लाभ के पद का मामलाः चुनाव आयोग का हलफनामा, हाई कोर्ट में कहा- ‘सुनवाई योग्य नहीं है AAP विधायकों की याचिका, जुर्माने के साथ खारिज करें’

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लाभ के पद मामले में अयोग्य करार दिए गए आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व 20 विधायकों की अयोग्यता के मामले में चुनाव आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। चुनाव आयोग ने हाई कोर्ट में दाखिल इस हलफनामे में कहा है कि आप विधायकों की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, इसे जु्र्माने के साथ खारिज किया जाए। आयोग ने कहा है कि यह याचिका पथ से भटकी हुई और गलत समझ वाली है।Aam Aadmi PartyNDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के फैसले या कानून मंत्रालय के नोटिफिकेशन को नहीं बल्कि चुनाव आयोग की सिफारिश को चुनौती दी गई है, जबकि राष्ट्रपति अपने संवैधानिक अधिकार के तहत फैसला दे चुके हैं और मंत्रालय अधिसूचना जारी कर चुका है।

रिपोर्ट के अनुसार आयोग ने कहा है कि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 103 के तहत दिल्ली की सरकार के लिए एक्ट के तहत यह फैसला लिया है। कानून के मुताबिक राष्ट्रपति चुनाव आयोग की सिफारिश से अलग नहीं जा सकते। हलफनामे में कहा गया है कि अयोग्य करार विधायकों की दलील सही नहीं है कि ये प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है, क्योंकि उन्हें मौखिक सुनवाई का मौका नहीं दिया गया।

इस हलफनामे में आगे कहा गया है कि कानून में ये जनादेश नहीं है कि मौखिक सुनवाई अनिवार्य है। चुनाव आयोग की सुनवाई में खुद इन विधायकों ने ही कहा था कि आयोग सुनवाई न करे, क्योंकि मामला दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है। वहीं, हाईकोर्ट पहले ही कह चुका है कि फिलहाल अंतरिम आदेश लागू रहेगा, जिसमें चुनाव आयोग को उपचुनाव के लिए कदम न उठाने को कहा गया है। सात फरवरी को अगली सुनवाई होनी है।

विधायकों की याचिका पर सुनवाई के दौरान 30 जनवरी को दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा था कि वह अपने उस फैसले से जुड़े सभी तथ्यों को बेंच के सामने रखे, जिनके आधार पर आप के 20 विधायकों को अयोग्य करार दिया गया है। आयोग को एफिडेविट के जरिए संक्षेप में ये तथ्य डिविजन बेंच के सामने रखने हैं। हाईकोर्ट ने कहा था कि फिलहाल अंतरिम आदेश लागू रहेगा जिसमें चुनाव आयोग को उपचुनाव के लिए कदम न उठाने को कहा गया है।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति के आदेश के बाद विधानसभा की सदस्यता गंवाने वाले आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों में से कुल 8 पूर्व विधायकों ने हाई कोर्ट में ये याचिका लगाई है। आप विधायकों ने दावा किया कि उनके खिलाफ ऑफिस ऑफ प्रॉफिट यानि लाभ का पद का मामला बनता ही नहीं है। विधायकों ने अपनी याचिका में राष्ट्रपति की उस अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसके जरिए लाभ का पद धारण करने को लेकर उन्हें विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहरा दिया गया था।

20 विधायकों की सदस्यता रद्द

आपको बता दें कि दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है। लाभ के पद मामले में पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द हो गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 21 जनवरी को चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूरी दे दी। चुनाव आयोग ने 19 जनवरी को लाभ के पद मामले में इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए राष्ट्रपति से सिफारिश की थी। ये सभी विधायक 13 मार्च, 2015 से 8 सितंबर, 2016 तक संसदीय सचिव पद पर थे, जिसे ‘लाभ का पद’ माना गया है।

हालांकि, इस फैसले से केजरीवाल सरकार पर खतरा नहीं हैं। विधि मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में राष्ट्रपति के हवाले से कहा गया था कि चुनाव आयोग की सिफारिश पर दिल्ली विधानसभा के 20 सदस्यों को अयोग्य करार दिया गया है।अधिसूचना में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग द्वारा व्यक्त की गई राय के आलोक में, मैं, रामनाथ कोविंद, भारत का राष्ट्रपति, अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उक्त 20 सदस्यों को दिल्ली विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य ठहराता हूं।

गौरतलब है कि 14 फरवरी 2018 को आम आदमी पार्टी सरकार के तीन वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसे में यह दिल्ली की केजरीवाल सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। 20 विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में आप पार्टी के विधायकों की संख्या 66 से घटकर सीधे 46 पर आ गई है। अब 20 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने होंगे।

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Posted by Janta Ka Reporter on Saturday, 20 January 2018

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, आम आदमी पार्टी ने 13 मार्च 2015 को अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया था। इसको लाभ का पद बताते हुए एक वकील द्वारा राष्ट्रपति से शिकायत की गई थी। इसमें इनकी सदस्यता को रद्द करने की मांग की गई थी। 19 जून को वकील प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति के पास इन सचिवों की सदस्यता रद्द करने के लिए आवेदन किया था।

जिसके बाद राष्ट्रपति ने शिकायत चुनाव आयोग भेज दी थी। राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग से मामले की जांच का निर्देश दिया था। चुनाव आयोग ने आप के 21 विधायकों को ‘लाभ का पद’ मामले में कारण बताओ नोटिस दिया था। इस मामले में पहले 21 विधायकों की संख्या थी। हालांकि विधायक जनरैल सिंह के पिछले साल विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद इस मामले में फंसे विधायकों की संख्या 20 रह गई थी।

दिल्ली सरकार ने दिल्ली असेंबली रिमूवल ऑफ डिस्क्वॉलिफिकेशन ऐक्ट-1997 में संशोधन किया था। इस विधेयक का मकसद संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से छूट दिलाना था, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नामंजूर कर दिया था। इसके बाद से इन सभी 21 विधायकों की सदस्यता पर और सवाल खड़े हो गए थे। आप के विधायक 13 मार्च 2015 से 8 सितंबर 2016 तक संसदीय सचिव के पद पर थे।

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