिस बारे में उन्होंने आगाह किया था, वही हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि जिसका डर था, बीजेपी/आरएसएस के ‘‘डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट’’ ने वही किया। बता दें कि शर्मिष्ठा मुखर्जी ने उनके आरएसएस के कार्यक्रम में जाने का विरोध किया था और ट्विटर पर अपने पोस्ट के जरिए उन्होंने अपनी नाखुशी भी जाहिर की थी।

दरअसल, सोशल मीडिया पर आरएसएस के कार्यक्रम से जुड़ी छेड़छाड़ की गई एक ‘फर्जी तस्वीर’ वायरल हो रही है। इस तस्वीर में आरएसएस नेताओं की तरह प्रणब मुखर्जी को भी ध्वज प्रणाम करते हुए दिखाया गया है। हालांकि, प्रणब मुखर्जी ने ऐसा नहीं किया था। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने रुचि शर्मा नाम की एक यूजर की ट्वीट को रिट्वीट किया है जिसमें दो तस्वीरें हैं। इनमें से एक तस्वीर में प्रणब मुखर्जी संघ की काली टोपी में दिख रहे हैं।

उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से इस फर्जी तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा है कि उन्हें इसी बात का डर था और इसी को लेकर उन्होंने अपने पिता को चेताया था। उन्होंने लिखा कि कुछ घंटे भी नहीं बीते हैं और बीजेपी-आरएसएस के ‘डर्टी ट्रिक्स डिमार्टमेंट’ ने रंग दिखाना शुरू कर दिया है।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर छेड़छाड़ की गई तस्वीरों में ऐसा नजर आ रहा है कि पूर्व राष्ट्रपति संघ नेताओं और कार्यकर्ताओं की तरह अभिवादन कर रहे हैं। बता दें कि शर्मिष्ठा मुखर्जी ने उनके आरएसएस के कार्यक्रम में जाने का विरोध किया था और ट्विटर पर अपने पोस्ट के जरिये उन्होंने अपनी नाखुशी भी जाहिर की थी। उन्होंने अपने पिता को न सिर्फ नसीहत दी, बल्कि इस घटना से सबक लेने की अपील भी की थी।

प्रणब मुखर्जी ने RSS के मंच से पढ़ाया राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति का पाठ

बता दें कि तमाम कांग्रेस नेताओं की नाराजगी के बीच पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी गुरुवार (7 जून) को नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के मुख्यालय पहुंचे। यहां आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गुलदस्‍ता भेंटकर पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी का स्‍वागत किया। जिसके बाद मुखर्जी ने आरएसएस के बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम को संबोधित किया। पूर्व राष्ट्रपति के नागपुर में संघ के मुख्यालय में जाने और वहां पर संघ के प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को भाषण देने के फैसले पर हर जगह चर्चा हो रही है। उनके भाषण का हर कोई अपने-अपने हिसाब से मायने निकाल रहा है।

इससे पहले पूरी कांग्रेस असहज नजर आ रही थी। यहां तक कि उनकी बेटी और कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि उनका (डॉ.मुखर्जी) भाषण किसी को याद नहीं रहेगा हां, उनकी तस्वीर का इस्तेमाल जरूर किया जाएगा। लेकिन कुशल राजनेता मुखर्जी बिना किसी दबाव में आए संघ के कार्यक्रम में गए और अपने ‘उच्चस्तरीय’ भाषण के जरिये संघ को उसी के मच पर कई नसीहतें दें डालीं। जिसके बाद कांग्रेस नेताओं के सुर बदल गए और उन्होंने आखिरकार राहत की सांस ली।

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि मैं यहां राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बात करने आया हूं। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा बहुलतावाद एवं सहिष्णुता में बसती है। पूर्व राष्ट्रपति ने अपने 30 मिनट के भाषण का अंत धन्यवाद, जय हिंद और वंदेमातरम् बोल कर किया। मुखर्जी ने कहा कि भेदभाव, नफरत से भारत की पहचान को खतरा है। उन्होंने कहा कि सहनशीलता हमारे समाज का आधार है। उन्होंने कहा कि असहिष्णुता केवल हमारी राष्ट्रीय पहचान को कमजोर करेगी। राष्ट्रवाद किसी धर्म और भाषा में बंटा नहीं है।

मुखर्जी ने कहा कि भारत के लोग 122 से ज्यादा भाषा और 1600 से ज्यादा बोलियां बोलते हैं। यहां सात बड़े धर्म के अनुयायी हैं और सभी एक व्यवस्था, एक झंडा और एक भारतीय पहचान के तले रहते हैं। अपने भाषण के जरिए मुखर्जी ने विरोध के बावजूद संघ के कार्यक्रम में जाने का कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि मुझे भारत पर अपनी बात रखनी है। साथ ही मैं यहां राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बात करने आया हूं। तीनों को अलग-अलग रूप में देखना मुश्किल है।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि सबका साथ जरूरी है। इससे पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ सिर्फ हिंदुओं का संगठन नहीं है। संघ एक लोकतांत्रिक संगठन है। उन्होंने कहा कि सरकारें बहुत कुछ कर सकती हैं, लेकिन सब कुछ नहीं कर सकती हैं। उन्होंने साफतौर पर कहा कि घृणा से राष्ट्रवाद कमजोर होता है और असहिष्णुता से राष्ट्र की पहचान क्षीण पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संवाद में भिन्न मतों को स्वीकार किया जाना चाहिए।

पूर्व राष्ट्रपति की तीन अहम बातें

  • पूर्व राष्ट्रपति ने कहा देशभक्ति का मतलब देश के प्रति आस्था है। सबने मिलकर देश को उन्नत बनाया है। प्रणब ने कहा कि राष्ट्रीयता देश के प्रति समर्पण और आदर का नाम है।
  • मुखर्जी ने कहा कि भारत का राष्ट्रवाद यूरोपीय राष्ट्रों से अलग है। भारत का राष्ट्रवाद वसुधैव कुटुंबकम में है। हमारी राष्ट्रीय पहचान हासिल करने की एक लंबी प्रक्रिया रही है। इसमें भाषिक और धार्मिक विविधता के लिए पूरी जगह है। भारत के राष्ट्रवाद में सारे लोग समाहित हैं।
  •  जब किसी महिला या बच्चे के साथ बर्बरता होती है, तो देश का नुकसान होता है। हिंसा से डर का भाव आता है। हमें शारीरिक-मौखिक हिंसा को नकारना चाहिए। लंबे वक्त तक हम दर्द में जिए हैं। शांति, सौहार्द और खुशी फैलाने के लिए हमें संघर्ष करना चाहिए।

 

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