आधार डेटा लीक मामला: अखबार और पत्रकार पर FIR की एडिटर्स गिल्ड ने की निंदा, प्रेस की स्वतंत्रता पर बताया हमला, कांग्रेस ने भी मोदी सरकार पर साधा निशाना

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आधार कार्ड से जुड़ी सूचनाओं के कथित तौर पर लीक होने से जुड़ी एक खबर के प्रकाशन पर यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) द्वारा दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराये जाने को लेकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कड़ी निंदा की है। वहीं, केंद्र पर हमला बोलते हुए कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टालमटोल करने और इसकी जांच की बजाय ऐसा करने वाले को निशाने पर लेने का आरोप लगाया।

(AP Photo)

बता दें कि प्राधिकरण (UIDAI) के एक उपनिदेशक ने अंग्रेजी अखबार ‘द ट्रिब्यून’ और उसकी रिपोर्टर रचना खैरा पर मुकदमा दर्ज करवाया है, जिन्होंने ‘आधार डेटा लीक’ होने की रिपोर्ट की थी। ‘द ट्रिब्यून’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि व्हॉट्सऐप जैसे सोशल प्लेटफॉर्म पर अज्ञात लोग मात्र 500 रुपये में आधार डेटा बेच रहे हैं। हालांकि यूआईडीएआई ने डेटा लीक होने की रिपोर्टों को खारिज किया है।

प्रेस की आजादी पर हमला

न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक एडिटर्स गिल्ड ने अखबार और रिपोर्टर पर एफआईआर दर्ज करवाने के फैसले को अनुचित, अन्यायपूर्ण और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया है। एडिटर्स गिल्ड ने रविवार (7 जनवरी) को एक प्रेस रिलीज जारी करके कहा कि  ‘यूआईडीएआई द्वारा द ट्रिब्यून के रिपोर्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना एक पत्रकार को धमकाने की कार्रवाई मालूम पड़ती है।

इस पत्रकार द्वार आधार डेटा लीक का खुलासा पूरी तरह से जनता की भलाई का मुद्दा है। यह कार्रवाई पूरी तरह से अनुचित, अन्यायपूर्ण और प्रेस की आजादी पर सीधा हमला है।’ एडिटर्स गिल्ड ने अपने बयान में आगे कहा कि  ‘यूआईडीएआई को पत्रकार को धमकाने की जगह आधार डेटा लीक के मामले की पूरी जांच करवानी चाहिए थी।’ गिल्ड ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और पत्रकार के खिलाफ दर्ज मामले को वापस लिया जाए।

 

UIDAI ने दर्ज कराई FIR 

मामले का खुलासा होने पर यूआईडीएआई ने आधार डेटा लीक होने की संभावना से इनकार कर दिया था। रविवार को यूआईडीएआई के डायरेक्टर ने मामले का खुलासा करने वाली पत्रकार रचना खैरा और अखबार के खिलाफ दिल्ली क्राइम ब्रांच में विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करवाई है।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक UIDAI की ओर से दर्ज एफआईआर में अखबार ‘द ट्रिब्‍यून’, रिपोर्टर रचना खैरा के साथ-साथ तीन अन्य युवकों के नाम भी शामिल हैं। इस एफआईआर में अनिल कुमार, सुनील कुमार और राज के भी नाम शामिल हैं, क्योंकि रचना ने अपनी रिपोर्टिंग के दौरान इन्हीं से संपर्क किया था। हालांकि इन्हें आरोपी नहीं बताया गया है।

UIDAI के शिकायत निवारण विभाग के बीएम पटनायक की शिकायत पर केस दर्ज कराया गया है। पटनायक द्वारा कराई गई शिकायत में कहा गया है कि इन लोगों ने जानबूझकर आपराधिक षडयंत्र के तहत अनाधिकृत तरीके से आधार सिस्‍टम में घुसपैठ की है, जो कानून का उल्लंघन है इसलिए इन्हें सजा मिलनी ही चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक जॉइंट कमिश्‍नर (क्राइम ब्रांच) आलोक कुमार ने एफआईआर दर्ज करने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि UIDAI की ओर से साइबर सेल में IPC की धारा 419, 420, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज कराया गया है। साथ ही एफआईआर में आईटी एक्‍ट और आधार कानून के प्रावधानों को भी जोड़ा गया है।

