आर्थिक मंदी की वजह ‘तकनीकी’ है, नोटबंदी इसका कारण नहींः अमित शाह

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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी वाले फैसले को विकास की गिरती दरों और आर्थिक विकास में मंदी से जोड़ने वाली सभी रिपोर्टों को खारिज कर दिया है।

अमित शाह

ओडिशा में बोलते हुए, शाह ने कहा, नोटबंदी का आर्थिक विकास पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा हैं। अमित शाह ने कहा ‘नोटबंदी के बाद कई तिमाहियां बीत चुकी हैं। अगर नोटबंदी से कोई गिरावट होनी होती तो वह नोटबंदी की घोषणा के बाद की तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2016) में दिखाई दे जाती।’

उन्होंने कहा, कि आर्थिक मंदी की वजह ‘तकनीकी’ है, नोटबंदी इसका कारण नहीं है। GDP की यह गिरावट अस्थायी और तकनीकी कारणों की वजह से आई है।

आपको बताते इससे पूर्व भारत में आई आर्थिक मंदी पर चिंता व्यक्त करते हुए विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने जीडीपी के नवीनतम आंकड़ों पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी, जिसमें कहा गया था कि भारत के विकास में गिरावट “बहुत चिंताजनक” हैं। बसु ने कहा नोटबंदी के इस राजनीतिक फैसले की देश को एक भारी कीमत चुकानी होगी जिसका भुगतान देशवासियों को करना पड़ेगा।

नोटबंदी और GST का असर नए वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देखने को मिला है। चालू वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में आर्थिक विकास दर में बड़ी गिरावट हुई है और यह तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। अप्रैल से जून की तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद, जीडीपी की विकास दर महज 5.7 फीसदी रही है।

बसु ने कहा 2003 से 2011 तक भारत में विकास दर आम तौर पर प्रति वर्ष 8 प्रतिशत से अधिक रही है। वैश्विक संकट के चलते वर्ष, 2008 में, यह संक्षेप में 6.8 प्रतिशत पर गिरी, लेकिन 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट विकास भारत के लिए हैरान कर देने वाली है।

बसु ने आगे कहा कि ऐसे में जब तेल की कीमतें बेहद कम हैं, और चीन ने भारत को अंतरिक्ष में सीडिंग किया हो और हमारा विकास 8 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसलिए, पहली तिमाही में 5.7 प्रतिशत की वृद्धि दर का मतलब है कि विकास के 2.3 प्रतिशत अंक पर आ जाने की वजह से रूक गया है। यह एक भारी कीमत है।

जबकि इस बारें में अमेरिकी अर्थशास्‍त्री स्टीव एच. हांके ने कहा कि भारत में ‘नकदी पर हमले’ से जैसी उम्मीद थी, इसने अर्थव्यवस्था को मंदी के रास्ते पर धकेल दिया। अमेरिकी राज्‍य मैरीलैंड के बाल्टीमोर स्थित जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में अर्थशास्‍त्री हांके ने कहा, ‘नकद रकम के खिलाफ जंग छेड़ने से मोदी ने सरकारी तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था को मंदी के रास्ते पर धकेल दिया। मोदी के नोटबंदी के फैसले के बाद मैं यही सोच रहा था कि ऐसा होगा।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी वाले फैसले से भारत में अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा है।’ हांके ने इसके साथ ही कहा कि नोटबंदी की वजह से भारत 2017 में आर्थिक वृद्धि के मामले में नेतृत्व के मंच से नीचे खिसक सकता है।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा की थी। इसके तहत 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया था। सरकार के मुताबिक, उसने यह कदम कालाधन, नकली नोट और भ्रष्टाचार पर प्रहार करने के लिए उठाया था।

 

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