IOS अधिवेशन: ‘संविधान ने सभी को दिया है बराबरी का हक़’

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हिंदुस्तान के संविधान में इंसाफ, भाईचारा, आज़ादी और बराबरी की बात मज़बूती से की गई है, लेकिन अबतक पूर्ण रूप से इसको लागू नही किया जा सका है। शिक्षा, आर्थिक और सामाजिक रूप से हिंदुस्तानी समाज में आज भी भेदभाव है। ये अलग बात है कि ये मामला सिर्फ हिंदुस्तान का ही नही, बल्कि दूसरे देशों का भी यही हाल है। उक्त बातें कानून के जानकार व नलसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के वाईस चांसलर प्रोफेसर फैजान मुस्तफा ने इंस्टिट्यूट ऑफ ऑब्जेक्टिव स्टडीज (IOS) के तीन दिवसीय समापन समारोह में कही।उन्होंने इंसाफ भाईचारा का बखान करते हुए और मिसाल देकर समझाया कि हिंदुस्तान के कानून में तमाम चीजों के लिए जगह तो दी गई है, मगर उसे सही तरिके से लागू नही किया गया है। आज भी सैकड़ों ऐसे गांव हैं जहां दलितों को घोड़े पर सवार होकर बारात ले जाने तक कि इजाजत नही है। पिछड़ों कि बुनियाद पर कानून में रिजर्वेशन देने की बात तो कही गई है लेकिन एक विशेष वर्ग को पिछड़ा होने के बावजूद रिजर्वेशन नही दिया जाता है क्यों कि वो मुसलमान है। फैजान मुस्तफा ने संघ प्रमुख मोहन भागवत का नाम लेते हुए कहा कि हमारी उनसे अपील है कि वो रिजर्वेशन पर गौर करें कि आज भी इसकी जरूरत है, और जिस बुनियाद पर रिजर्वेशन दी जाती है वो किस हद तक सही है।

इंस्टिट्यूट ऑफ ऑब्जेक्टिव स्टडीज (IOS) के चेयरमैन डॉक्टर मोहम्मद मंज़ूर आलम समापन समारोह कि अध्यक्षता करते हुए तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया और कहा कि 30 साला सफर पूरा होने पर IOS ने विभिन्न मुद्दों पर अधिवेशन करता रहा है और हमारा मकसद समाज में एक दूसरों को जोड़ना है। आज का अधिवेशन भी इसकी एक अहम कड़ी है। हिंदुस्तान समेत दुनियाभर के स्कॉलर व विद्वान से मेरी अपील है कि इस पहलू पर गौर करें ताकि एक बेहतर समाज का निर्माण हो सके। उन्होंने कहा कि आप हमारा साथ दें आपकी सोच को IOS आगे लेकर बढ़ेगी।

वहीं तुर्की के डॉक्टर मोहम्मद अकरम ने कहा कि अरबी मुसलमानों की मातृभाषा है मगर मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं हिंदुस्तान में अपने ही भाइयों के बीच हूं, हिंदुस्तान हमेशा से अमन व भाईचारा के लिए मशहूर है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में मुसलमान परेशान हाल में है, ऐसे में जरूरत है कि हम इंसानियत की भलाई के लिए कोशिश करें, जो देश कभी पूरी दुनिया में हुकूमत कर रही थी आज वहां साम्प्रदायक तत्वों का बोल बाला है।इस अधिवेशन में शामिल मौलाना आज़ाद नेशनल यूनिवर्सिटी जोधपुर के वाइस चांसलर प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने तमाम मज़हबों के धर्मगुरुओं के आपसी बातचीत पर जोर दिया और कहा कि मसलक की बुनियाद पर समाज में विरोधाभास नही होना चाहिए। अपनी मर्ज़ी के मुताबिक जो मसलक चाहे अख्तियार करें लेकिन दीन की बुनियाद पर आपसी इख़्तिलाफ़ न करें।

उन्होंने फैजान मुस्तफा का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करते हुए कहा कि जो फैसले कुरान और हदीस के खिलाफ होते हैं उसे हम हर्गिज मानने के पाबंद नही हैं। उन्होंने ये भी कहा कि जो कौम कर्बला की घटना बगदाद की तबाही और उस्मानिया खिलाफत के खत्म होने के बाद भी जिंदा है, वो आगे भी जिंदा रहेगी, हमे घबराने और मायूस होने की जरूरत नही है।

अधिवेशन समापन समारोह में IOS की तरफ से सात सूत्री प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे लोगों ने सर्वसहमति से पास किया। गौरतलब है कि तीन दिवसीय अधिवेशन में दुनिया भर से (सउदी अरब, अमेरिका, अफ्रीका, कुवैत, कतर, लेबनान, श्रीलंका, और बंगाल देश) आदि देश के शोधकर्ता शामिल हुए और अपना पेपर प्रस्तुत किया।

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