एफआईआर के मुताबिक, ‘इन लोगों (एफआईआर में दर्ज लोगों के नाम) ने आपराधिक षडयंत्र के तहत अनाधिकृत तरीके से आधार सिस्‍टम में घुसपैठ की। उनका ये कदम कानून की विभिन्‍न धाराओं का उल्‍लंघन है। फिलहाल पुलिस केस की जांच कर रही है। पुलिस ने कहा कि प्राथमिकी में शामिल लोगों से पूछताछ की जाएगी।

अखबार ने रिपोर्ट में क्या दावा था?

अंग्रेजी अखबार द ट्रिब्यून ने 3 जनवरी को एक रिपोर्ट पब्लिश की थी, जिसमें दावा किया गया था कि कई गिरोह पैसे लेकर आधार डेटा लीक कर रहे हैं। अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 500 रुपये के बदले रिपोर्टर ने आधार के डाटाबेस का लॉगिन और पासवर्ड हासिल कर लिया था, जिससे लगभग 100 करोड़ आधार कार्ड का एक्सेस मिल गया था।

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 500 रुपए में एक सेलर ने व्हाट्सएप पर करोड़ों आधार कार्ड की डिटेल का एक्सेस दे दिया। रिपोर्टर ने बताया था कि इस काम के लिए उसने गिरोह चलाने वाले एक एजेंट से संपर्क किया था। उसे पेटीएम से 500 रुपए का भुगतान किया।

भुगतान के 10 मिनट के बाद एक शख्स ने उसे एक लॉग-इन आईडी और पासवर्ड दिया, जिससे पोर्टल पर किसी भी आधार नंबर की पूरी जानकारी ली जा सकती थी। इनमें नाम, पता, पोस्टल कोड, फोटो, फोन नंबर और ईमेल शामिल हैं। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक 500 रुपए के अलावा 300 रुपए और देने के बाद एजेंट ने रिपोर्टर को एक सॉफ्टवेयर भी दिया। इसके माध्यम से आधार नंबर देकर आधार कार्ड प्रिंट किया जा सकता है।

UIDAI की सफाई

वहीं प्राथमिकी दर्ज कराने को लेकर आलोचकों के निशाने पर आने के बाद UIDAI ने कहा कि वह प्रेस की आजादी समेत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करता है। प्राधिकार के अनुसार उसकी पुलिस शिकायत को संवाददाता को रोकने की कोशिश की तरह नहीं देखना चाहिए। प्राधिकरण ने कहा कि चूंकि यह अनाधिकृत जानकारी जुटाने का मामला है, इसमें आपराधिक प्रक्रिया शुरू की गई है।

कांग्रेस का मोदी सरकार पर निशाना

यूआईडीएआई द्वारा दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराये जाने को लेकर केंद्र पर हमला बोलते हुए कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टालमटोल करने और इसकी जांच की बजाय ऐसा करने वाले को निशाने पर लेने का आरोप लगाया। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि प्रत्येक भारतीय को सरकार की इस नासमझाी वाली कार्रवाई की निंदा करनी चाहिए।

कांग्रेस ने निजता के मुद्दे पर मोदी सरकार के इरादों पर भी सवाल उठाये। पार्टी ने इसके लिए पूर्व अटॉनी जनरल मुकुल रोहतगी के उस कथित बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि किसी भी नागरिक के पास खुद को लेकर पूर्ण अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार ने आधार डेटा लीक होने की बात स्वीकार की है। अब जांच करने की बजाय टालमटोल करते हुए मोदी जी संदेशवाहक को ही निशाना बना रहे हैं।

 

 

 

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