प्रदर्शनकारी किसानों को ‘खालिस्तानी’ और ‘राष्ट्र-विरोधी’ के तौर पर पेश नहीं करे मीडिया: एडिटर्स गिल्ड

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केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान आंदोलन को लेकर देश की सियासत भी लगातार गरमाती जा रही है। वहीं, कुछ किसान संगठनों ने 8 दिसंबर को भारत बंद बुलाया है। इन सबके बीच मीडिया की कथित भूमिका को लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर विरोध कर रहे हजारों किसानों का केंद्र सरकार के साथ-साथ अब ‘गोदी मीडिया’ पर भी गुस्सा फुटता जा रहा हैं। इस बीच, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) ने भी एडवाइजरी जारी कर कुछ मीडिया हाउस को सीख दी है।

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एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) ने दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन के समाचार कवरेज को लेकर शुक्रवार को चिंता प्रकट करते हुए कहा कि मीडिया का कुछ हिस्सा बगैर किसी साक्ष्य के प्रदर्शनकारी किसानों को ‘खालिस्तानी’ और ‘राष्ट्र-विरोधी’ बताकर आंदोलन को अवैध ठहरा रहा है। ईजीआई ने एक बयान में कहा कि यह जिम्मेदार और नैतिकतापूर्ण पत्रकारिता के सिद्धांतों के खिलाफ है।

बयान में कहा गया है, ‘‘द एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया राष्ट्रीय राजधानी में समाचारों के उन कवरेज के बारे में चिंतित है, जिनमें मीडिया के कुछ हिस्से में उन्हें खालिस्तानी, राष्ट्रविरोधी बताया जा रहा है तथा बगैर किसी साक्ष्य के प्रदर्शन को अवैध ठहराने के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है।’’ ईजीआई ने मीडिया को प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करने में निष्पक्ष और संतुलित रहने की भी सलाह दी।

ईजीआई प्रमुख सीमा मुस्तफा द्वारा जारी बयान में कहा गया है, ‘‘ईजीआई मीडिया संस्थाओं को किसानों के प्रदर्शन की रिपोर्टिंग में निष्पक्षता, वस्तुनिष्ठता और संतुलन प्रदर्शित करने की सलाह देता है तथा इसमें अपने लिए संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करने वालों के खिलाफ कोई पक्षपात नहीं करे। मीडिया को ऐसे किसी विमर्श में संलिप्त नहीं होना चाहिए जो प्रदर्शनकारियों को उनकी वेश भूषा के आधार पर अपमानित करता हो और उन्हें हीन मानता हो।’’

गौरतलब है कि, केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के अंदरूनी इलाकों से आए हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर 26 नवंबर से विरोध प्रदर्शन पर बैठे हैं। वे हरियाणा की सिंघु, टिकरी सीमा और उत्तर प्रदेश की गाजीपुर और चिल्ला सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। (इंपुट: भाषा के साथ)

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